न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

जानें ‘राफेल’ विवाद के कारण आखिर क्यों मजाक का पात्र बना छत्तीसगढ़ का एक गांव

699

Raipur: राफेल लड़ाकू विमान सौदा केंद्र सरकार के लिए परेशानी का सबब तो बना हुआ है. राहुल गांधी आये दिन राफेल डील को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हैं. मामला सुप्रीम कोर्ट भी जा पहुंचा है.

लेकिन इन सबके बीच राफेल डील छत्तीसगढ़ के एक गांव के लिए भी परेशानी का कारण बन गया है. जिसे इस सौदे के विवादों में घिरे होने के कारण मजाक का पात्र बनना पड़ रहा है.

इसे भी पढ़ेंः आजसू और जेएमएम के बीच ट्विटर वार: जेएएमएम के खिलाफ आजसू आक्रमक

hosp3

2000 परिवारों वाला गांव ‘राफेल’

दरअसल छत्तीसगढ़ के महासमुंद निर्वाचन छेत्र में एक छोटा सा गांव है, जिसका नाम ‘राफेल’ है. इस गांव में करीब 2000 परिवार रहते है. गांव में रहने वाले 83 वर्षीय धर्म सिंह ने ‘पीटीआई’ को फोन पर कहा, ‘‘अन्य गांवों के लोग हमारा मजाक उड़ाते हैं. वे कहते हैं कि यदि कांग्रेस सत्ता में आई तो हमारी जांच होगी. हम गांव का नाम बदलने का अनुरोध लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय भी गए थे, लेकिन हम उनसे मिल नहीं सके.’’

गांव की किसी को परवाह नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि राफेल विवाद के कारण यह नाम केवल नकारात्मक ध्यान आकर्षित करता है. लेकिन उनके गांव की कोई परवाह नहीं करता. राज्य के बाहर तो अधिकतर लोगों को गांव के बारे में पता भी नहीं है.

इसे भी पढ़ेंः हजारीबाग से गोपाल साहू को कांग्रेस ने बनाया प्रत्याशी

सिंह ने बताया कि गांव में पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी जरूरतें भी नहीं हैं. खेती बारिश पर आधारित है क्योंकि यहां सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है. सिंह को इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि गांव का नाम राफेल क्यों रखा गया और इसका क्या अर्थ है.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता, लेकिन गांव का दशकों से यह नाम है. वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन से भी पहले यह नाम है. मुझे इस नाम के पीछे का तर्क नहीं पता.’’

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार को फ्रांस के साथ हुए राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर निशाना बना रहे हैं.

उनका आरोप है कि हर विमान की कीमत तेजी से बढ़ी है और इस सौदे से उद्योगपति अनिल अंबानी को लाभ होगा. सरकार और अंबानी ने इन आरोपों से इनकार किया है.

इसे भी पढ़ेंः राहुल गांधी को SC का नोटिस, 22 अप्रैल तक मांगा जवाब

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

You might also like
%d bloggers like this: