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लातेहार : चार पदाधिकारियों ने की थी आवास घोटाले की जांच, पुष्टि के बाद भी मामला रफा दफा

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Latehar : लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला पंचायत के चर्चित तीन पीएम आवास घोटाले मामले की जांच चार-चार पदाधिकारियों द्वारा किये जाने व जांच में मुखिया व बिचौलिया के अलावा तीन लोगों की संलिप्तता साबित होने के बावजूद जिला प्रशासन कुंभकर्णी निद्रा में लीन है. बता दें कि योजना के वास्तविक लाभुक सह शिकायतकर्ता शनिचर भुइयां, मुख्तार अंसारी व मंजूर आलम की शिकायत पर गत 18 एवं 19 दिसंबर, 2017 को डीआरडीए के परियोजना पदाधिकारी उपेंद्र राम और पीएम आवास योजना के नोडल पदाधिकारी गोविंद रत्नाकर ने आवास गबन मामले की जांच की थी. पुन: इसी मामले की जांच फरवरी, 2018 को जिला परिवहन पदाधिकारी एफ. बारला ने की, जिसमें उन्होंने मुखिया को दोषी पाया था. इसके बाद 24 फरवरी, 18 को डीडीसी के निर्देश पर बरवाडीह के सहायक नाजिर महेंद्र कुमार विधिकर द्वारा बिचौलिया सह पारा शिक्षक अब्दुल हलीम, पंचायत स्वयंसेवक शोएब अख्तर व कंप्यूटर ऑपरेटर सुदेश्वर राम पर ही प्राथमिकी दर्ज की गयी. मुखिया संजय सिंह को बरी कर दिया गया. अंतत: मार्च-अप्रैल माह में बरवाडीह डीएसपी अमरनाथ ने लाभुकों के बयान के आधार पर अपने सुपरविजन रिपोर्ट में मुखिया संजय सिंह व बिचौलिया समेत चार लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया है, लेकिन अब तक मुखिया पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. बरवाडीह थाना में दर्ज प्राथमिकी फाइलों तक ही सिमटकर रह गयी है. इसे पूरे प्रकरण से जाहिर होता है कि लातेहार जिला में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं.

जांच करते अधिकारीडीएसपी के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं अनुसंधानकर्ता

बरवाडीह डीएसपी अमरनाथ ने भी पीएम आवास घोटाला मामले की जांच की है. उन्होंने 8 मार्च से 22 अप्रैल, 18 तक किए गये अपने सुपरविजन रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि अनुसंधानकर्ता अविलंब नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार करें या फरार रहने की स्थिति में कुर्की जब्ती की कार्रवाई करें.  उन्होंने आदेश का अनुपालन कराने की जिम्मेवारी पुलिस इंस्पेक्टर को दी है, लेकिन उनके आदेश का अनुपालन न तो इंस्पेक्टर कर रहे हैं और न ही अनुसंधानकर्ता. प्राथमिकी दर्ज हुए दो माह बीत गए, लेकिन अब तक पुलिस इस मामले में उदासीनता बरत रही है. ऐसे में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है.

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आरोपी मुखिया का वित्तीय अधिकार नहीं हुआ जब्त

पीएम आवास घोटाले के आरोपी मुखिया संजय सिंह पर जिला प्रशासन मेहरबान दिख रहा है. मुखिया पर प्राथमिकी दर्ज हुए दो माह गुजर गए, लेकिन मुखिया का वित्तीय अधिकार जब्त नहीं होना पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है. प्रावधान के मुताबिक पीएम आवास योजना में हुई गड़बड़ी में मुखिया यदि दोषी पाया जाता है तो उसपर अविलंब एफआईआर दर्ज करते हुए उसकी वित्तीय शक्ति जब्त करनी है, लेकिन लातेहार जिला में इसका अनुपालन नहीं हो रहा है. सूत्रों की माने तो इस मामले को ठंडे बस्ते में डालने के एवज में मोटी रकम की उगाही भी हुई है. मामले की लीपापोती करने में जिले के एक वरीय अधिकारी के अलावे एक जनप्रतिनिधि भी लगे हैं. नतीजतन, आरोपियों को गिरफ्तार करने में जिला पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं. गौरतलब हो कि पिछले दिनों लातेहार से सटे पलामू जिला में हुए पीएम आवास घोटाला में शामिल मुखिया पर जिला प्रशासन ने अविलंब प्राथमिकी दर्ज कराते हुए उसका वित्तीय अधिकार जब्त किया था.

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