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लातेहार: पुलिस फायरिंग में ग्रामीण की मौत पर जवानों के खिलाफ एफआइआर की मांग

न्यायिक कमीशन के गठन की भी मांग उठी

Ranchi: पिरी, लातेहार में 12 जून को सुरक्षा बलों द्वारा चलायी गयी गोली से 24 वर्षीय ब्रह्मदेव सिंह की मौत हो गयी थी. ग्रामीणों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने जानबूझकर गोली चलायी और इस कारण एक ग्रामीण की जान चली गयी. झारखंड जनाधिकार महासभा ने 17 जून को गांव का दौरा किया. इसके बाद बुधवार को मीडिया से कहा कि ब्रह्मदेव सिंह की हत्या की जांच के लिये न्यायिक कमीशन का गठन हो.

उसकी हत्या और ग्रामीणों पर गोली चलाने के लिए ज़िम्मेवार सुरक्षा बल के जवानों व पदाधिकारियों पर प्राथमिकी दर्ज की जाए.

महासभा सदस्य आलोका कुजूर, अयूब खान सहित अन्य लोगों ने लातेहार के डीसी अबू इमरान, पलामू DIG और लातेहार डीएसपी से भेंट कर उनसे इस विषय पर चर्चा भी की.

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आदिवासियों पर हिंसा जारी

लातेहार के घटना की जांच झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों, पत्रकार, वकील व सामाजिक कार्यकर्ताओं के दल द्वारा की गई. इसमें विभिन्न सामाजिक व मीडिया संगठन भी शामिल थे.

आदिवासी अधिकार मंच, आदिवासी विमेंस नेटवर्क, ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क, द ग्रामसभा. दल ने गांव का दौरा किया. ग्रामीणों व पीड़ितों से मुलाकात की. महासभा के मुताबिक भाजपा सरकार ने दमनकारी और जन विरोधी नीतियों को आगे बढ़ाया था.

आदिवासियों पर लगातार हमले होते रहे. इसी कारण राज्य में सीएम हेमंत सोरेन के नेतृत्व में महागठबंधन को स्पष्ट जनादेश मिला.

पर यह दुःख की बात है कि अभी भी मानवाधिकार उल्लंघन की घटनाएं एवं आदिवासियों पर प्रशासनिक हिंसा व पुलिसिया दमन थमा नहीं है. झारखंडी अपेक्षाओं पर बने इस राज्य सरकार को गंभीरता दिखाने की जरूरत है.

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मिले मुआवजा

महासभा ने सरकार से मांग की है कि ब्रम्हदेव की पत्नी को कम-से-कम 10 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाए. उनके बेटे की परवरिश, शिक्षा व रोज़गार की पूरी जिम्मेवारी सरकार ले. साथ ही घटना में घायल बाकी पांचों पीड़ितों को पुलिस द्वारा उत्पीड़न के लिए मुआवज़ा मिले.

अभी तक पीड़ितों व उनके परिवार के सदस्यों से पुलिस द्वारा लिए गए सभी बयान, एफिडेविट आदि को रद्द माना जाए. उनसे सादे पन्ने पर और बिना पढ़ कर सुनाए गए लिखित बयानों पर हस्ताक्षर, अंगूठे का निशान लगवाया गया है. पीड़ित का बयान उनके वकील की मौजूदगी में ही हो.

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