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लेबर कमिश्नर संग श्रमिक संगठनों और प्रबंधन की वार्ता बेनतीजा, एचईसी में हड़ताल जारी

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Ranchi : एचईसी में छठे दिन भी हड़ताल जारी है. अब तो कर्मचारियों के साथ अधिकारी भी हड़ताल में शामिल हो गये हैं. एचईसी के हालत को देखते हुए लेबर कमिश्नर ने श्रमिक संगठनों और प्रबंधन के साथ बैठक की, लेकिन बैठक बेनतीजा निकली. श्रमिक संगठनों का कहना है कि बैठक संतोषजनक नहीं रही. प्रबंधन की तरफ से एक माह का वेतन दिसंबर महीने में देने की बात कही गयी जबकि सात महीने से वेतन नहीं मिला है. वार्ता में एचईसी के 8 यूनियन के पदाधिकारी और निगम प्रबंधन की तरफ से दीपक दुबे और प्रशांत शामिल हुए.

लगातार छह दिनों से हड़ताल के कारण कंपनी को लगभग तीन करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. साथ ही करोड़ों रुपये के कार्यादेश हाथ से जाने की आशंका है.

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छह दिनों से चल रहा है आंदोलन

मालूम हो कि इन दिनों एचईसी संकट के दौर से गुजर रहा है. पिछले छह दिनों से यहां पर काम ठप है. कर्मचारी लगातार यहां प्रदर्शन कर रहे हैं. सात माह से बकाया वेतन भुगतान की मांग कर रहे हैं. श्रमिक संघ व प्रबंधन की वार्ता सोमवार को बेनतीजा रही थी. सीआइएसएफ ने प्लांट से कर्मियों को बाहर नहीं निकलने दिया था. कर्मियों संग पदाधिकारी भी यहां आंदोलन पर उतर आये हैं.

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हेवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन साल 1963 में स्थापना के बाद से कई इतिहास रच चुका है. लेकिन आज स्थिति इतनी ख़राब है कि कर्मियों को सात महीने से वेतन नहीं दे पा रहा है.

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एचईसी की छवि पर पड़ रहा नकारात्मक असर

हड़ताल रहने के कारण एचईसी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा है. उत्पादन में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है. यही हाल कुछ दिन और रहा तो एचईसी को 1800 करोड़ रुपये का वर्कआर्डर पूरा करना मुश्किल होगा. इस हालात में कई कंपनियां अपना वर्क आर्डर को वापस ले लेंगी. वहीं, श्रमिक संघ ने प्रबंधन से वार्ता करने का प्रयास किया, मगर वार्ता से कुछ निष्कर्ष नहीं निकल सका.

जानकारी के अनुसार कंपनी वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है. ऐसे में वर्कआर्डर के लिए पूंजी की दिक्कत के साथ-साथ कर्मचारियों के वेतन में परेशानी आ रही है.

प्रबंधन की ओर से केंद्र को पत्र लिख कर 870 करोड़ रुपये की मदद की गुहार लगायी गयी है. गौरतलब है कि स्थापना काल के बाद एचइसी ने कई कंपनियों को खड़ा करने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें बनायी हैं.

इसी वजह से इसे मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्री कहा जाता है. सैटेलाइट हो या लांच पैड का निर्माण, सबमें एचइसी ने अपनी भूमिका निभायी है.

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सत्तर के दशक से ही रही है कार्यशील पूंजी की कमी

कंपनी के सामने कार्यशील पूंजी की कमी सत्तर के दशक से ही रही है. यहां काम करनेवाले पुराने अधिकारी और कर्मचारी इस बात से अवगत हैं कि कर्मियों को भुगतान करने का लाला भी एचईसी के सामने रहा है. वर्तमान समस्या का समाधान एचईसी की कार्यप्रणाली में सुधार करने से होगा और इसकी संभावना फिलहाल कम ही दिख रही है.

निर्माण के बाद से ही गड़बडिय़ों का शिकार बने एचईसी के सामने एक बड़ी समस्या नियमित अधिकारी के नहीं रहने की भी रही है. कोई भी सीएमडी यहां लंबे समय तक कार्यरत नहीं रहा और कई वर्षों तक यह पद प्रभार में ही रहा है.

अब भी केंद्र सरकार इस विभाग को लेकर इतनी संवेदनीशील नहीं बन पायी है कि विश्वास का माहौल बन पाये और नियमित सीएमडी के नहीं होने से यहां के कर्मी लगातार समस्याओं को झेल रहे हैं. एक बार फिर देश की सबसे बड़ी कंपनियों को जीवन देनेवाली यह कंपनी आर्थिक कारणों से मुसीबत में है.

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