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रेलवे में फिर लौटेगा लालू वाला जमाना, सभी स्टेशनों पर मिलेगी कुल्हड़ वाली चाय

 रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राजस्थान के अलवर में किया ऐलान

New delhi : राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद जब रेल मंत्री थे तो उन्होंने पर्यावरण के अनुकूल एक बहुत ही अच्छा फैसला लिया था. उन्होंने रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में चाय देने को प्रोत्साहित किया था. लेकिन कुछ वर्षों बाद धीरे-धीरे प्लास्टिक या अन्य सामग्री से बने कपों ने उसकी जगह ले ली थी. अब एक बार फिर कुल्हड़ की सोंधी-सोंधी महक वाली चाय की चुस्की लेते हुए आप रेल यात्रा कर सकेंगे. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को कहा कि आने वाले समय में देश के हर रेलवे स्टेशन पर प्लास्टिक मुक्त कुल्हड़ में ही चाय मिलेगी.

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अभी सिर्फ 400 स्टेशनों पर ही मिलती है कुल्हड़ में चाय

राजस्थान के अलवर में ढिगावड़ा रेलवे स्टेशन पर ढिगावड़ा-बांदीकुई रेलखंड पर विद्युतीकृत रेलमार्ग के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि आज देश में लगभग 400 रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में ही चाय मिलती है. आगे चलकर हमारी योजना है कि देश के हर रेलवे स्टेशन पर सिर्फ कुल्हड़ में चाय बिकेगी. प्लास्टिक मुक्त भारत में रेलवे का भी यह योगदान रहेगा. इससे लाखों भाई-बहनों को रोजगार मिलता है.

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2014 में मोदी सरकार बनने तक गायब हो गये थे कुल्हड़

गोयल ने कहा कि पहले एक जमाना था, जब रेलवे स्टेशनों पर कुल्हड़ में ही चाय मिलती थी. जब 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार आयी, तब तक कुल्हड़ गायब हो गये और प्लास्टिक के कप में चाय मिलनी शुरू हो गयी. रेल मंत्री ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग विभाग के लोगों ने रेलवे के साथ मिलकर इस कार्य को गति दी है. गोयल ने कहा कि मैं अभी कुल्हड़ में चाय पी रहा था. वास्तव में कुल्हड़ में चाय पीने का स्वाद ही कुछ और होता है और पर्यावरण को भी आप बचाते हो.

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लालू ने 2004 में कुल्हड़ वाली चाय की थी शुरुआत

इस समय चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद जब रेलमंत्री थे, तो उन्होंने 16 साल पहले वर्ष 2004 में रेलवे स्टेशनों पर ‘कुल्हड़’ की शुरुआत की थी, लेकिन प्लास्टिक और पेपर के कपों ने चुपके से कुल्हड़ की जगह हथिया ली.

हालांकि, 2019 की जनवरी में उत्तर रेलवे एवं उत्तर पूर्व रेलवे के मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक बोर्ड की ओर से जारी सर्कुलर के अनुसार, रेल मंत्री पीयूष गोयल ने वाराणसी और रायबरेली स्टेशनों पर खान-पान का प्रबंध करने वालों को टेराकोटा या मिट्टी से बने ‘कुल्हड़ों’, ग्लास और प्लेट के इस्तेमाल का निर्देश दिया था.

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