न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

मिनिमम बैलेंस न होने पर साढ़े तीन सालों में सरकारी बैंकों ने ग्राहकों से वसूले 10 हजार करोड़

2,201

New Delhi: सरकारी बैंकों में मिनिमम बैलेंस से कम की राशि रखने और तय सीमा से ज्यादा एटीएम ट्रांजैक्शन करने पर लगाये गये पेनाल्टी से 10 हजार करोड़ रुपये वसूले गये हैं. सरकारी बैंकों ने इतनी बड़ी राशि साढ़े तीन सालों में वसूली है. दरअसल, मंगलवार को सांसद दिब्येन्दू अधिकारी ने लोकसभा में इसे लेकर सवाल किया था. जिसका जवाब देते हुए वित्त मंत्रालय ने ये आंकड़े पेश किए हैं.

वित्त मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, बैंको को इस बात की इजाजत देता है कि वह अपनी सेवाओं के बदले में अपने ग्राहकों से कुछ चार्ज वसूल सकते हैं. ये चार्ज निर्धारित करने की जिम्मेदारी बैंकों के बोर्ड्स की हैं. संसद में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने बताया है कि साल 2012 तक मंथली एवरेज बैलेंस पर एसबीआई चार्ज वसूल कर रहा था, लेकिन 31 मार्च 2016 से यह बंद कर दिया गया. वहीं एसबीआई ने 1 अप्रैल 2017 से यह एक्सट्रा चार्ज वसूल करना शुरू कर दिया. बात निजी बैंकों सहित अन्य बैंकों की हो तो ये अपने बोर्ड के नियमों के अनुसार यह चार्ज वसूल कर रहे हैं.

आंकड़ों के अनुसार, पिछले साढ़े तीन साल के दौरान सरकारी बैंकों ने बचत खातों में मिनिमम बैलेंस से कम होने पर लगाए गए चार्ज से ग्राहकों से करीब 6246 करोड़ रुपए वसूले. वहीं एटीएम में फ्री ट्रांजैक्शन की तय सीमा के बाद लगाए जाने वाले चार्ज से करीब 4145 करोड़ रुपए वसूले गये. ऐसे में यह कुल आंकड़ा 10,391 करोड़ रुपए है. हालांकि, केन्द्र सरकार की पहल पर खोले गए जन-धन बचत खाते और बेसिक सेविग अकाउंट में मिनिमम बैलेंस के चार्ज नहीं लगाए जाते हैं.

सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने ये भी बताया कि आरबीआई ने बैंकों को उनके बोर्ड के मुताबिक विभिन्न सेवाओं पर चार्ज करने की अनुमति दी है. हालांकि, ये चार्ज उचित होने चाहिए इस बात के भी निर्देश हैं. रिजर्व बैंक ने यह भी निर्देश दिया है कि 6 मेट्रो शहरों मुंबई, नई दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद में एक महीने में अन्य बैंकों के एटीम से 3 ट्रांजैक्शन और बैंक के एटीएम से कम से कम 5 ट्रांजैक्शन फ्री रखा जाए.

इसे भी पढ़ेंःसंदर्भ: आईपीएस रजनीश राय का इस्तीफा, नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

%d bloggers like this: