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एसटी सूची में शामिल होने की मांग करते हैं, पर विश्व आदिवासी दिवस नहीं मनाते कुरमियों के अगुआ राजनेता

पूर्व सांसद शलेन्द्र महतो विश्व आदिवासी दिवस से दूर रहे

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Ranchi: खुद को आदिवासी समझने वाले झारखंड के कुरमी समाज से जुड़े कई संगठनों ने 9 अगस्‍त को विश्‍व आदिवासी दिवस मनाया, वहीं कुरमी समाज को आदिवासी सूची में शामिल होने के लिए राजनीतिक हुंकार भरने वाले राजनेता विश्‍व आदिवासी दिवस से दूर रहें.

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विश्व आदिवासी दिवस से दूर रहे पूर्व सांसद शैलेन्द्र महतो

एक ओर कुरमी विकास मोर्चा ने विश्‍व आदिवासी दिवस पर रांची के बिरसा मुंडा समाधि स्‍थल पर कार्यक्रम किया और उन्‍हें श्रद्धांजलि दी, वहीं दूसरी ओर कुरमी समाज को आदिवासी सूची में शामिल करने की लड़ाई लड़ने वाले अग्रणी नेता और पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो, विश्‍व आदिवासी दिवस के कार्यक्रमों से दूर रहे. फोन पर बात करने पर पूर्व सांसद ने न्‍यूजविंग को बताया कि वह विश्‍व आदिवासी दिवस के किसी कार्यक्रम में शरीक नहीं हुए हैं. उन्‍होंने बताया कि वह अभी मनु पर एक किताब लिखने में व्‍यस्‍त हैं और दिन भर घर में ही हैं.

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शेलेन्द्र महतो की अगुवाई में हुई थी महाजुटान रैली

बता दें कि जमशेदपुर के पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो की अगुआई में कुरमी समाज के लोगों को आदिवासी सूची में शामिल करने की लड़ाई लड़ी जाती रही है. 29 अप्रैल 2018 को इसी मांग के लिए उनके नेतृत्‍व में कुरमी महाजुटान रैली आयोजित की गई थी. इस कार्यक्रम में पूर्व सांसद आभा महतो, भाजपा सांसद विद्युतवरण महतो, पूर्व विधायक छत्रुराम महतो, खीरू महतो, लालचंद महतो, जलेश्‍वर महतो, विधायक जगन्‍नाथ महतो, जयप्रकाश भाई पटेल भी शामिल हुए थे. इसके लिए शैलेंद्र महतो की अगुवाई में 45 विधायकों के हस्‍ताक्षर वाली एक चिट्ठी भी मुख्‍यमंत्री को सौंपी गई थी.

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कुरमी विकास मोर्चा ने बिरसा मुंडा समाधि स्‍थल पर किया कार्यक्रम

विश्‍व आदिवासी दिवस के मौके पर कुरमी विकास मोर्चा की ओर से बिरसा मुंडा समाधि स्‍थल पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई. इस मौके पर कुरमी विकास मोर्चा के अध्‍यक्ष शीतल ओहदार ने कहा कि टोटेमिक कुरमी आदिकाल से आदिवासी हैं. जल, जंगल, जमीन और भाषा-संस्‍कृति ही आदिवासियों की पहचान है. अभी सबसे बड़ी चुनौती अपनी पहचान को सुरक्षित रखना है. सरकार के द्वारा कुरमियों की पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही है.

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