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अवैध उगाही का अड्डा बना लातेहार जेल ! हर कदम पर होती है वसूली

दस्तावेज हो या सामान हर चीज पर होती है वसूली

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Manoj Dutt Dev
Latehar: लातेहार सिविल कोर्ट यूं तो हर सम्भव प्रयास कर रहा है कि लातेहार जेल में बंद विचाराधीन बंदियों को सुलभ एवं निःशुल्क न्याय मिले. लेकिन इसकी आड़ में लातेहार मंडल कारा के कर्मचारी और अधिकारी मालामाल हो रहे हैं. जेल में कोर्ट से पहुंचने वाले हर दस्तावेजों में उगाई की जाती है. जैसा न्यायालय का कागजात वैसी ही वसूली होती है.

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दस्तावेजों पर वसूली 

नाम ना छापने की शर्त पर लातेहार सिविल कोर्ट के वकीलों के मुंशियों ने बताया कि लातेहार जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के परिजनों से वकीलों के मुंशी के माध्यम से सिविल कोर्ट के वकालतनामा पर 30 रुपया की वसूली, जबकि हाईकोर्ट के वकालतनामा पर 50 रुपया की वसूली, सुलह के कागजात पर 200 रुपये, एवं एफिडेविट के कागजात पर 80 रुपये की वसूली की जाती है. सूत्रों ने बताया कि इसके पीछे जेल के राईटर सह सजायाफ्ता बंदी अरविंद सिंह एवं मुकेश द्वारा की जाती है.

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कड़ी सुरक्षा के बीच होता गोरखधंधा

ज्ञात हो कि लातेहार जिला अति नक्सल प्रभवित जिला है. वही लातेहार मंडल कारा गिरफ्तार माओवादियों, विचाराधीन कैदियों का जमावाड़ा है. जिस कारण लातेहार मंडल कारा की सुरक्षा का जिम्मा गृह रक्षा वाहिनी के साथ-साथ जिला बल के जवानों के जिम्मे है. जेल में अंदर से लेकर बाहर तक हर कदम पर सुरक्षा के पुख्ते इन्तेजाम हैं. बावजूद इसके जेल में विचारधीन कैदियों तक हर संभव सामग्री पहंच रही है. अगर विचाराधीन बंदियों तक एक हज़ार पहुंचाना है तो दो हज़ार रुपया सुरक्षा में तैनात कर्मियों को देने पड़ते हैं. इसके अलावे परिजनों के जरिए आनेवाले सामानों पर भी वसूली होती है. जैसा सामान वैसी रकम.

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एक-एक रुपया का होता बंदरबांट

लातेहार मंडल कारा की आम मुख्य दीवार से बंदी दीवार तक बंदियों के परिजनों से वसूले गये रुपये का हिसाब का जिम्मा जेल के राईटर सह सजायात बंदी अरविंद सिंह एवं मुकेश के जिम्मे है. राईटर सह सजायाफ्ता कैदी अरविंद सिंह एवं मुकेश के द्वारा वसूली गयी राशि का बंदरबांट बहुत ही ईमानदारी से किया जाता है ताकि सुरक्षा में सेंध ना लगे.

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