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आज शाम तक हो सकती है LALU YADAV की रिहाई, कोर्ट से आदेश जारी

18 अप्रैल को मिली है जमानत, अदालती कार्य बाधित होने से नहीं हो रही थी रिहाई

Ranchi: चारा घोटाला मामले के सजायाफ्ता लालू प्रसाद यादव की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है. आज शाम तक वह जेल से बाहर आ सकते हैं. झारखंड में सीबीआई कोर्ट ने रिहाई का आदेश जारी कर दिया है. आदेश की प्रतिलिपि एम्स दिल्ली प्रेषित कर दिया गया है. मालूम हो कि लालू यादव फिलहाल एम्स में दाखिल हैं.

 

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मालूम हो कि लालू प्रसाद को झारखंड हाई कोर्ट से 18 अप्रैल को जमानत मिल चुकी है. अदालती काम बाधित होने की वजह से उनकी रिहाई नहीं हो पाई है. आज  हाई कोर्ट में सीबीआई कोर्ट के अधिवक्ता प्रभात कुमार ने एक-एक लाख के निजी मुचलके और पांच-पांच लाख की जुर्माना राशि अदालत में जमा किया. जिसके बाद रिहाई का आदेश जारी हुआ.

 

एक दिन पूर्व बार काउंसिल आफ इंडिया की ओर से जेल में बंद या जिन्हों कोर्ट से जमानत की मंजूरी मिली है. उसके लिये बेल बांड भरने की अनुमति अधिवक्ताओं को मिली है. लालू यादव को हाईकोर्ट से 18 अप्रैल को जमानत मिली थी. जमानत दुमका कोषागार मामले में मिली. इस दौरान वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मामले में दलील पेश की थी.

 

इसके पहले फरवरी में भी लालू यादव की जमानत याचिका हाईकोर्ट ने नामंजूर कर दी थी. कोर्ट ने तब दलील दी थी कि लालू ने अपनी आधी सजा पूरी नहीं की है ऐसे में लालू को जमानत नहीं मिल सकती है. इसके बाद लालू की याचिका पर फिर से सुनवाई नौ अप्रैल से शुरू हुई. इस दिन लालू ने दुमका कोषागार मामले में आधी सजा पूरी कर ली थी.

 

सीबीआई कोर्ट से मिली है सात साल की सजा: दुमका कोषागार मामले में लालू प्रसाद यादव पर लगभग 88 लाख रूपये अवैध निकासी का आरोप है. सीबीआइ की विशेष अदालत ने लालू को सात साल की सजा सुनायी थी. वहीं डोरंडा कोषागार मामले में भी सीबीआइ कोर्ट ने लालू ने सात साल की सजा सुनायी थी. दोनों सजा अलग अलग चल रही थी. ऐसे में दुमका कोषागार मामले में साढ़े तीन साल की सजा पूरी होने पर कोर्ट ने जमानत याचिका मंजूर की.

 

कोर्ट कार्य में लगी रोक: कोविड संक्रमण के कारण बार काउंसिल आफ इंडिया और स्टेट बार काउंसिल की आरे से कोर्ट कार्य में रोक लगायी गयी है. राज्य बार काउंसिल ने दो मई तक रोक लगायी है. हालांकि हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई का आदेश दिया है. इसी बीच बार काउंसिल आफ इंडिया ने जमानत कार्य पूरी करने का आदेश अधिवक्ताओं को दिया. हालांकि इस पर स्टेट बार काउंसिल की ओर से अब तक निर्णय नहीं लिया गया है.

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