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लालू ने कहा, कुत्ता-बिल्ली सबकी गिनती, पिछड़ों की क्यों नहीं?

Patna: जेल से निकलते ही राजद प्रमुख की सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ गई है. नीतीश कुमार और भाजपा पर तंज का कोई भी अवसर वो हाथ से नहीं जाने देना चाहते हैं. लालू प्रसाद ने जनगणना में पिछड़े और अति पिछड़े की गिनती पर सवाल खड़ा किया है. मंगलवार देर शाम उन्होंने 2019 के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए सवाल किया है कि केन्द्र सरकार जनगणना में कुत्ता-बिल्ली, हाथी-घोड़ा, सियार-सूअर सब की गिनती करती है तो पिछड़े और अति पिछड़ों की गिनती करने में उसे क्या परेशानी है?

जनगणना रजिस्टर में एक अलग जाति का कॉलम जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या जातिगत जनगणना करेंगे तो 10 फीसदी की 90 प्रतिशत पर हुकूमत की पोल खुल जाएगी? इधर, भाजपा ने लालू के इस बयान पर निशाना साधते हुए कहा है कि लालू जातीय उन्माद फैलाना चाहते हैं.

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लालू के सवाल

लालू प्रसाद ने अपने ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए केंद्र सरकार से पूछा है कि सरकार हिन्दुओं की बहुसंख्यक आबादी की जनगणना क्यों नहीं करवाना चाहती है? जनगणना में मात्र एक कॉलम जोड़ देने और पिछड़ों-अति पिछड़ों की वास्तविक संख्या ज्ञात हो जाने से किसे, क्या और किसका डर है?

उन्होंने सवाल उठाया है कि एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर), एनआरसी (राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर) और 2021 की भारतीय जनगणना पर लाखों करोड़ खर्च होंगे. सुना है एनपीआर में अनेकों अलग-अलग कॉलम जोड़ रहे हैं, लेकिन इसमें जातिगत जनगणना का एक कॉलम और जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या 5000 से अधिक जातियों वाले 60 प्रतिशत अनगिनत पिछड़े-अति पिछड़े हिंदी नहीं हैं, जो आप उनकी गणना नहीं चाहते?

भाजपा का पलवार

भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि जनगणना निदेशालय एक स्वतंत्र निकाय है. सरकार ने कहा है कि जातीय जनगणना हो, लेकिन यह निदेशालय को तय करना है. लेकिन, लोगों को यह समझना चाहिए कि सरकार आर्थिक आधार पर कई योजनाओं का लाभ दे रही है. ऐसी 70-75 तरह की योजनाएं हैं, जिनका लाभ हर जाति के गरीबों को मिल रहा है. इसमें ज्यादातर पिछड़ी-अति पिछड़ी जातियां ही योजना का लाभ उठा रही हैं. कहा कि लालू प्रसाद को जब मौका मिला तो उन्होंने जातीय जनगणना नहीं कराया, बल्कि उनकी सरकार में सबसे ज्यादा अति पिछड़े, दलित प्रताड़ित हुए. अब वे जातीय उन्माद फैलाना चाहते हैं.

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