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लातेहारः SDO सह LRDC जयप्रकाश झा समेत पांच रेवेन्यू अफसरों पर धोखाधड़ी का केस दर्ज, जमीन का फर्जी दस्तावेज तैयार कर हड़प ली दिव्यांग की राशि

भुसाड़ ग्राम निवासी जंगाली भगत ने टोरी-महुआमिलान नई वीजी रेलवे लाईन निर्माण में स्वीकृत भूमि अधिग्रहण की राशि में हेराफेरी करने का लगाया आरोप

2,018
  • सीजेएम की अदालत से जिला भू-अर्जन पदाधिकारी समते पांच सरकारी कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश पारित हुआ था

Latehar:  मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मो तौफीक अहमद की अदालत के आदेश पर तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी जयप्रकाश झा समेत कुल पांच रेवेन्यू कर्मियों पर धोखा-धड़ी एवं फर्जी दस्तावेज तैयार कर भू-अर्जन की स्वीकृत राशि घोटाला करने के आरोप में लातेहार सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है.

लातेहार थाना कांड संख्या 102र/2019 दिनांक 25.05.2019 भादवि की  धारा 467,468,471,420,34  के तहत श्री झा के अलावे अचंल अधिकारी चंदवा मुमताज अंसारी, लिपिक भू-अर्जन कार्यालय लातेहार महेंद्र कुमार, अंचल अमीन चंदवा अजय विश्वकर्मा एवं राजस्व कर्मचारी भूसाड़ (चंदवा) चार्लिस मिंज को आरोपी बनाया गया है.

मालूम हो कि वर्तमान अनुमंडल पदाधिकारी श्री झा घटना की तिथि नौ सितंबर 2018 को जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के प्रभार में थे.

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ये है पूरा मामला

दर्ज प्राथमिकी के अनुसार चंदवा थाना क्षेत्र के भुसाड़ ग्राम निवासी जंगाली साव उर्फ जंगाली भगत ने गत 29 मार्च 2019 को अदालत में परिवाद पत्र दायर कराया था. श्री भगत ने परिवाद में बताया था कि उन्होंने 09 सितंबर 2018 को तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जय प्रकाश झा से इस गड़बड़ी की शिकायत की थी.

शिकायत में कहा था कि टोरी-महुआमिलान नई वीजी रेलवे लाईन निर्माण में अधिग्रहण की गयी खाता दो की कुल 1.75 एकड़ भूमि का जाली दस्तावेजों के सहारे मुआवजा का पंचाट पंचू गंझू व गोविंद गंझू के नाम तैयार कर दिया गया है. लेकिन श्री झा ने उसे चुप रहने की बात कही थी. प्राथमिकी के अनुसार शिकायतकर्ता को जब श्री झा की बातो पर कुछ संदेह हुआ तो वे चंदवा अंचल कार्यालय गये और अंचलाधिकारी मुमताज अंसारी, लिपिक महेंद्र कुमार, अमीन अजय विश्वकर्मा एवं कर्मचारी चार्लिस मिंज से मिले.

इन लोगों ने भी उनको बहला दिया. पुनः 11 सितंबर 2018 को परिवादी जिला भू- अर्जन कार्यालय लातेहार आये तो पता चला कि श्री झा प्रभार मुक्त हो गये हैं और नये अधिकारी आ गये है.

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दस्तावेजों से की गयी छेड़छाड़

श्री झा के तबादले के बाद जंगाली भगत ने आगे अपनी बात रखी. उन्हें 4 जनवरी को आपत्ति जताने की नोटिस मिली. उन्होंने अपनी अधिग्रहित भूमि के दस्तावेजो को पेश किया. इसके बाद पता चला कि तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी श्री झा एवं अन्य रेवेन्यू अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से पंचू गंझू एवं गोविंद गंझू के नाम पंचाट तैयार करा लिया गया है.

ये भी पता चला कि उनके दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गयी है. प्राथमिकी में यह बताया गया है कि सूचक श्री भगत ने इस मामले को उपायुक्त के जनता दरबार एवं पुलिस अधीक्षक के स्वागत कक्ष में भी पेश किया था, लेकिन उन्हे न्याय नहीं मिला.

इसके बाद उन्होंने अदालत में परिवाद दायर किया. मालूम हो कि सूचक एक दिव्यांग व वृद्ध व्यक्ति है तथा महीनों से अपनी रैयती भूमि की अधिग्रहण से प्राप्त होने वाली मुआवजा राशि हेतु सरकारी कार्यालयों का चक्कर लगा रहे थे.

सरकारी बैंक से निकाल कर निजी बैंक में जमा कर दी मुआवजे की राशि

प्राथमिकी के अनुसार टोरी-महुआमिलान की स्वीकृत 20 करोड़ रूपये को तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी श्री झा ने बदनियती से सरकारीकृत बैंक से हटाकर एक निजी बैंक मे रखा था. यह सरकार के आदेश का उल्लंघन है. और इससे अनियमितता की बू आती है.

सरकारी बैंक से निजी बैंक में सरकारी राशि रखने का मामला अक्टूबर-नवबंर 2018 में काफी चर्चा में आया था और विधानसभा की शीतकालीन सत्र में स्थानीय विधायक प्रकाश राम ने इस मामले को उठाया था.

श्री राम ने घोटाले की बुनियाद पर सरकारी बैंक से हटाकर निजी बैंक में राशि हस्तांतरित करने पर शीतकालीन सत्र में आपत्ति दर्ज करायी थी.

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