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लाडली लक्ष्‍मी और मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना बंद करेगी सरकार, एक जनवरी से सुकन्‍या योजना : सीएम 

बाल विवाह उन्मूलन के लिये राज्य कार्य योजना का विमोचन

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Ranchi : सरकार बच्चियों और महिलाओं के विकास के लिये योजनाएं बनातीं है, जनसंवाद कार्यक्रम से जानकारी हुई कि योजनाएं बनायी तो जाती है, लेकिन आम जनता को इसकी जानकारी नहीं है. इसके लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि लाडली लक्ष्मी योजना और मुख्यमंत्री कन्यादान योजना को बंद कर दिया जायें. इसके बदले में सरकार नयी योजना एक जनवरी से लागू करेगी. योजना का नाम मुख्यमंत्री सुकन्या योजना रखा जायेगा. उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बाल विवाह उन्मूलन के लिये राज्य कार्य योजना के विमोचन के मौके पर कहा.

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कार्यक्रम का आयोजन महिला, बाल विकास एवं समाजिक सुरक्षा विभाग की ओर किया गया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के तहत विभिन्न चरणों में परिवार के खाते में पैसा डाला जायेगा, जब तक बच्ची 18 साल की नहीं हो जाती तब तक खाते में डीबीटी के माध्यम से पैसा भेजा जायेगा. इस बीच किसी बिचैलियें या अन्य अधिकारी की मदद परिवार को लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

दिसंबर तक कर लिया जायेगा कार्य पूरा

रघुवर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुकन्या योजना के लिये दिसंबर तक सारी तैयारी कर ली जायेगी. बच्ची के जन्म से 18 साल तक किस्तों में राशि  दी जायेगी, वहीं 18 साल पूरे होने पर विवाह के लिए भी कुछ  राशि  परिवार को डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध करा दिया जायेगा. योजना का मुख्य  उद्देश्य  राज्य की  बच्चियों को  शिक्षित बनाना, साथ ड्रॉप आउट की समस्या से छुटकारा पाना है.

पांच जिलों के लिए रोड मैप करें तैयार

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि राज्य में बाल विवाह सबसे अधिक देवघर, गोड्डा, गिरिडीह, कोडरमा, पलामू में पाया जाता है. इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इन पांच जिलों में जमीनी स्तर पर कार्य करने की जरूरत है. ग्रामीण क्षेत्रों में अशिक्षा और अज्ञानता के कारण बाल विवाह हो रही है. उन्होंने कहा कि बाल विवाह मातृत्व शक्ति के लिए कलंक है.

विभागों के सामंजस्य से होगा निवारण

विकास आयुक्त डीके तिवारी ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग के मिलकर काम करने से ही बाल विवाह से निदान पाया जा सकता है. इसके लिए विभागों के बीच सामंजस्य जरूरी है. उन्होंने कहा कि राज्य में कुपोषण की समस्या से कुछ हद तक छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन अभी भी 15 से 49 उम्र की महिलाओं में कुपोषण के लक्षण देखे जा सकते है. जिसकी वजह कहीं न कहीं बाल विवाह ही है.

तीन कार्य योजनाओं की दी गयी जानकारी

महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव अभिताभ  कौशल  ने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच चर्चा कर बाल विवाह से निपटने के लिए तीन कार्य योजनाएं बनायी गयी हैं. जिनमें इंसफॉर्मेंट रूल ऑफ लॉ, आइईसी, सोशल रिफॉर्म है. उन्होंने कहा कि किसी भी योजना को तभी सफल बनाया जा सकता है जब उसे कानून के तहत काम किया जाए. अन्य विभागों की सक्रियता बढ़ाने के लिए आइईसी का प्रावधान किया गया है.

मौके पर मंत्री डॉ लुईस मरांडी, मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, विकास आयुक्त सह अपर मुख्य सचिव डीके तिवारी, शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ सुनील कुमार वर्णवाल, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के सचिव डॉ अमिताभ कौशल, समाज कल्याण विभाग की सचिव हिमानी पांडे, पंचायती राज विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो, यूनिसेफ इंडिया हेड डॉक्टर यासमीन अली हक, यूनिसेफ की झारखंड हेड डॉ मधुलिका जोनाथन, संबंधित विभाग के अन्य पदाधिकारी, यूनिसेफ और एनजीओ के प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में  स्कूली बच्चियां, महिलाएं एवं अन्य उपस्थित थे.

 

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