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झारखंड में गले की फांस बना कोल कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण

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Ranchi: झारखंड में कोयला कंपनियों को अपने विस्तारित प्रोजेक्ट के लिये जमीन की जरूरत है. पर जमीन अधिग्रहण की समस्या उसके आड़े आ रही है. केंद्रीय कोयला मंत्रालय भी यह मान रहा है. मंत्रालय के मुताबिक कोल इंडिया की अधिकांश सहायक कंपनियों को झारखंड में एक्सटेंडेड प्रोजेक्ट के लिये जमीन की आवश्यकता है पर इस पर अधिग्रहण करना बड़ी समस्या का विषय बन चुका है.

सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल जैसी कंपनियां इल लिस्ट में शामिल हैं. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि जरूरत के मुताबिक स्थानीय ग्रामीणों से बात की जा रही है. ग्रामसभा से इसके लिये अपील की जा रही है. स्थानीय प्रशासन की मदद भी इसमें जरूरी है.

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ECL को राज्य सरकार से सहयोग नहीं

सदन में पिछले दिनों राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने कोयला मंत्रालय से झारखंड में कोलियरी कंपनियों को जमीन अधिग्रहण में आ रही समस्या को उठाया था. मंत्रालय ने इसके जवाब में बताया है कि ईसीएल (ईस्टर्न कोल लिमिटेड) का दुमका में चिचरों पट्सीमल, ब्राह्मणी (मध्य) और ब्राह्मणी (दक्षिणी) सहित अमर कोनाड़-मुरगादंगल, ब्राह्मणी (उत्तर) में जमीन अधिग्रहण का मसला स्थानीय ग्रामीणों के भारी विरोध के कारण फंसा पड़ा है. ग्राम सभा को इसके लिये राजी किया जा रहा है.

गोड्डा में बोरीजोर सर्किल में तालझारी मौजा में भूमि का कब्जा हो चुका है. सीबीए सीएडी एक्ट 1957 के अंतर्गत यह पहले से अधिग्रहित है. इस संबंध में जमीन पर उचित तरीके से कब्जा के लिये स्टेट ऑफिसर को रेगुलर कहा जा रहा है.
देवघर के चित्रापूर्व ओसीपी, एसपी खानों के लिये 55.47 हेक्टेयर सरकारी और गोचर भूमि का मसला चल रहा है. इसके लिये ईसीएल की ओर से 4 दिसंबर, 2018 को 54 करोड़, 68 लाख 82 हजार से अधिक रुपये जमा किये जा चुके हैं. चित्रा पूर्व ओसीपी, एसपी खान क्षेत्र के लिये ईसीएल ने स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क के तौर पर 7 करोड़ रुपये से अधिक रुपया राज्य सरकार के पास जमा किया है. पर सरकार ने इस मामले में अब तक जरूरी औपचारिकताओं को पूरा करके ईसीएल को कब्जा दिलाने में गंभीरता नहीं दिखायी है.

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ईसीएल को धनबाद में जमीन चाहिये जो सीएनटी के दायरे में है. ऐसे में उसे जिला अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण पत्र चाहिये जिसमें दिक्कतें आ रही हैं. जिला अधिकारी को इससे जुड़े रिकॉर्ड्स को सही किये जाने का काम बाकी है.

CCL को भी है संकट

सीसीएल (सेंट्रल कोलफिल्ड्स लिमिटेड) को लैंड पजेशन सर्टिफिकेट नहीं मिल पाने के कारण जमीन पर कब्जा किये जाने में दिक्कत आ रही है. इसके लिये जरूरी कागजात उसे नहीं मिल पा रहे हैं. सीसीएल के अधिकारी झारखंड सरकार के पास लंबित लैंड पजेशन सर्टिफिकेट के केस के लिये लगातार संपर्क कर रहे हैं. केंद्र, राज्य सरकार और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कई बैठकें भी हुई हैं.

बीसीसीएल को झारखंड में पुनः सर्वेक्षण (आरएस) अधिकारों के रिकॉर्ड में गलत इंट्री के कारण कई फसादों का सामना करना पड़ रहा है. जमीन पर उत्तराधिकार को लेकर जमीन मालिकों ने कई केस कर रखे हैं. बीसीसीएल वास्तविक भू-स्वामियों की प्रमाणिकता के लिये राज्य सरकार के पास लगातार मसले को रख रहा है.

 

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