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लैब बन गया, कोबास मशीन लग गई, मगर 18 दिनों के बाद भी नहीं मिली कोरोना जांच रिपोर्ट

Ranchi: बेशक, कोरोना का कहर धीरे-धीरे कम हो रहा है, हालांकि, राजधानी रांची में लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं. पिछले दिनों की स्थिति को देखते हुए हेल्थ डिपार्टमेंट ने टेस्टिंग से लेकर इलाज तक की व्यवस्था को दुरुस्त किया है. नए लैब भी बनकर तैयार हो गए हैं, वहीं रिम्स में कोबास मशीन भी लगाई गई है, जिससे कि टेस्टिंग की रफ्तार धीमी न हो. लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण कोरोना फिर से लौटकर आ सकता है.

इस लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक व्यक्ति की सैंपल देने के 18 दिन बाद भी कोविड रिपोर्ट नहीं आई है. ऐसे में सैंपल देने वाला व्यक्ति संक्रमित हुआ तो न जाने कितने लोग इस बीमारी की चपेट में आ गए होंगे. अब तो लोग यही सवाल कर रहे हैं कि डीसी साहब ऐसे सैंपल कलेक्शन का क्या फायदा जब रिपोर्ट ही नहीं मिल रही है.

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हर दिन 37 हजार टेस्टिंग

कोविड का प्रसार रोकने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने टेस्टिंग को बढ़ाने का निर्देश दिया है. साथ ही फेस्टिव सीजन को देखते हुए बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर विशेष नजर रखने को कहा है. इसके बावजूद टेस्टिंग की रफ्तार धीमी पड़ गई है. वहीं सभी लोगों के सैंपल भी नहीं लिए जा रहे है. एक समय में जहां हर दिन 70 हजार सैंपल टेस्ट किए जा रहे थे. वह घटकर अभी 37 हजार पर पहुंच गया है.

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बाहर वालों की मॉनिटरिंग फेल

स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के अनुसार दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों की भी मॉनिटरिंग करते हुए उनकी टेस्टिंग कराना है. जिससे कि यह पता चल सके कि संबंधित व्यक्ति कोविड पॉजिटिव है या नहीं, लेकिन यहां तो 18 दिन बाद भी कोविड रिपोर्ट का पता नहीं है. वहीं वह व्यक्ति खुलेआम घूम रहा है और लोगों से मिलना भी जारी है. जिससे समझा जा सकता है कि शहर में ऐसे ही कई लोग है जो सैंपल देने के बाद खुले आम घूम रहे है. अगर यही हाल रहा तो कोरोना को वापस आने से कोई नहीं रोक सकता.

केस

एस कुमार 3 अक्टूबर को रांची से बाहर दूसरे स्टेट गए थे. उस दिन उनका सैंपल टेस्टिंग के लिए लिया गया. तीन दिन के बाद सैंपल रिम्स भेजने का मैसेज आया. इसके बाद अजतक उन्हें टेस्ट की कोई रिपोर्ट नहीं मिली. अब वह इस बात को लेकर परेशान है कि उनकी रिपोर्ट क्या आई.

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