न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

हुकुमनामा, पट्टा के जरिये जमींदारों से मिली जमीन का नहीं हो रहा म्युटेशन

सरकार के आदेश के बाद भी अंचल कार्यालय नहीं दिखा रहे दिलचस्पी. जून 2018 में राजस्व, भूमि सुधार विभाग ने सभी अंचल कार्यालयों को दिया था निर्देश

1,038

Ranchi : झारखंड में आजादी के पहले जमींदारों द्वारा हुकुमनामा, विक्रय पत्र और पट्टे से दी गयी जमीन का अब भी दाखिल खारिज (म्युटेशन) नहीं हो रहा है. इन गैर मजरुआ भूमि का लगान रसीद भी नहीं काटा जा रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की तरफ से जून 2018 में एक आदेश जारी कर ऐसी जमीन का म्युटेशन करने और ऑनलाइन रसीद काटने का निर्देश दिया गया था. ढाई महीने बाद भी अब तक म्युटेशन और रसीद काटने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पायी है. सरकार की तरफ से समाहर्ता और अंचल अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे रैयतों के दस्तावेजों का अभिलेखागार के रिकार्ड से मिलान कर, म्युटेशन और लगान रसीद काटने की अनुशंसा करें.

eidbanner

इसे भी पढ़ें- मिनिस्टर साहब स्टिंग देखिये ! ओरिजिनल सर्टिफिकेट के लिए वसूले जा रहे हैं 5000 रुपये

सरकार ने माना कि जमीन के दस्तावेज का काउंटर फॉयल रखना संभव नहीं

राज्य सरकार का मानना है कि 1925 में रांची का कैडेस्ट्रल सर्वे हुआ था. ऐसे में जमिंदार से प्राप्त लगान रसीद को 100 वर्षों से अधिक समय तक ठीक-ठाक रखना किसी के लिए भी संभव नहीं है. हालांकि रिकार्ड का संधारण और रख-रखाव का काम जिला स्तर पर रिकार्ड रूम पर होता है. इसके आधार पर ही समाहर्ता और अंचल अधिकारी को रजिस्टर 3ए और रजिस्टर 3एए के आधार पर हुकुमनामे और पट्टे का मिलान कर म्युटेशन और लगान रसीद काटने की अनुमति दी जाती है. सरकार का मानना है कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 81 और 90 के अंतर्गत भूमि का लगान जमा नहीं कराने की स्थिति में सरकार रैयतों की भूमि अपने अधीन कर लेती है. इसके विपरीत यह बातें भी कही जा रही है कि यदि सदर अनुमंडल पदाधिकारी यदि रैयतों के दस्तावेजों से संतुष्ट होंगे, तो वे म्युटेशन और लगान रसीद काटने की अनुशंसा कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें- BJP कार्यसमिति की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष और आशा लकड़ा से ज्यादा तरजीह मिस्फिका को

Related Posts

नगर निकाय चुनाव को लेकर जिलों के डीसी को प्रारंभिक तैयारी का निर्देश

14 निकायों में दलीय आधार पर होना है निकाय चुनाव

mi banner add

रांची में ही है 60 से अधिक रैयत

राज्य की राजधानी में ही 60 से अधिक ऐसे रैयत हैं, जिन्हें जमींदारी व्यवस्था के तहत एक अप्रैल 1946 के पहले हुकुमनामा और सादा पट्टा पर जमीन दी गयी थी. ऐसी जमीन की नियमित बंदोबस्ती भी नहीं हो पायी. 1955-56 तक कई जगहों पर संबंधित जमींदार द्वारा ही रसीद निर्गत की गयी. जो अब रैयतों के पास नहीं है. रैयतों के पास पुराने जो हुकुमनामे हैं, उसे वर्तमान में राजस्व अंचल के अधिकारी तरजीह नहीं देते हैं.

इसे भी पढ़ें- भूख लगने पर महिला ने रोटी चुराकर खा ली, तो मालिक ने नंगा कर बांध दिये हाथ-पैर, पूरे बदन पर लगाया मिर्च पाउडर का लेप

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: