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लातेहारः नक्सली-प्रशासन के बीच पिस रहे ग्रामीण, 2012 में नक्सलियों ने उड़ाया स्वास्थ्य केंद्र, अब तक नहीं हुआ पुनर्निर्माण

इलाज के लिए जाना पड़ता है 15 किमी दूर

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Manoj Dutt Dev
Latehar: नक्सलियों और सरकार के बीच लड़ाई तो कई सालों से जारी है. लेकिन इन सबके बीच अगर किसी को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है तो वो हैं ग्रामीण. लातेहार के हेरहंज प्रखंड में भी कुछ ऐसा ही हो रहा है. जहां नक्सलियों की करतूत का दंश ग्रामीण भुगत रहे हैं. दरअसल 2013 में सेरेंदाग गांव में बने उप स्वास्थ्य केन्द्र को माओवादियों ने पुलिस कैम्प होने का आरोप लगा कर उड़ा दिया था. वही पांच सालों बाद भी इस स्वास्थ्य केंद्र को दोबारा से शुरु करने की जहमत सरकार ने नहीं उठायी.

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2013 में नक्सलियों ने उड़ाया भवन

लातेहार जिला के हेरहंज प्रखंड सह थाना क्षेत्र से 15 किमी की दूरी पर स्थित हेरहंज थाना क्षेत्र अन्तर्गत सेरेंदाग ग्राम में 2012 में ग्रामीणों को गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से उप स्वस्थ केन्द्र का निर्माण किया गया था. इसी दोरान सेरेंदाग ग्राम सहित आसपास के इलाको में नक्सली संगठन भाकपा माओवादी की गतिविधि बढ़ने लगी थी. नक्सल गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने इस इलाके में कदम उठाये, ऑपरेशन के दौरान कभी-कभी उप स्वस्थ केन्द्र में सुरक्षा बल ठहरा भी करते थे. लेकिन यह नक्सलियो को रास नहीं आया. और 22 फरवरी 2013 को नक्सलियों ने उप स्वास्थ्य केन्द्र को विस्फोट कर उड़ा डाला.

नक्सलियो की इस करतूत का खामियाजा आजतक सेरेंदाग के पांच हज़ार से अधिक ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है. विस्फोट की घटना के बाद से स्वास्थ्य कर्मियों ने सेरेंदाग गांव जाना छोड़ दिया. हालात यह है कि ग्रामीणों को आज स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 15 से 40 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है. वही पिछड़ा इलाका होने के कारण रोड की हालत भी जर्जर है. ऐसे में अगर कोई ग्रामीण की रात को बिगड़ जाती है तो इलाज के अभाव में इसकी मौत भी हो जाती है.

नर्स नहीं आती गांव : सहिया

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ग्राम पंचायत कि स्वास्थ सहिया राबिता देवी ने बताया कि ग्राम पंचायत के लिए दो नर्स है गुंजन भारती एवं अरुणा टोप्पो. लेकिन दोनों ग्राम में ना रहकर हेरहंज प्रखंड मुख्यालय में रहती है, और दोनों नर्स केवल टीकाकरण के लिए आती है. गर्भवती महिला को अधिक परेशानी होती है. प्रसव के लिए गर्भवती को 19 किमी उस हालात में लेकर हेरहंज जाना पड़ता है.

जिला प्रशासन से नाराज ग्रामीण

नक्सलियों की करतूत के साथ-साथ जिला प्रशासन से भी नाराज है. घटना के पांच साल बाद भी गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं खुलने से लोगों में नाराजगी है. हालांकि, इसी साल मार्च में स्वास्थ्य केंद्र बनाने का काम शुरु तो हुआ है. लेकिन निर्माण की रफ्तार बहुत धीमी है. ग्रामीणों का ये भी आरोप है कि निर्माण में घटिया सामान का इस्तेमाल किया जा रहा है.

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