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#Laborers : मजदूरों की परेशानी पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, कहा- केंद्र और राज्य सरकारों के प्रयासों में कमियां

New Delhi: लॉकडाउन की वजह से देशभर में फंसे प्रवासी मजदूरों और उनकी घर वापसी में आ रही परेशानियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है. कोर्ट ने कहा कि यहां-वहां फंसे लोगों को सहायता की ज़रूरत है. सरकारी इंतज़ाम पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं.

गुरुवार को इस पर विस्तृत सुनवाई होगी. जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने मीडिया रिपोर्ट्स और कोर्ट को भेजी गयी चिट्ठियों के हवाले से मंगलवार को खुद मामले पर संज्ञान लिया है.

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कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार बताये कि अभी तक प्रवासी मजदूरों के लिए क्या-क्या कदम उठाये गये हैं. अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी तब तक केंद्र सरकार इस मामले में उठाए गए कदम के बारे में अवगत कराएं साथ ही सॉलिसिटर जनरल कोर्ट में मौजूद रहें

सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताते हुए कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति से उबारने के लिए प्रभावकारी ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमआर शाह ने दो पन्ने के अपने आदेश में कहा है कि लगातार मीडिया और न्यूजपेपर की रिपोर्ट उन्होंने देखी है और रिपोर्ट बताती है कि प्रवासी मजदूरों की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, ये मजदूर लंबी दूरियां पैदल तय कर रहे हैं तो कोई साइकिल से ये दूरी तय कर रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोग जहां फंसे हैं उन्हें वहां खाना नहीं मिल रहा है. प्रशासन से शिकायत के बाद भी उन्हें सुविधा नहीं मिल पा रही है. कोर्ट ने कहा कि समाज के इस वर्ग को इस परेशानी की घड़ी में सहायता की जरूरत है. भारत सरकार और राज्य सरकारें इसको लेकर कदम उठायें.

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