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धनबाद में भू धसान और कोयला तस्करी: दोषी कौन? पुलिस-प्रशासन, BCCL-ECLया फिर दोनों…

Manoj Mishra

Dhanbad: गुरुवार की सुबह वेस्ट मोदीडीह में संचालित बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच के पास बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध कोयला उत्खनन के दौरान मलबा गिर जाने से पांडेडीह छह नंबर बस्ती निवासी करीब 64 वर्षीय वृद्ध महिला यशोदा देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गई. खनन कार्य में लगे अन्य लोगों ने उसे मलबा से निकालकर कतरास के एक नर्सिंग होम तक पहुंचाया. स्थिति नाजुक देख चिकित्सकों ने उसे धनबाद रेफर कर दिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अन्य दिनों की भांति वहां काफी संख्या में महिला-पुरुष खनन में लगे हुए थे. इस बीच एक स्थल पर पत्थरयुक्त मलबा भरभरा कर नीचे आ गया और वह दब गई जबकि कई लोग बाल-बाल बचे. बताया जाता है कि इस आउटसोर्सिंग पैच के पास सैकड़ों लोग अवैध उत्खनन करते हैं. वहां से करीब 200 गज की दूरी पर कोयला जमा करते हैं. वहां से मोटर साइकिल, टेंपो से गंतव्य को ले जाते हैं. समय-समय पर पुलिस व सीआइएसएफ ने छापेमारी कर कोयला जब्त किया है.

मालूम हो कि 4 अप्रैल को भी वेस्ट मोदीडीह के इसी बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में अवैध उत्खनन के दौरान मलबा गिर जाने से एक महिला जख्मी हो गई थी. सहयोगी उसे उठाकर ले भागे थे. वहीं 11 मार्च 2022 को भी इस वेस्ट मोदीडीह कोलियरी के बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में मलबा में दबने से पांडेडीह छह नंबर की महिला 35 वर्षीय चिंता देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी.

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यह जगजाहिर है कि झारखंड के खदान क्षेत्रों में अवैध खनन होता है, इस बात से प्रशासन भी वाकिफ है और कोल कंपनियां भी. गरीबी और भूख के मारे लोग जान हथेली पर लेकर अवैध खनन के लिए अकसर बंद पड़े खदानों में जाते हैं और कई बार दुर्घटना की वजह से जान से हाथ धो बैठते हैं.

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कोल कंपनियों की यह जिम्मेदारी है कि वह बंद पड़े खदानों की भराई ठीक से कराये, लेकिन अकसर यह देखा जाता है कि कोल कंपनियां इसमें कोताही करती हैं और जैसे-तैसे काम पूरा कर दिया जाता है, परिणाम होता है जानलेवा दुर्घटनाएं.

धनबाद जिले में 21 अप्रैल को दिल दहला देने वाली घटना की जानकारी सामने आयी, जिसमें शुरुआत में यह बताया गया कि निरसा के डुमरीजोड़ में अवैध खदान के धंसने से लगभग 60-70 कोयला मजदूर खदान में दब गये हैं. बाद में जानकारी मिली कि सड़क 60 फीट धंसी है. धनबाद के डीसी संदीप सिंह, बीसीसीएल के जीएम अपूर्व दास, सीवी एरिया ने यह बयान दिया कि खदान में कोई नहीं फंसा है, सिर्फ सड़क धंसने की घटना हुई है, बेवजह की अफवाह फैलाई जा रही है. वहीं अगले दिन 22 अप्रैल को यह जानकारी सामने आती है कि अवैध खदान से सभी लोग सुरक्षित निकल गये. प्रशासन और बीसीसीएल ने मामले को अफवाह की शक्ल देकर दफन कर दिया. इसबीच 24 घंटे के भीतर निरसा के डुमरीजोड़ राष्ट्रीय और अतंर्राष्ट्रीय फलक पर छाया रहा. झारखंड की राजधानी रांची से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक कान खड़े. कोल सेक्रेटरी ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की. डीसीपी, एसडीएम, सांसद, विधायक की दौरे से निरसा के डुमरीजोड़ लाइमलाइट में बना रहा.

एक बार अगर यह मान भी लिया जाये कि डुमरीजोड़ जानलेवा दुर्घटनाओं में खदान में कोई नहीं दबा रहा और सभी सुरक्षित बाहर निकल गये, तो क्या यह BCCL-ECL की जिम्मेदारी नहीं है कि वह भू धसान जैसी घटना को भी ना होने दे? रिकॉर्ड के अनुसार, निरसा विधानसभा क्षेत्र में 2019 के बाद से, अवैध खनन की घटनाओं में ईस्टर्न कोल फील्ड लिमिटेड (ECL) की कापसरा बंद खदानों में कुल 22 और भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की चांच विक्टोरिया दहीबारी खदानों में दो लोगों की मौत हो चुकी है.

क्या गरीबों के जान की कोई कीमत नहीं ?

बड़ा सवाल यह है कि क्या सच में डुमरीजोड़ में सिर्फ सड़क धंसने की घटना है? क्या इस इलाके में अवैध खनन नहीं हो रहा था? क्या यहां के स्थानीय लोग अवैध खनन की बात बेवजह करते हैं? क्या बीसीसीएल प्रबंधन बंद खदानों की भराई पूरी जिम्मेदारी से करता है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गरीबों के जान की कोई कीमत नहीं है? क्या उन्हें इसी तरह मरने के लिए छोड़ा जा सकता है?

झारखंड के धनबाद जिले में अवैध उत्खनन से 2022 के फरवरी माह से 29 अप्रैल तक एक के बाद एक चाल धंसने की 9 घटनाएं हो चुकी है. फरवरी माह में जहां चार घटनाएं हुईं हैं. वहीं, मार्च में दो और अप्रैल में अबतक तीन घटनाएं हुई है. जिसमें अब तक 20-25 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि कुछ लोगों के मरने की खबर को परिजनों द्वारा छुपा लिया गया है. हालांकि अधिकारिक रूप से मात्र 7 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है.

एक फरवरी को धनबाद के निरसा क्षेत्र में चाल धंसने की तीन घटनाएं हुईं, जिनमें 16 लोगों के मारे जाने की सूचना स्थानीय लोगों ने दी. जबकि अधिकारिक पुष्टि सिर्फ पांच लोगों के मारे जाने की हुई. यह दुर्घटना निरसा के गोपीनाथपुर, कापासारा एवं दहीबाड़ी आउटसोर्सिंग में बंद पड़ी खदानों में हुई थी.

आठ फरवरी को जिले के महुदा थाना क्षेत्र में अवैध खनन करते हुए दो मजदूर रोशनी कुमारी (14) और विनोद महतो (28) की मौत हो गयी थी.

3 मार्च की सुबह निरसा थाना क्षेत्र के ही कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान अचानक चाल धंस गई. जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी. वहीं हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. मरने वालों में एक कमारडीह का रहने वाला और दूसरा मुगमा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा.

11 मार्च 2022 को वेस्ट मोदीडीह कोलियरी के बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में मलबा में दबने से पांडेडीह छह नंबर की महिला 35 वर्षीय चिंता देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी.

4 अप्रैल 2022 को वेस्ट मोदीडीह के बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में अवैध उत्खनन के दौरान मलबा गिर जाने से एक महिला जख्मी हो गई थी. सहयोगी उसे उठाकर ले भागे थे.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध कोयला उत्खनन में हो रही मौत का जिम्मेवार कौन है? अवैध खनन रोकने के लिये सरकार का निर्देश जारी होता है, अधिकारियों की हाई लेबल मीटिंग होती रहती है, स्थानीय पुलिस को इसे रोकने के लिये दिशा निर्देश दिया जाता है. बावजूद इसके यह धंधा रुकने का नाम नहीं लेता क्यों? इसके पीछे किसका हाथ है? लगातार हो रही ऐसी घटनाओं में मौत का सिलसिला जारी है. इस मामले में BCCL-ECL के साथ सरकार व पुलिस प्रशासन को गम्भीर होना होगा, तभी इस पर रोक लगना सम्भव है, नहीं तो घटना घटती रहेगी, लोग मरते रहेंगे.

अवैध खनन को रोकने के लिए धनबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता, समाजसेवी एवं बियाडा के पूर्व अध्यक्ष विजय कुमार झा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि प्रति वर्ष 10 मिलियन टन कोयले की चोरी धनबाद से हो रही है और सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है जिसे रोका जाना चाहिए. उन्होंने 56 पेज की अपनी याचिका में कोर्ट से आग्रह किया है कि कोर्ट अपनी निगरानी में इस अवैध खनन की जांच कराएं.

विजय कुमार झा बताते हैं कि डायरेक्टर जनरल माइन्स ऑफ सेफ्टी खनन के ऊपर यानी सतह पर की स्थिति क्या है? को देखते हुए यह मानक तय करते हैं कि खनन में कहां-कहां कितनी चौड़ाई, कितनी मोटाई और कितने पिलर छोड़ना है. कहां रेलवे लाइन है, कहां बाजार है, कहां नदी है, इस बात को ध्यान में रखकर मानक तय किए जाते हैं. अगर इन मानकों की खनन में जरा भी अवहेलना दिखती है डीजीएमएस खनन बंद करवा देता है. लेकिन अवैध खनन में डीजीएमएस के मानक का कोई मतलब कहां रह जाता है। इसलिए स्थिति काफी खतरनाक है. ऐसा नहीं है कि लोगों को यह पता नहीं है, लेकिन किसी को इस खतरनाक हालत पर बोलने या इसका विरोध करने का साहस नहीं है या फुर्सत नहीं है.

वहीं अवैध खनन से होने वाले खतरों पर मासस के महासचिव और बिहार कोलियरी कामगार यूनियन के केन्द्रीय सचिव हलधर महतो बताते हैं कि मुगमा स्टेशन जो हावड़ा टू बॉम्बे की मेन लाइन है, उसके नीचे जिस तरह से खनन किया जा रहा है, वह कभी भी धंस जाएगा और बहुत बड़ा हादसा हो जाएगा. जितना भी फुटबॉल ग्राउंड बना हुआ है, उसके नीचे खनन हो रहा है. यह सबके संज्ञान में है, बावजूद इसके आज तक कोई भी विधायक या सांसद सदन में इस बात को नहीं रखा है. दुखद बात यह है कि जब कभी कोई बड़ी घटना होती है तो ये लोग आ जाते हैं आंसू बहाने, अपनी वाहवाही लूटने, मुआवज़े की मांग करने, लेकिन घटना के पहले किसी को कोई मतलब नहीं होता है. वे सवाल करते हैं कि क्या आम आदमी का जीवन मुआवजा भर है? क्या उनका जीवन मुआवजा से लौट आएगा?

हलधर महतो साफ शब्दों में आरोप लगाते हैं कि बीसीसीएल का हाई लेबल अधिकारी, बड़े नेता इस अवैध खनन में शामिल हैं. भूमिगत खदान में अनाधिकार रूप से किसी को भी घुसने का आदेश नहीं है. बीसीसीएल के मजदूर भी बिना जूता और टोपी के अंदर नहीं घुस सकते. यहां डीजीएमएस हैं, सीआईएसएफ, इसमें एक बड़ा मफिया गिरोह है जिसकी पहुंच सीएमडी से लेकर बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों तक से है. वे कहते हैं बीसीसीएल के अधिकारियों की मिली भगत से ही यह अवैध खनन हो रहा है. हलधर बताते हैं कि वेजबोर्ड कमेटी में चार साल पहले 400 भूमिगत खदानों को बंद करने की घोषणा हुई थी जो आज माफियाओं के कब्जे में है.

यहां बता दें कि कोयला मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक विगत पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21 तक) के दौरान कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी बीसीसीएल, एनसीएल, डब्ल्यूसीएल, एसईसीएल, एमसीएल में कोयला के अवैध उत्खनन के संदर्भ में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की गयी है, जबकि सर्वाधिक एफआईआर इसीएल द्वारा दर्ज कराई गयी है. आंकड़ों के मुताबिक कोल कंपनियों द्वारा दर्ज कुल 633 मामलों में सर्वाधिक 603 मामले इसीएल द्वारा दर्ज करायी गयी है, जबकि सीसीएल द्वारा 11 व एनईसीएल द्वारा 19 मामले दर्ज कराये गये हैं. विभिन्न कोल कंपनियों द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में 17, वर्ष 2019-20 में 243, वर्ष 2018-19 में 263 वर्ष 2017-18 में 94 व वर्ष 2016-17 में कुल 16 एफआईआर दर्ज करायी गयी है. यानी सर्वाधिक एफआईआर वित्त वर्ष 2019 – 20 व 2018-19 में दर्ज करायी गयी है. उनमें बीसीसीएल में अवैध कोयला उत्खनन के एक भी प्रकरण शामिल नहीं हैं. केवल इसीएल, सीसीएल एवं एनईसी में ही अवैध कोयला उत्खनन के प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज हुई है.

झरिया में जिंदा दफन होना कोई नई बात नहीं…….

झरिया के इंदिरा चौक के पास अपने अब्बू के साथ 10 साल का रहीम खान जब चाय पीकर अपने घर लौट रहा था, तो कुछ ही दूरी के बाद उसके कदमों के भार से जमीन धंस गई और वो उसमें जिंदा दफन हो गया. उसे बचाने आए उसके पिता बबलू खान भी उसमें गिर पड़े और उनकी भी मौत हो गई.

दस फीट के बने गोफ में बेटा और बाप जिंदा दफन हो गए. यह घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया लेकिन झरिया में जमीन के नीचे कोयले में लगी आग और अवैध उत्खनन से बीसीसीएल और प्रशासन की नींद अभी तक नहीं खुली है.

झरिया कोलियरी क्षेत्र के 17 हजार वर्ग किलोमीटर में वर्षों से आग लगी हुई है. लगभग आठ लाख परिवार इससे प्रभावित हैं, लेकिन अभी तक इनलोगों को पुनर्वासित करने का काम सरकार द्वारा नहीं किया जा सका है. जब भी कोई मौत होती है, तो प्रशासन एवं बीसीसीएल के अधिकारी एक-दूसरे के माथे पर उसका ठीकरा फोड़ने का खेल शुरू कर देते हैं. वहीं राज्य सरकार एवं भारत सरकार पंच की भूमिका में आ जाती है. बीसीसीएल एवं राज्य सरकार की लड़ाई में यहां के लोग जिंदा दफन होने को मजबूर हैं.

हादसों की लंबी फेहरिस्त…..

26 सितम्बर 1995 को केंदुआ के चौरसिया दंपत्ति इसके शिकार हुए.

वर्ष 1996 में कतरास मोड़ में भू-धसान की घटना.

4 अगस्त 1997 को धर्म नगर की गीता नामक बालिका भू-धसान में दफन

जून 1999 में सेंट्रल बासजोड़ा में एक युवक जिंदा दफन, भू-धसान में कई घर क्षतिग्रस्त.

वर्ष 2006 में शिमलाबहाल बस्ती की मीरा नामक लड़की जमीन में धंस कर जिंदा जली.

15 मार्च 2007 को बीसीसीएल के नयाडीह कुसुंडा में भू-धसान में दस लोगों की मौत.

वर्ष 2008 में सेल के सेवानिवृत्त कर्मी चासनाला के उमाशंकर त्रिपाठी इंदिरा चौक के पास जमीन धंसने से जिंदा जले.

16 मई 2008 को चासनाला की डेको परियोजना में डोजर मशीन समेत विनोद दास नामक कर्मी दफन.

19 सितम्बर 2008 को कुजामा में ज्योति नामक बालिका गोफ में गिर कर मरी.

अक्टूबर 2008 में धर्म नगर झरिया में भू-धसान में सुंदरी देवी की मौत.

5 फरवरी 2016 को सुदामडीह में भू-धसान में जीरा देवी मकान समेत दफन.

13 मार्च 2017 को बोका पहाड़ी में भू-धसान से पचास फीट व्यास का गोफ बना.

22 अक्टूबर 2019 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

23 जनवरी 2019 बीसीसीएल की चाच विक्टोरिया दहीबारी कोलियरी परियोजना में 4 की मौत.

24 सितंबर 2019 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

26 दिसंबर 2019: धनबाद के निरसा थाना क्षेत्र के चापापुर ओसीपी में अवैध खनन के दौरान मलबे में दबकर दो लोगों की मौत हो गयी.

14 जनवरी 2020: धनबाद के निरसा में कोयले के अवैध उत्खनन के दौरान चाल धसने से दो लोगों की मौत हो गयी थी और चार लोग घायल हो गये थे.

25 जनवरी 2020: धनबाद के ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग के नीचे जमा पानी के समीप रात में अवैध कोयला खनन के दौरान चाल गिरने से तीन लोगों की मौत हो गयी थी.

27 जनवरी, 2020 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान 3 की मौत.

13 फरवरी, 2020 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान 2 की मौत.

24 जुलाई, 2020 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

1 जुलाई 2020 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

21 दिसंबर, 2021 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

28 नवंबर, 2021 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

10 अक्टूबर 2021 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

14 सितंबर, 2021 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान एक की मौत.

18 जुलाई 2021: जिले के केंदुआडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत बीसीसीएल एरिया 6 के गंसाडीह में यूसीसी इंफ्रा आउटसोर्सिंग के समीप भू–धंसान से गंसाडीह 3 नंबर निवासी युवक उमेश पासवान गोफ में समा गया. कड़ी मशक्कत के बाद गोफ से युवक को निकाला गया. गोफ के अंदर आग होने के कारण युवक बुरी तरह से झुलस गया.

1 फरवरी 2022 ईसीएल मुगमा क्षेत्र स्थित कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान 5 की मौत.

आठ फरवरी को जिले के महुदा थाना क्षेत्र में अवैध खनन करते हुए दो मजदूर रोशनी कुमारी (14) और विनोद महतो (28) की मौत हो गयी थी.

3 मार्च की सुबह निरसा थाना क्षेत्र के ही कापासारा आउटसोर्सिंग में अवैध खनन के दौरान अचानक चाल धंस गई. जिसमें दो लोगों की मौत हो गयी. वहीं हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया. मरने वालों में एक कमारडीह का रहने वाला और दूसरा मुगमा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा.

11 मार्च 2022 को वेस्ट मोदीडीह कोलियरी के बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में मलबा में दबने से पांडेडीह छह नंबर की महिला 35 वर्षीय चिंता देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गई थी.

4 अप्रैल 2022 को वेस्ट मोदीडीह के बीएस माइनिंग आउटसोर्सिंग पैच में अवैध उत्खनन के दौरान मलबा गिर जाने से एक महिला जख्मी हो गई थी. सहयोगी उसे उठाकर ले भागे थे.

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