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लातेहारः ग्रामप्रधान ने ईसाई धर्म के आदिवासी परिवारों का हुक्का-पानी बंद किया, राशन लेने पर रोक, पानी पर भी लगायी पाबंदी

गांव में तनाव का माहौल, पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध

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Manoj Dutt Dev

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Latehar:  लातेहार जिला के चंदवा प्रखंड अंतर्गत वनहर्दी पंचायत के तेतरटोला में मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है. तेतरटोला ग्राम के ग्रामप्रधान ने  ग्रामीण आदिवासियों का हुक्का-पानी बंद कर रखा है. इस बात की जानकारी जब न्यूज़ विंग संवाददाता हुई तो उन्होंने इसकी पड़ताल की.

इसके लिए वे तेतरटोला पहुंचे. ग्रामप्रधान के समर्थकों को जब इसकी खबर मिली तो वे गोलबंद होने लगे. उन्होंने एक स्वर में कहा कि वे सरना आदिवासी से ईसाई बने आदिवासियों को ग्रामसभा की किसी सुविधा का लाभ नहीं लेने देंगे.

साथ ही ईसाई बने आदिवासियों को सरना धर्म अपनाने के लिए दबाव डालेंगे. ये विरोध इतना तीखा हो गया कि संवाददाता को वहां से किसी तरह अपना बचाव कर निकलना पड़ा.

लेकिन इस दौरान न्यूज विंग संवाददाता के हाथ कुछ ऐसे कागजात लगे जिनसे पता चलता है कि ग्रामसभा ने ईसाई बने आदिवासियों को हुक्का-पानी बंद कर रखा है.

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क्या लिखा है न्यूज विंग को मिले कागजात में

छह पन्ने के इस दस्तावेज में लिखा गया है कि 10.04.2019 को ग्रामसभा की बैठक हुई. इसमें वनहर्दी में धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासियों के बारे में विमर्श हुआ. ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों में मोतीलाल उऱांव पिता- जामे उरांव, लुका उरांव पिता- मंगलू उरांव, बनारसी उरांव पिता जले उरांव, माड़वारी उरांव पिता जिरवा उरांव और राजेश लोहरा पिता लक्ष्मण लोहरा के बारे में बैठक में चर्चा की गयी.

इस बैठक की अध्यक्षता ग्रामप्रधान रामकेवल उरांव ने की. इस दस्तावेज पर ग्रामप्रधान सहित 138 ग्रामीणों के हस्ताक्षर लिये गये. बैठक में ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों को भी बुलाया गया.

इन परिवारों के सदस्य ने कहा कि करीब आठ साल पहले उन लोगों ने धर्म परिवर्तन किया था.  वे सभी ग्रामसभा की ओर से दिये जाने वाले दंड को भुगतने के लिए तैयार हैं. लेकिन फिर से सरना धर्म को नहीं अपनायेंगे. इसके लिए उनको बाध्य नहीं किया जा सकता.

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ग्रामसभा ने ईसाई परिवारों को ये सजाएं दी

ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों का यह रवैया देखकर उनको दंड देने का फैसला सुनाया गया. पहला इन परिवारों की जमीन को उनके गोतिया भाइयों में बांट दिया जायेगा. दूसरा, ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों को गांव के किसी भी विवाह समारोह, मृत्यु आदि में शामिल नहीं होने दिया जायेगा. न ही उनको निमंत्रण दिया जायेगा. तीसरा, गांव का कोई व्यक्ति अगर इन ईसाई परिवारों के समारोह में शामिल होता है तो एक हजार रुपया दंड देना होगा.

चौथे प्रस्ताव के अनुसार इन ईसाई परिवारों का राशन कार्ड निरस्त करने और स्वयं सहायता समूहों से इनकी सदस्यता को रद्द करने का निर्णय लिया गया.

न्यूज विंग को हाथ लगे कागजात.

फैसले के बाद गांव में तनाव का माहौल

बहरहाल ग्रामसभा के इन फैसलों से गांव में तनाव का माहौल है. राशन दुकानदार इन परिवारों को राशन नहीं दे रहे हैं. सरकारी चापाकलों पर सरना धर्म का झंडा लगाकर ईसाई परिवारों को इनसे पानी लेने से मना किया जा रहा है. इन परिवारों को अपनी ही जमीन पर खेती करने से रोका जा रहा है. उन्हें सार्वजनिक रास्तों से गुजरने नहीं दिया जा रहा है. और अपना रास्ता बनाने के लिए कहा जा रहा है. पुलिस व प्रशासन से इन परिवारों को कोई मदद नहीं मिल रही है. पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है.

ईसाई धर्म अपनाने पर क्यों बाध्य हुए ग्रामीण

ईसाई धर्म अपनाने वाले मोतीलाल उरांव, लुका उरांव, बनारसी उरांव और राजेश उरांव से न्यूज विंग संवाददाता ने बात की. उन्होंने बताया कि वे अक्सर किसी न किसी बहाने भूत-प्रेत आदि के चक्कर में पड़े रहते थे.

इसमें बहुत खर्च होता था. इसका विरोध करने का साहस नहीं हो रहा था. बताया की मामले को लेकर वे लोग  पुलिस के पास भी अब नहीं जाना चाहते. क्योंकि पुलिस ने चंदवा थाना में जबरन उनका धर्म परिवर्तन कर उनपर सरना धर्म मानने के लिए दबाव डाला.

न्यूज विंग को हाथ लगे कागजात.

ग्रामप्रधान, मुखिया पति और राशन दुकानदार की भूमिका संदिग्ध

मामले में देखा जाये तो तो ग्रामप्रधान रामकेवल उरांव, मुखिया पति चंद्रदेव उरांव और राशन दुकानदार की भूमिका संदिग्ध है. ग्रामप्रधा और मुखिया पति पर लोगों का उकसाने का आरोप ईसाई परिवारों ने लगाया है.

साथ ही उन्होंने कहा है कि सरकारी राशन दुकानदार ने उनको राशन देना बंद कर दिया है. जिससे उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है.

24 घंटे में किया जायेगा समस्या का समाधानः उपायुक्त, लातेहार

इस मामले में लातेहार जिला उपायुक्त ने कहा कि 24 घंटे में मामले को हल कर लिया जायेगा. अगर ऐसा हुआ है तो ये दुखद है. ग्रामसभा से ऊपर स्थानीय प्रशासन का अमला है. ग्रामसभा के निर्णय की वे पड़ताल करेंगे और हर हाल में दोषियों को दंडित करेंगे.

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