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रांची : चंदाघांसी में दो सौ एकड़ का भूमि घोटाला, मूल रैयत के नाम में हुई हेरफेर

एयरपोर्ट विस्तारीकरण के मुआवजे के आवेदन के बाद गड़बड़ी का चला पता

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Ranchi : राजधानी के चंदाघांसी मौजा में दो सौ एकड़ से अधिक का भूमि घोटाला सामने आया है. नामकूम अंचल के इस मौजा के खेवट दो, तीन और चार के मूल रैयत अब्दुल जाहिर, मो मंसूर अली के नाम से 564.41 एकड़ की जमीन खतियान में दर्ज है. पर जमीन के बिचौलियों ने इस जमीन के पंजी-2 के कई पृष्ठों को फाड़ कर गड़बड़ी कर कई एकड़ जमीन बेच दी.

यह जमीन नागेंद्र नाथ देवघरिया की तरफ से अब्दुल जाहिर और मो मंसूर अली को दी गयी थी. एयरपोर्ट विस्तारीकरण में भी यह जमीन गयी है. इसके कई फरजी रैयतों के आवेदन पर यह मामला प्रकाश में आया. जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सीमा सिंह के पास चंदर तेली, पिता जगन्नाथ तेली के आवेदन के बाद मामला सामने आया.

इसमें इसी खेवट और खाता नंबर का जिक्र किया गया है. खेवट के खाता संख्या एक, दो, तीन, चार और नौ के पन्ने रजिस्टर-2 में गायब हैं. कंप्यूटरीकृत पंजी-2 के सर्च करने पर भी यह दिखाता है कि खतियान और पंजी-2 के पन्ने कटे-फटे हुए हैं. नामकुम अंचल के हेथू, हुंडरू, बड़ा और छोटा घाघरा में फरजी तरीके से मुआवजा राशि लेने के कई समाचार भी प्रकाशित होते रहे हैं.

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वास्तविक रैयतों ने जिला प्रशासन से की शिकायत

वास्तविक रैयत मो अताउर खान, मो इजहारुल हक, मो अशरफ, मो असलम और मो अख्तर खान ने इस गड़बड़ी को लेकर जिला प्रशासन और जिला भूमि सुधार उप समाहर्ता कार्यालय में शिकायत की है. इसके बाद से इस खेवट और उपरोक्त खाता नंबर से संबंधित मुआवजे के भुगतान पर प्रशासन की तरफ से रोक लगा दी गयी है.

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कैसे हुई गड़बड़ी

यह गड़बड़ी नामकुम अंचल के तत्कालीन अंचल अधिकारी अमित कुमार के कार्यकाल में हुई है. वर्ष 2011 से एयरपोर्ट विस्तारीकरण के 450 एकड़ से अधिक के भूमि अधिग्रहण को लेकर वास्तविक पंचाटों (रैयतों) को मुआवजा राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गयी थी.

इस समय ही कई जमीन जिसकी रसीद अपटूडेट नहीं थी उसकी मूल पंजी में गड़बड़ी कर बिचौलियों ने मुआवजे की राशि हड़पने की कोशिश भी की थी. इसमें वैसी जमीनों को चिह्नित किया गया था, जिस पर कोई खेती नहीं कर रहा था और वर्षों से जमीन परती पड़ी थी.

उस समय पंचाटों से जिला प्रशासन के अधिकारी संबंधित जमीन के मूल दस्तावेज, लगान और दाखिल खारिज के दस्तावेजों के आधार पर भुगतान करने की अनुमति दी थी. इसके लिए संबंधित गांवों में जिला प्रशासन की तरफ से कैंप भी लगाए गए थे.

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