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लातेहारः बिना आंगनबाड़ी निर्माण के ही निकाल लिये 3 लाख 57 हजार रुपये

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

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Latehar: लातेहार ज़िले के गारू प्रखंड में सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार का मामला लगातार बढ़ता ही जा रहा है. एक बार फ़िर प्रखंड कार्यालय के कर्मी कई सवालों के घेरे में खड़े दिखाई रहे हैं. गारू प्रखंड मुख्यालय के रुद पंचायत अंतर्गत नक्सलग्रस्त गांव जयगिर घनघोर जंगलों के बीच बसा हुआ है. यहां के ग्रामीणों को बड़ी मशक्कत के बाद एक-दो सरकारी योजना मिल पाती हैं. विडंबना यह है कि उन योजनाओं में भी बिचौलिया हकमारी करने से बाज नहीं आ रहे हैं.

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देखें वीडियो-

दरसअल जयगिर गांव में मनरेगा के तहत आंगनबाड़ी केंद्र दिया गया था. उसका निर्माण आज कई साल बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका. जिससे बच्चे इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं. न्यूजविंग के कैमरे में कैद तस्वीर में देखा जा सकता है कि जयगिर की रहनेवाली तारा कुमारी कई बीमारियों से ग्रस्त हैं, लेक़िन स्वास्थ्य केंद न होने के कारण आज भी उन बीमारियों का दंश झेल रही हैं. हालात ऐसे हैं कि अगर कोई महिला गर्भवती होती है, तो जच्चा-बच्चा की जिंदगी की नैया भगवान भरोसे ही पार-घाट लगती है.

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निर्माण कार्य अधूरा रह गया

हालांकि गांववालों की मानें तो इस केंद्र का निर्माण कार्य शुरू जरूर किया गया था, लेक़िन बिचौलियों निगाह पड़ी और निर्माण अधूरा पड़ा रहा गया. ग्रामीणों ने इन योजनाओं के अधूरे रह जाने के पीछे अफसरों की लापरवाही बताया. साथ ही बिचौलियों की भूमिका भी इसमें बहुत बड़ी है. रोजगार सेवक भी इसमें भूमिका निभाते हैं.

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क्या कहा मनरेगा ऑपरेटर ने

इस पूरे मामले पर रुद पंचायत के मनरेगा ऑपरेटर प्रवीण शुक्ला से पक्ष जाने के लिए न्यूज विंग संवाददाता उनके दफ्तर गये पर वो वहां मौजूद नहीं थे. उनसे फोन पर भी संपर्क करने की कोशिश की गयी, पर उन्होंने फोन नहीं उठाया. अंत में उन्हें व्हाट्सएप के माध्यम से मैसेज किया गया, इसका जो जवाब दिया- आप ख़बर नहीं पिक्चर भी चला लें, तो मेरा कुछ नहीं बिगड़नेवाला है.

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मामले की छानबीन की जायेः ग्रामीण

न्यूज़ विंग से बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि इस आंगनबाड़ी केंद्र की पूरी राशि बिचौलियों के द्वारा हड़प ली गयी है. मनरेगा के साइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक राशि बहुत पहले की निकाल ली गयी है, जिसका प्रमाण न्यूज विंग के पास मौजूद है. 3 लाख 57 हजार रुपये बिना निर्माण कार्य पूरा हुए ही निकाल लिये गये हैं.  उधर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगायी है कि मामले की छानबीन कर योजनाओ में बंदरबाट करनेवालों पर लगाम लगायी जाये.

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