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खराब बिजली व्यवस्था के लिए लचर ट्रांसमिशन लाइन भी जिम्मेदार

पीजीसीआईएल रांची, चतरा, पलामू समेत राज्य की आठ जगहों पर कर रही है ट्रांसमिशन लाइन का काम, अब तक कई जगहों का काम पूरा नहीं

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Ranchi : झारखंड में लचर ट्रांसमिशन लाइन के लिए पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (पीजीसीआईएल) भी जिम्मेदार है. अब भी झारखंड में 32 प्रतिशत ट्रांसमिशन लॉस होता है. जो राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी अधिक है. ट्रांसमिशन लॉस का राष्ट्रीय औसत 18 फीसदी है. ट्रांसमिशन लॉस की वजह से झारखंड के शहरी क्षेत्रों में बेहतर गुणवत्ता की बिजली नहीं मिल पा रही है. ग्रामीण इलाकों की स्थिति तो और दयनीय है. राज्य के प्रमुख शहरों जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, पलामू, चाईबासा में औसतन 18 घंटे ही बिजली की आपूर्ति हो पा रही है. वहीं, राजधानी में 20 से 21 घंटे बिजली रहती है. 24×7 बिजली देने का सरकारी वादा अब तक कम से कम राजधानी में शुरू नहीं हो पाया है.

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2014 में हुआ था पीजीसीआईएल के साथ करार

पीजीसीआईएल को बेहतर ट्रांसमिशन लाइन स्थापित करने के लिए सरकार ने 2014 में 1310 करोड़ का कार्यादेश दिया था. अब तक यह काम पूरा नहीं हो पाया है. योजना की लागत अब 1700 करोड़ रुपये से अधिक हो गयी है. कंपनी को रामचंद्रपुर, रांची, पतरातू, मानगो, लातेहार, चतरा, पलामू समेत अन्य जगहों पर ट्रांसमिशन लाइन बनाने का काम दिया गया था. इसमें से सिर्फ राजधानी के बेड़ो में ही ट्रांसमिशन ग्रिड बनकर तैयार हुआ है. बेड़ो के ट्रांसमिशन लाइन केंद्र का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. यहीं पर सारे राज्य की बिजली आती है, जिसे विभिन्न विद्युत उपकेंद्रों को बिजली भेजी जाती है. चतरा, रामचंद्रपुर, पतरातू, मानगो, लातेहार जिलों में भी ट्रांसमिशन लाइन का इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने को लेकर राज्य सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया है. ट्रांसमिशन लाइन के लिए तार खींचने और टावर लगाने का काम इससे प्रभावित हो रहा है.

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पीजीसीआईएल के अन्य काम भी चल रहे हैं धीमे

राजधानी के बेड़ो में ट्रांसमिशन लाइन तो तैयार हो गया है, लेकिन यहां पर अन्य सुविधाएं अब तक विकसित नहीं हो सकी हैं. इसमें अधिकारियों का आवास, कार्यालय, अधिकारियों के लिए क्लब हाउस तथा अन्य काम होना था. बेड़ो में डायमंड प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को 4.5 करोड़ रुपये की लागत से अधिकारियों का क्वार्टर बनाने का काम 20.8.2014 को दिया गया था. यह काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है. मुजफ्फरपुर की आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी को भी अधिकारियों के क्लब हाउस, कैफेटेरिया, मुख्य कार्यालय बनाने का जिम्मा 9.3.2016 को दिया गया था. 10 महीने का यह काम अब भी लंबित है. कमोबेश यही स्थिति दूसरी जगहों की भी है.

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