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जानिये क्यों म्यूजिक डायरेक्टर राजेश रोशन को राम संपत को देने पड़े थे 2,00,00,000 रुपये

संगीत निर्देशक राजेश रोशन के जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने करियर का पहला गाना, मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक किस्सा सुनाऊं गाया था. यह गीत उन्होंने संगीत निर्देशक राजेश रोशन के संगीत पर गाया. ये गाना फिल्म नटवरलाल में अमिताभ पर ही फिल्माया गया था.

इस गाने को याद कर राजेश बताते हैं, ‘फिल्म नटवरलाल की शूटिंग के दौरान अमित जी ने मुझे बुलाकर रिहर्सल के लिए कहा, लेकिन उस दिन ये गाना फिल्म के निर्देशक को अच्छा नहीं लगा. फिर अगले दिन यह गाना बिना किसी रिहर्सल के रिकॉर्ड किया गया.

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प्रसिद्ध संगीतकार रोशन के पुत्र हैं

संगीतकार राजेश रोशन का जन्म 24 मई 1955 को हुआ. इनके पिता रोशनलाल नागरथ (रोशन) हिंदी सिनेमा के जाने माने संगीतकार थे. इनके पिता पंजाबी और मां बंगाली परिवार से थी. पिता की मौत के बाद इनके परिवार ने अपने नाम के आगे नागरथ की जगह रोशन लगाना शुरू कर दिया.

पिता के अलावा इनके बड़े भाई फिल्म निर्माता और निर्देशक राकेश रोशन और भतीजे ऋतिक रोशन भी हिंदी सिनेमा में बड़ी शख्सियत है. राजेश ने पिता के ही नक्शेकदम पर चलते हुए संगीत की दुनिया में बड़ा नाम कमाया.

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सरकारी नौकरी करने की ख्वाहिश थी

पिता और बड़े भाई की फिल्मों में सक्रियता के बावजूद राजेश रोशन इस ओर कदम नहीं रखना चाहते थे. वे सरकारी नौकरी करना चाहते थे. राजेश रोशन के अंदर संगीत का शौक न के बराबर था.

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प्राथमिक संगीत शिक्षा घर पर

बचपन में ही सिर से पिता का साया उठ जाने से राजेश की दुनिया उनकी मां तक ही सीमित रही. राजेश ने संगीत की प्राथमिक शिक्षा अपनी मां इरा रोशन से प्राप्त की. फैज अहमद खान के साथ संगीत रिहर्सल करते हुए इनकी मां इरा रोशन इन्हें भी संगीत की बारीकियां सिखाया करती. इसके बाद में इन्होंने हिंदी संगीत की मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से भी संगीत प्रशिक्षण लिया.

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महमूद ने दिया पहला मौका

राजेश रोशन को बतौर संगीतकार पहला मौका फिल्म कुंवारा बाप में अभिनेता और निर्देशक महमूद ने ‘सज रही गली’ गाने के लिए दिया था. इस गाने को राजेश ने 15 किन्नरों के साथ रिकॉर्ड किया. उन दिनों संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी हिंदी सिनेमा पर राज कर रही थी.

इसके बावजूद राजेश के संगीत को काफी पसंद किया गया. राजेश रोशन पहले ऐसे संगीतकार हैं जिन्होंने डेब्यू के साथ ही चार सुपरहिट फिल्में दी. कुंआरा बाप के बाद रिलीज हुईं ये फिल्में हैं, देश परदेस, मनपसंद और लूटमार.

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जूली ने जमा दिया रंग

70 और 80 के दशक में जब लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी हिंदी सिनेमा में पूरे शबाब पर थी उस समय किसी भी नए संगीतकार को हिंदी सिनेमा में स्थापित होना आसान नही था. 1975 में के एस सेतुमाधवन के निर्देशन में बनी फिल्म जूली ने राजेश को हिन्दी सिनेमा में पूरी तरह स्थापित कर दिया. इस फिल्म के गीत

दिल क्या करे जब किसी को’, ‘माई हार्ट इज बीटिंग’, ‘ये रातें नई पुरानी’ और ‘जूली आई लव यू’ जैसे गाने में रोशन का संगीत श्रोताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ. जूली की सफलता के बाद राजेश रोशन को शुरुआत में ही नई पहचान मिल गई.

इस फिल्म के संगीत की खूब तारीफ हुई और राजेश रोशन को इस साल के फिल्मफेयर बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर के खिताब से नवाजा गया.

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भाई राकेश रोशन के साथ जोड़ी

राजेश और राकेश रोशन दोनों भाइयों की जोड़ी ने हिंदी सिनेमा में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं. राजेश कहते हैं, ‘राकेश भाई को खुश रखना बहुत ही कठिन काम है. नियमों के मामले वह बहुत ही कठोर है. मेरे साथ ही नहीं अपने बेटे ऋतिक के साथ भी राकेश इसी तरह पेश आते है.‘ राजेश रोशन ने राकेश रोशन के निर्देशन में बनी खुदगर्ज से शुरू कर सभी फिल्मों में संगीत दिया है. इनकी सभी फिल्मों का संगीत हिट रहा है.

वहीं भतीजे ऋतिक रोशन की पहली फिल्म कहो ना प्यार है, कोई मिल गया, कृष, ‘कृष 3’ और ‘काबिल’ जैसी फिल्मों में भी हम राजेश रोशन का मधुर संगीत सुनने को मिला है.
काम किया है.

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मेरा संगीत धरती है तो पापा का संगीत आसमान
राजेश उन गिने चुने संगीतकरों में से है जिन्हें मोहम्मद रफी जैसे महान गायक के साथ काम करने का सौभाग्य प्राय हुआ. खास बात यह है की इनके पिता रोशन की भी मोहम्मद रफी के साथ खूब जमती थी और दोनों ने एकसाथ मिलकर कई खूबसूरत गीतों को अंजाम दिया था. अपने पिता के संगीत के बारे में राजेश कहते हैं, ‘अगर मेरा संगीत धरती है तो पापा का संगीत आसमान था, मेरे संगीत में सिर्फ लय है लेकिन पापा के संगीत में जान थी.’

लोकप्रिय गाने भी पसंद

दशकों से संगीत की दुनिया में जी रहे राजेश ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘मैं आधुनिक संगीत के मजे लेता रहता हूं. मैं आधुनिक संगीत शैली का आलोचक नहीं हूं. मैं आगे सड़क छाप गाने भी बनाना पसंद करूंगा. मै भी ‘ढिंग चिका’ जैसे गाने सुनता हूं. मेरा मानना है कि ‘शीला की जवानी’ और ‘मुन्नी बदनाम हुई’ जैसे गानों के अपने श्रोता है.’

बौद्धिक संपदा चोरी का मामला

साल 2008 में संगीतकार राम संपत ने राजेश रोशन पर साहित्यिक चोरी का मुकदमा दर्ज किया था. फिल्म निर्माता राकेश रोशन की फिल्म क्रेजी 4 के संगीत के लिए राम संपत ने राजेश रोशन पर बौद्धिक संपदा चोरी का मुकदमा दर्ज किया. इस मुकदमे में राजेश रोशन खुद को निर्दोष नहीं साबित कर सके और समझौते के तौर पर उन्हें राम संपत को दो करोड़ रुपये देने पड़े.

125 फिल्मों में संगीत दिया

राजेश रोशन ने अपने करियर में करीब 125 फिल्मों में संगीत दिया. जूली में उन्हें फिल्मफेयर अवार्ड मिला. यह उनका पहला फिल्मफेयर अवार्ड था. 2000 में रिलीज कहो ना प्यार है में भी राजेश को फिल्मफेयर अवार्ड मिला. इस फिल्म से उनके भतीजे रितिक रोशन ने बॉलीवुड में प्रवेश किया था. यह फिल्म काफी हिट रही थी.

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