West Bengal

कोलकाता :  जेएनयू में हिंसा के खिलाफ कांग्रेस की छात्र परिषद का प्रदर्शन, कहा- हमें चाहिये आजादी

Kolkata :  दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में रविवार रात नकाबपोश लोगों द्वारा छात्रों पर किए गये हिंसक हमले के खिलाफ कोलकाता में भी छात्र संगठनों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की है. कांग्रेस की छात्र इकाई “छात्र परिषद” ने कोलकाता के बाटा मोड़ से एक धिक्कार रैली निकाली जो प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के पास जाकर खत्म हुई. यहां एकजुट होकर छात्रों ने नारेबाजी की.

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हमें चाहिये आजादी के लगे नारे

इस दौरान छात्र नारा लगा रहे थे – हमें क्या चाहिए आजादी, अमित शाह से आजादी, नरेंद्र मोदी से आजादी, ममता सरकार से आजादी,  तुम पुलिस बुलाओ आजादी, हम नहीं डरेंगे आजादी, हम नहीं झुकेंगे आजादी. इस विरोध प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में छात्र शामिल थे.

प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार के सामने इनकी नारेबाजी की वजह से कुछ देर के लिए यातायात को रोक देना पड़ा था. हालांकि बाद में पुलिस के समझाने बुझाने के बाद छात्र सड़क किनारे हो गए थे.

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जेएनयू में वामपंथी छात्रों ने किया  हमला : एबीवीपी

इधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रदेश सचिव सप्तर्षी सरकार ने दावा किया है कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार रात हुए हमले के पीछे वामपंथी छात्र संगठन के लोग हैं. सोमवार को उन्होंने कहा कि नए छात्रों का रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए वामपंथी छात्र संगठन के प्रतिनिधि जबरदस्ती कर रहे थे.

पिछले 2 दिनों में वामपंथी छात्रों ने कई जगह इंटरनेट  बंद कर दिया था ताकि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बंद हो जाये. कई जगहों पर वामपंथी छात्रों ने जबरदस्ती इस प्रक्रिया को बंद कराने की कोशिश की जिसका विरोध एबीवीपी के छात्रों ने किया. उसी समय वामपंथी छात्रों ने एबीवीपी के छात्रों पर हमला शुरू कर दिया. इस घटना में एबीवीपी के 25 कार्यकर्ता घायल हैं.

जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों पर लगाया आरोप

उन सभी को फिलहाल दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया है. सप्तर्षी ने दावा किया कि शुरुआत से ही वामपंथी छात्रों ने विश्वविद्यालय में इसी तरह की अराजक स्थिति बना कर रखी है. कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए सप्तर्षी ने कहा कि 31 छात्र-छात्राओं ने एसएफआई नेतृत्व पर दुष्कर्म सहित कई संगीन आरोप लगाकर सामूहिक इस्तीफा दिया है.

पहले भी इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं. इन सभी के पीछे वामपंथी छात्र जिम्मेवार हैं. उन्होंने मांग की कि ऐसे छात्रों को चिन्हित कर तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिए.

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