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जानें #JharkhandGovernment की आंगनबाड़ी बहनें राजभवन के सामने क्यों मांग रहीं भीख

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Ranchi : कोई केला बेच रही है, तो कोई भीक्षाटन कर रही है, तो कोई महिला मंडल से कर्ज लेकर आयी है. ये सब महिला एकजुट है, राजभवन के समक्ष. पिछले माह से राजभवन के समक्ष आंदोलनरत ये आंगनबाड़ी बहनों की कोई सुनने वाला नहीं. गुरूवार को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में ये महिलाएं शामिल भी होना चाहती थीं.  लेकिन जगह-जगह इन्हें रोक दिया गया.

वहीं राजभवन के समक्ष जाते ही दिखा कि कोई महिला केला बेच रही है, तो कोई भीक्षाटन कर रही है. क्योंकि अब इन महिलाओं के पास आने-जाने का भाड़ा तक नहीं है. तो वहीं कुछ महिलाओं ने कहा कि वे 16 अगस्त से अपने-अपने जिला में आंदोलनरत थी. और 21 अगस्त से राजभवन के समक्ष धरने पर हैं. सरकार ने लगभग छह माह से मानदेय नहीं दिया है. इस आंदोलन में गुरूवार को 16 परियोजना की आगंनबाड़ी बहनें एकजुट थीं.

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केला बेच कर भाड़ा जुटा रही एमलेन तोपनो

राजभवन के पास एक महिला को केला बेचते देखा गया. महिला खूंटी के मुरहू ब्लॉक की सहायिका है. बात के क्रम में एमलेन ने बताया कि अब उनके पास राजभवन तक आने-जाने के लिये पैसा नहीं है. ऐसे में अपने घर में उगे केले वे बेच रही हैं. गुरूवार ही पहला दिन है, जब एमलेन यहां केला बेच रही हैं.

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एमलेन ने बताया कि मुरहू से रांची जाने में एक तरफ से 60 रूपये लगते हैं. बस स्टैंड से या बिरसा चौक से राजभवन पहुंचने में ऑटो के अलग से पैसे लगते हैं. वहीं वापसी में भी 60 रूपये. ऐसे में अब इनके पास पैसा नहीं है.

इन्हें ये भी नहीं पता कि सहायिका के तौर पर काम करते हुए इन्हें कितना मानदेय मिलता है. बाद में महिलाओं ने बताया कि सहायिका को 2900 रूपये मिलते हैं. एमलेन ने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता कि पैसा खाता में आता है या नहीं.

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कई दिनों से भीख मांग रही मुन्नी और गुड्डी

यहीं पर हमें दो अन्य महिलाएं मिलीं जो भीक्षाटन करती दिखी. बात करने पर दोनों ने अपना नाम मुन्नी देवी और गुड्डी देवी बताया. दोनों खूंटी के तोरपा से हैं. दोनों महिलाओं ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से ये धरना स्थल पर भीक्षाटन कर रही हैं.

कुछ बहनों को प्रशासन की ओर से हिरासत में लिया गया है. कुछ महिलाएं पिछले कुछ दिनों तक सड़क किनारे भीक्षाटन कर रही थीं. लेकिन गुरूवार को दो महिलाओं को ही देखा गया. गुड्डी देवी ने बातचीत के दौरान बताया कि पैसे की इतनी कमी है कि कुछ दिनों पहले इन्होंने महिला मंडल से कुछ पैसे उधार लिए. लेकिन आने-जाने का भाड़ा अधिक है. इसके अलावा उपरी खर्च भी हो जाते हैं. ऐसे में अब भीक्षाटन ही एक उपाय है.

पिछली बार बुलाया स्वागत करने, इस बार हिरासत में लिया

अपनी बहनों के हिरासत में होने से आंगनबाड़ी बहनों में आक्रोश है. उनका कहना है कि पिछली बार प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में महिलाओं को स्वागत करने के लिए बुलाया गया था. महिलाओं ने जानकारी दी कि तब हर जिला से पांच-पांच आंगनबाड़ी बहनों को स्वागत के लिए बुलाया गया थी और महिलाएं गयी भी थीं.

लेकिन इस बार जब बहनें अपनी इच्छा से प्रधानमंत्री से मिलना चाहती थीं, तो प्रशासन ने उन्हें रोक दिया. इनमें सेविका, सहायिका और पोषण सखी थी. कुछ महिलाओं ने जानकारी दी कि प्रशासन की ओर से महिलाओं को धमकियां भी दी जा रही हैं.

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क्या हैं प्रमुख मांगें

आंगनबाड़ी कर्मियों का स्थायीकरण किया जाये, सरकार से जनवरी 2018 में हुए समझौते को लागू किया जाये, मानदेय के स्थान पर वेतन दिया जाये, न्यूनतम वेतन लागू किया जाये, समान काम के लिए समान वेतन दिया जाये, स्वास्थ्य बीमा समेत अन्य मांग है. राज्य में इनकी संख्या लगभग 88 हजार है.

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