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लंगटा बाबा स्टील (TUFCON) ने तय समय पर नहीं दिया वन विभाग का NOC, मांगा एक माह का वक्त

Pravin Kumar

Ranchi: गिरिडीह की प्रतिष्ठित छड़ बनानेवाली कंपनी लंगटा बाबा स्टील समेत तीन कंपनियों ने तय समय पर वन विभाग का NOC लेटर सीओ (अंचलाधिकारी) को नहीं उपलब्ध कराया है. कंपनियों ने सीओ से एक माह का वक्त मांगा है. जबकि सीओ कार्यालय ने कंपनियों को चार अगस्त का वक्त देते हुए कागजात जमा करने का निर्देश दिया है.

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कंपनियों का दावा- वन विभाग का एनओसी उनके पास है

लंगटा बाबा स्टील कंपनी TUFCON नामक ब्रांड नेम से छड़ बनाने का काम करती है. कंपनी पर आरोप है कि उसने हरसिंगरायडीह के खाता नंबर 12 के प्लॉट नंबर 1023 की जंगल किस्म की जमीन पर कंपनी स्थापित कर लिया है. जबकि लंगटा बाबा स्टील समेत अन्य तीनों कंपनियों का कहना है कि जमीन वन विभाग की नहीं है. उन्होंने रैयत से जमीन ली है. कंपनियों का यह भी दावा है कि इससे संबंधित वन विभाग का एनओसी भी उनके पास है.

एक सप्ताह में दस्तावेज नहीं दिखाये, तो होगी कार्रवाई

पिछले दिनों गिरिडीह सदर अंचल के सीओ रवींद्र सिन्हा ने तीनों कंपनियों को नोटिस दिया था. जिसमें 23 जुलाई को कागजात उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था. सीओ ने न्यूज विंग को बताया कि लंगटा बाबा स्टील समेत तीनों कंपनियों के प्रतिनिधि 22 जुलाई को उनसे मिलने आये थे. उन्होंने जमीन का कोई दस्तावेज नहीं दिखाया. और दस्तावेज दिखाने के लिए एक माह का वक्त मांगा. लेकिन उन्हें एक सप्ताह का वक्त दिया गया है. 4 अगस्त तक उन्हें कागजात दिखाने हैं. अगर कंपनियों के द्वारा इस दौरान दस्तावेज नहीं दिखाये जाते हैं तो खाता नंबर 12 के प्लॉट नंबर 1023 की जमाबंदी को अवैध माना जायेगा. साथ ही लंगटा बाबा समेत तीनों कंपनियों के खिलाफ अतिक्रमण का केस दर्ज कर कार्रवाई की जायेगी.

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कोई एनओसी निर्गत नहीं हुआः वन विभाग

सीओ श्री सिन्हा ने यह भी बताया है कि वन प्रमंडल ने पहले ही लंगटा बाबा स्टील समेत तीनों को एनओसी देने की बात से इंकार किया है. यही नहीं वन प्रमंडल के पदाधिकारी उनसे भी संपर्क कर बता चुके हैं कि गिरिडीह वन प्रमंडल तो दूर राज्य वन एंव पर्यावरण मंत्रालय के पास भी साल 2000 के बाद हरसिंगरायडीह के खाता नंबर 12 के प्लॉट नंबर 1023 में वाणिज्य कार्य करने के लिए कोई एनओसी निर्गत नहीं किया गया.

उल्लेखनीय है कि हरसिंगरायडीह के वार्ड पार्षद पप्पू रजक ने लंगटा बाबा स्टील, आरएन सिंह और महादेव साव पर जंगल किस्म का प्लॉट को कब्जा कर लौह उद्योग चलाने का आरोप लगाया था. उन्होंने डीसी, एसडीएम और सीओ से जांच की मांग की थी. पार्षद के आरोप के बाद एसडीएम और सीओ ने जांच शुरू की.

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