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जानिये झारखंड के किस IPS अधिकारी ने हाई कोर्ट से अपने ही खिलाफ मांगी CBI जांच

  • हाई कोर्ट ने झारखंड सरकार को दिया शपथपत्र दायर करने का आदेश

Ranchi : झारखंड कैडर के 1990 बैच के एक आईपीएस अधिकारी ने अपने ही खिलाफ सीबीआई जांच कराने की मांग कर दी है. इस अधिकारी ने यह मांग झारखंड हाई कोर्ट से की है. अधिकारी ने कहा है कि उन्हें झारखंड पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है, इसलिए वह अपने ऊपर लगे आरोपों की जांच सीबीआई से कराना चाहते हैं. झारखंड हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले में झारखंड सरकार को शपथपत्र दायर करने का आदेश दिया है. सरकार को इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों और केस की मौजूदा स्थिति की जानकारी शपथपत्र के जरिये हाई कोर्ट को देनी है.

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यह है मामला

मामला 2016 के राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग के लगे आरोप का है. यह आरोप लगा था तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास, तत्कालीन मुख्यमंत्री के सलाहकार अजय कुमार और सीआईडी स्पेशल ब्रांच के तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता पर. इसी मामले में आरोपी आईपीएस अधिकारी और सीआईडी स्पेशल ब्रांच के तत्कालीन एडीजी अनुराग गुप्ता ने झारखंड हाई कोर्ट से मांग की है कि उनपर लगे हॉर्स ट्रेडिंग की जांच सीबीआई से करायी जाये.

11 महीने से निलंबित चल रहे हैं अनुराग गुप्ता

दरअसल, हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप में अनुराग गुप्ता के खिलाफ रांची के जगन्नाथपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज है. वहीं, पिछले लगभग 11 महीने से वह निलंबित चल रहे हैं. 14 फरवरी 2020 को हेमंत सोरेन सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था.

अब अनुराग गुप्ता ने झारखंड हाई कोर्ट में आवेदन देकर जगन्नाथपुर थाना में अपने ऊपर दर्ज प्राथमिकी और सरकार के उनके निलंबन से जुड़े आदेश को चुनौती दी है. उन्होंने अपने ही खिलाफ सीबीआई से जांच कराने का आग्रह किया है.

उनका कहना है कि इस मामले में झारखंड पुलिस के अनुसंधान से उन्हें न्याय की उम्मीद नहीं है. अनुराग गुप्ता के आवेदन के आधार पर झारखंड हाई कोर्ट ने झारखंड सरकार को इस केस से जुड़े सभी तथ्यों और केस की मौजूदा स्थिति से शपथपत्र के जरिये कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है.

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राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के लिए लालच देने और धमकाने का आरोप

आईपीएस अधिकारी अनुराग गुप्ता के खिलाफ राज्यसभा चुनाव 2016 में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के लिए बड़कागांव की तत्कालीन कांग्रेस विधायक निर्मला देवी को पैसों का लालच देने और उनके पति पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को धमकाने का आरोप है.

भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड विकास मोर्चा की शिकायत पर इसकी जांच करायी थी. आयोग ने प्रथम दृष्टया आरोप को सही पाते हुए उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था.

वोट देने के एवज में पांच करोड़ रुपये की पेशकश करने का लगा था आरोप

इस मामले में जगन्नाथपुर थाना में दर्ज प्राथमिकी की जांच के दौरान बड़कागांव की तत्कालीन विधायक निर्मला देवी ने अपना बयान भी दर्ज कराया था.

इसमें उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास, तत्कालीन एडीजी विशेष शाखा अनुराग गुप्ता, तत्कालीन मुख्यमंत्री के सलाहकार अजय कुमार पर राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट देने के एवज में पांच करोड़ रुपये की पेशकश करने का आरोप लगाया था. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि आरोपियों ने उनपर भाजपा में शामिल होने का भी दबाव बनाया था.

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