न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

पिछले तीन वर्षों की अपेक्षा 2018 में लूट-डकैती जैसी आपराधिक घटनाओं में आयी कमी

33

Ranchi: झारखंड में अपराध की घटनाओं में कमी आई है. लूट-डकैती और अपहरण जैसी घटनाओं में लगातार कमी आ रही है. आंकड़े के मुताबिक, झारखंड में पिछले 3 वर्ष की अपेक्षा साल 2018 में लूट,डकैती और अपहरण की घटना में आई कमी. झारखंड में 2018 में अभी तक जहां फिरौती के लिए अपहरण के 24 घटना और लूट 406 घटनाएं घटी तो वहीं डकैती के 130 घटना 2018 में अभी तक पूरे झारखंड में घटित हुई है. जो पिछले 3 साल में घटित हुई घटनाओं से काफी कम है .

क्या कहते आंकड़े

झारखंड पुलिस के आंकड़े के अनुसार, झारखंड में साल 2015 में फिरौती के लिए अपहरण की घटनाएं 66, लूट 526 और डकैती की 255 घटनाएं हुई. जबकि 2016 में फिरौती के लिए अपहरण की 35 घटना, लूट की 609 घटना, और डकैती की 116 वारदात हुई. 2017 में फिरौती के लिए अपहरण की 45 घटना, लूट की 507 घटना और डकैती की 201 घटनाएं हुई. और वहीं साल 2018 में अब तक फिरौती के लिए अपहरण की 24 घटना, लूट की 406 घटना और डकैती की 130 घटनाएं घटित हुई.

राजधानी रांची में बढ़ी लूट,अपहरण और डकैती की घटनाएं

इस साल झारखंड में जहां क्राइम घटा है. वही राजधानी रांची में अपराध का ग्राफ बढ़ गया है. राज्य के सभी जिलों से अगर रांची की तुलना की जाए तो सबसे ज्यादा वर्ष 2018 में अब तक अपहरण, लूट और डकैती की घटना में बढ़ोतरी हुई है. रांची में फिरौती के लिए अपहरण की 6 घटना घटित हुई है, लूट की 60 घटना और डकैती की 14 घटना घटित हुई है.

अपराधिक गतिविधियों में ज्यादा संलिप्त युवा

झारखंड में आपराधिक घटनाओं पर जो आकड़े जारी हो रहे हैं, उनमें युवाओं की संलिप्तता में लगातार इजाफा हो रहा है. इन आकड़ों में साइबर अपराध, लूटपाट की घटनाएं शामिल हैं. हाल के वर्षों में आपराधिक घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है. अधिकतर मामलों में युवा वर्ग ही इन घटनाओं में संलिप्त पाये गये हैं. युवाओं का एक वर्ग आपराधिक गतिविधियों में ज्यादा सक्रिय दिख रहा है. इस लूटपाट के बाद उनसे पूछताछ में हमेशा एक ही बात सामने आयी है. आसानी से कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का लालच उन्हें अपराध की तरफ धकेल रहा है.

नक्सली घटना में हुई है बढ़ोतरी

झारखंड में नक्सली घटनाओं में बढ़ोत्तरी हुई है. नक्सली भी अब अपने टूट चुके संगठन को फिर से बनाने के लिए लगातार वारदात को अंजाम दे रहे हैं. इसके पीछे नक्सलियों का मुख्य मकसद लेवी वसूलना है. ताकि लेवी के पैसे से वे फिर से संगठन को खड़ा कर सकें. हालांकि, इस संबंध में पुलिस यह दावा करती है कि हतोत्साहित होकर नक्सली वारदात कर रहे हैं. लेकिन सवाल अपने जगह पर कायम है कि जब आलाधिकारी नक्सलियों के खात्मा का दावा लगातार कर रहे हैं, फिर वारदात होने से रोक पाने में पुलिस क्यों विफल साबित हो रही है. खासकर विकास कार्यों में लगे वाहनों और उपकरणों को क्षति पहुंचा कर सीधे-सीधे सरकार के विकास कार्यों की प्राथमिकता को नक्सली चुनौती दे रहे हैं.

इसे भी पढ़ेंःसमरेश सिंह की राजनीतिक सल्तनत का नया चेहरा होंगे बेटे संग्राम सिंह, धनबाद लोकसभा क्षेत्र से करेंगे दो-दो हाथ

इसे भी पढ़ें- बकोरिया कांड : सीबीआई ने दर्ज की प्राथमिकी, स्पेशल क्राईम ब्रांच-दिल्ली करेगी जांच

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: