न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

लातेहार : गर्भवती महिला को नहीं मिला एंबुलेंस, बेहोशी की हालत में बाइक से लाया गया अस्पताल

1,563

Latehar : सूबे में विकास को लेकर तमाम तरह के दावे किये जाते हैं. लेकिन हकीकत लातेहार की ये रिपोर्ट बता रही है. लातेहार में मूलभूत सुविधा के अभाव में मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. यहां की हालत ऐसी है कि मरीजों को स्वास्थ्य संबंधित सुविधा भी नहीं मिल पा रही.

सरकारी लापरवाही के कारण आज भी यहां के लोगों को एंबुलेंस तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है. जिसकी वजह से लोगों को अस्पताल आने-जाने के लिए खुद से ही इंतजाम करना पड़ता है.

हम बात कर रहे हैं जिले के चंदवा क्षेत्र की. जहां एक बेहोश गर्भवती महिला को इलाज के लिए बाइक से 10 किलोमीटक की दूरी तय कर चंदवा लाया गया. महिला दर्द की तड़प से बेहोश हो गयी फिर भी उसे एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिली.

इसे भी पढ़ें- बिहार : गर्मी के बाद आकाशीय बिजली का कहर, 10 की मौत

क्या है मामला

कामता पंचायत के चटुआग गांव के रहने वाले कमल गंझु की पत्नी शांति देवी को तीन दिनों से बुखार था. जिसके बाद उसे ब्लीडिंग होने लगी. यह देख कमल ने 108 नंबर पर फोन कर एंबुलेंस की सुविधा मुहैया कराने की मांग की. लेकिन उसे एंबुलेंस की सुविधा नहीं दी गयी.

शांति दर्द से तड़प रही थी. और दर्द कुछ इस कदर बढ़ गया था कि वह आखिरकार बेहोश हो गयी. उसे लगातार ब्लीडिंग हो रही थी. कमल यह सब देख परेशान हो गया. जिसके बाद उसने माकपा नेता अयुब खान से मदद की गुहार लगायी.

अयुब खान ने सीएचसी प्रभारी निलीमा कुमारी को फोन कर एम्बुलेंस की सुविधा देने की बात कही. लेकिन फिर भी अस्पताल प्रभारी ने एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराया.

Related Posts

100 रुपये में #IAS बनाता है #UPSC, #Jharkhand में क्लर्क बनाने के लिए वसूले जा रहे एक हजार

झारखंड में बनना है क्लर्क तो आइएएस की परीक्षा से 10 गुणा ज्यादा देनी होगी परीक्षा फीस.

इसे भी पढ़ें- जी-20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जापान पहुंचे PM, लगे मोदी-मोदी के नारे

नहीं मिला एम्बुलेंस, बाइक से लाया गया अस्पताल

अंत में हर तरफ से निराशा हाथ लगने के बाद कमल अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए उसे बाइक पर किसी तरह बैठाया और चंदवा अस्पताल ले गया. चंदवा असपताल से शांति को लातेहार रेफर कर दिया गया.

शांति को लगातार ब्लीडिंग हो रही थी और उसके शरीर में खून की कमी भी हो गयी थी. गर्भवती महिला की स्थिति इतनी खराब थी कि वह अपने पैरों पर खड़ी भी नहीं हो पा रही थी. खून से लतपथ महिला घिसट-घिसट कर चलने को मजबूर थी. बावजूद इसके चंदवा से लातेहार ले जाने के लिए भी महिला को एंबुलेंस नहीं दी गयी.

चंदवा सीएचसी अस्पताल से महिला को फिर से बाइक से ही लातेहार ले जाया गया. चंदवा से लातेहार की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है. वहीं मौत और जींदगी के बीच जुझती हुई महिला के पास एंबुलेंस नहीं बाइक का ही सहारा था.

महिला को इलाज के लिए लातेहार सदर अस्पताल लाया गया. लेकिन यहां से भी महिला को रांची के रिम्स रेफर कर दिया गया. महिला को बार-बार एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर किये जाने की बात से ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि महिला की तबियत कितनी खराब थी.

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग पर यह सवाल भी उठता है कि जब महिला की हालत इतनी खराब थी तो फिर उसे एंबुलेंस जैसी मूलभूत सुविधा क्यों नहीं दी गयी…

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like

you're currently offline

%d bloggers like this: