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लातेहार मॉब लिंचिंग: पीड़ित परिवार को न मुआवजा, न नौकरी और आयोग ने लिख दिया संतुष्ट है परिवार

मानवाधिकार आयोग को लातेहार मॉब लिंचिंग मामले में लिखा गया था पत्र

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Chhaya

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Ranchi: लातेहार चंदवा में मॉब लिंचिंग के शिकार पीड़ित परिवारों को राज्य सरकार ने न तो मुआवजा दिया और न कोई अन्य सरकारी सुविधा. भले ही सत्र न्यायालय ने आरोपियों को सजा सुना दी हो. लेकिन इसके बावजूद सरकार के वायदे खोखले साबित हुए. इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को एक पत्र लिखा गया था. जिसमें यह बात कहीं गयी थी कि झारखंड सरकार ने मॉब लिंचिंग पीड़ित परिजनों को उचित मुआवजा नहीं दिया और न ही सरकार की ओर से कोई सुविधाएं दी गयी.

आयोग को पत्र मिलने के बाद आयोग ने गृह, कारा विभाग झारखंड सरकार को 4.7.2018 को पत्र लिखा. जिसमें निर्देश दिया गया था कि पत्र प्राप्ति के चार सप्ताह बाद पीड़ित परिजनों से मुआवजा समेत सरकारी सुविधाओं की जानकारी लें आयोग को रिपोर्ट दें. आयोग से पत्र मिलने के बाद भी विभाग ने पीड़ित परिजनों से किसी तरह का संपर्क नहीं किया गया. चंदवा में 18.3.2016 को मॉब लिंचिंग कर नाबालिग इम्तियाज खान और मजलूम अंसारी की हत्या कर दी गयी थी.

आयोग ने बताया पीड़ित परिवार है संतुष्ट

आवेदनकर्ता माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात को इस संबंध में आयोग से 27.11.2018 को पत्र मिला. जिसमें ये बताया गया कि चार सप्ताह के भीतर पीड़ित परिवार ने विभाग को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी, जिससे यह साफ है कि पीड़ित परिवार संतुष्ट है. करात ने जानकारी दी कि आयोग ने जवाबी पत्र में लिखा है कि सरकार की ओर से काफी सुविधाएं पीड़ित परिवार को दी गयी हैं.

इसके साथ ही आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि शायद पीड़ित परिवार उस जगह से प्रवास कर चुके हैं. करात ने बताया कि आयोग से प्राप्त पत्र में यह कहा गया है कि राज्य सरकार ने पीड़ित परिवारों को सभी सुविधाएं दी है. जिसमें शौचालय, राशन कार्ड, पेंशन, बच्चों को आंगनबाड़ी में दाखिल करना आदि है. उन्होंने कहा कि दुखद है कि राज्य सरकार ऐसे मामलों को भी सार्वजनिक सुविधाओं से जोड़ती है.

नहीं मिला कोई पत्र, न ही कोई टीम आयी

इस संबध में न्यूज विंग ने जब स्वर्गीय इम्तियाज खान की माता नाजमा बीबी से बात की तो उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बस जो एक लाख देने की बात कहीं गयी थी. लेकिन इसे हमलोगों ने नहीं लिया. जब उनसे पूछा गया कि साल 2018 जुलाई में कोई सरकारी पत्र या सरकारी अधिकारी उनसे मुआवजा समेत अन्य जानकारी मांगी गयी थी. तो उन्होंने बताया कि पिछले साल कोई भी पत्र या कोई भी सरकारी अधिकार मिलने नहीं आये. सरकार के दिये एक लाख तो हमने लिया भी नहीं, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने कोई पहल नहीं की.

न शौचालय, न पेंशन

इम्तियाज की माता नजामा बीबी ने कहा कि सरकार ने घर बनाने का वायदा किया था, लेकिन दो साल हो गये, अब तक कोई पहल नहीं की गयी है. मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की बात तो कोई करता नहीं. जब उनसे पूछा गया कि क्या शौचालय उनके आवास पर बनाया गया है, तब उन्होंने कहा कि जब भी आना हो आकर देख सकते हैं.

घर में सरकारी शौचालय का निमार्ण नहीं किया गया है. वहीं राशन कार्ड की बात पर उन्होंने कहा कि इम्तियाज की हत्या के पहले से ही परिवार के पास राशन कार्ड था. वहीं स्व. मजलूम अंसारी के परिजनों ने जानकारी दी कि मजलूम की पत्नी को सरकार ने विधवा पेंशन देने की बात कहीं थी, लेकिन वो भी अब तक नहीं मिला.

फिर सूखेंगे झारखंडवासियों के कंठ ! 

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