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लातेहार: बालूमाथ में कोयला तस्करी में शामिल माफिया और पुलिसकर्मियों की शामत, DGP ने दिया CID जांच का आदेश

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Saurav Singh

Ranchi : लातेहार के बालूमाथ में कोयला तस्करी में पुलिस अफसरों की मिलीभगत का बड़ा मामला सामने आया है. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी एमवी राव ने सीआईडी को पूरे मामले की जांच करने का आदेश दिया है. जांच का आदेश मिलने के बाद सीआईडी बहुत जल्द ही अवैध कोयला तस्करी के इस मामले को टेकओवर कर पूरे मामले की जांच शुरू कर देगी.

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पुलिस अफसरों की मिलीभगत से हो रहा था अवैध कारोबार

लातेहार एसपी प्रशांत आनंद ने बालूमाथ में की जा रही कोयला तस्करी को लेकर डीजीपी एमवी राव को रिपोर्ट भेजी थी. रिपोर्ट के आधार पर ही बालूमाथ के डीएसपी रणवीर सिंह को पद से हटाते लातेहार मुख्यालय क्लोज कर दिया गया था. साथ ही डीएसपी को जिला से हटाने की भी अनुशंसा कर दी गयी थी. इस मामले में बालूमाथ के इंस्पेक्टर राजेश मंडल को भी लाइन हाजिर कर दिया गया था.

वहीं इंस्पेक्टर को निलंबित करने की सिफारिश पलामू के प्रभारी डीआईजी अखिलेश झा से की गयी थी. वहीं डीएसपी के क्राइम रीडर को एसपी प्रशांत आनंद ने लाइन हाजिर कर दिया था. इस मामले में पुलिस कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को जेल भेज चुकी है.

क्या है मामला

जानकारी के मुताबिक, बालूमाथ से लगातार कोयला तस्करी की शिकायतें मिल रही थीं. एसपी ने छापेमारी कर कोयला लदे ट्रकों को जब्त किया था. छापेमारी के बाद जब कोयला बरामद हुआ, तब जांच में यह बात सामने आयी कि कोयला तस्कर प्रति ट्रक डीएसपी और इंस्पेक्टर को पैसे देते हैं.

लाखों रुपये का भुगतान कोयला तस्करों के द्वारा किया जा चुका है. मामला सामने आने के बाद एसपी प्रशांत आनंद ने डीएसपी के क्राइम रीडर को पूछताछ के लिए बुलाया. पूछताछ में डीएसपी के रीडर ने कोयला तस्करों से मिलीभगत की बात स्वीकार की.

रीडर के मोबाइल फोन में कोयला तस्करों से बातचीत की रिकार्डिंग भी थी. ऐसे में एसपी ने रीडर के मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया. वहीं जांच में डीएसपी और इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर कई तथ्य भी सामने आये. इसके बाद एसपी ने सबूतों के साथ पूरी रिपोर्ट डीजीपी को भेज दी थी.

लंबे समय से हो रहा था अवैध कोयले का कारोबार

लातेहार में पांच रेलवे साइडिंग (बालूमाथ, टोरी, फुलबसिया, बुकरु और कुसमाही बीराटोली) हैं. जहां से रैक के जरिये कोयला दूसरे राज्यों में भेजा जाता है. जानकारी के मुताबिक, कोयला ट्रांसपोर्टिंग का अधिकांश काम तीन बड़े ट्रांसपोर्टरों के जिम्मे है. चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र स्थित मगध और आम्रपाली कोल परियोजना से इन पांचों रेलवे साइडिंग में कोयला भेजा जाता है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इसी दौरान सीसीएल कर्मी और कोयला कारोबारी की मिलीभगत से ट्रक और डंपर में चालान से अधिक कोयला लोड कर दिया जाता है. फिर उसे लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र के बरियातू इलाके के आरा, चमातू व अमरवाडीह में उतारकर जमा किया जाता है. यह काम हर दिन होता था.

रात के अंधेरे में जमा किये गये कोयले को ट्रकों के जरिये फिर ट्रक पर लोड कर ईंट-भट्ठों, बिहार और यूपी की मंडियों तक पहुंचाने का काम पिछले कई सालों से चल रहा है. स्थानीय कोयला माफिया के द्वारा 40- 50 हजार रुपया प्रति ट्रक कोयला बेचा जाता था. इसके बाद यही कोयला कारोबारी के द्वारा यूपी के वाराणसी और बिहार की मंडी में 5500 से 6000 प्रति टन के रेट से बेचते हैं.

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