JharkhandLead NewsNationalWorld

जानिए, देश में कहां बन रहा है दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल

Uday chandra

New Delhi: मुगल बादशाह जहांगीर ने जब पहली बार कश्मीर को देखा था, तो यहां के खूबसूरत नज़ारों को देखकर अनायास उनके मुंह से यही निकला था कि ‘गर फिरदौस बररुए जमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त, हमीं अस्त’. फारसी में कहे गये इस चर्चित वाक्य का अर्थ है कि अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यहीं है. जी हां, कश्मीर की खूबसूरती हमेशा से देश-दुनिया के लोगों को लुभाती रही है. इसका अनूठा सौंदर्य लोगों को दीवाना बनाता रहा है.

इसे भी पढ़ें :जानिये क्यों पैसेंजर ट्रेन से हथियारों का जखीरा ले जा रही थी महिला, पुलिस ने किया गिरफ्तार

और इसी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है जम्मू-कश्मीर के चेनाब नदी पर बन रहा दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल. रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज अपने ट्विटर पर ब्रिज की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘भारतीय रेलवे चिनाब ब्रिज के स्टील आर्क के साथ एक और कार्तिमान रचने के लिए अच्छी तरह से काम कर रहा है. यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है.’

इसे भी पढ़ें :वहशीपनः चाकू गोदकर पड़ोसन की हत्या की और कलेजा भूनकर परोस दिया खाने

प्रधानमंत्री कार्यालय और रेलवे बोर्ड की संयुक्त निगरानी में इन दिनों एफिल टॉवर से भी 35 मीटर ऊंचे इस पुल का निर्माण कार्य जोर-शोर से चल रहा है. मालूम हो कि फ्रांस की राजधानी पेरिस में बने एफिल टॉवर की ऊंचाई 324 मीटर है, जबकि चेनाब नदी पर बन रहे इस पुल की ऊंचाई समुद्र तल से 359 मीटर है. यानी कुतुबमीनार से भी पांच गुणा ऊंचा. इतना ऊंचा कि जिसमें सौ तल्लों वाली एक लंबी इमारत समा जाए. जब यह पुल बनकर तैयार होगा, तो यह सबसे ऊंचा रेल ब्रिज बनाने के चीन के एकाधिकार को भी तोड़ देगा.

इस समय दुनिया में जो सबसे ऊंचे 15 रेलवे पुल हैं, वे सबके सब चीन में ही हैं. फिलहाल दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल नाजिहे रेलवे ब्रिज है, जो चीन के गीझू प्रांत में बेइपान नदी पर स्थित है. इसकी ऊंचाई 310 मीटर है. दूसरा सबसे ऊंचा पुल क्विंगलोंग है और इसकी ऊंचाई 295 मीटर है. तीसरे नंबर पर भी चीन के बेइपान नदी पर बना शुईबाई रेल पुल है, जिसकी ऊंचाई 275 मीटर है. लेकिन भारत में चेनाब नदी पर बन रहे पुल के पूरा होने के बाद दुनिया के सबसे बड़े रेलवे पुल का खिताब चीन से छिन जाएगा.

सबसे बड़े रेल पुल को बनाने में जी-जान से जुटे हैं इंजीनियर 

फिलहाल, हज़ारों की तादाद में भारतीय इंजीनियर हिमालय पर्वत श्रृंखला में दुनिया के सबसे बड़े रेल पुल को बनाने में जी-जान से जुटे हैं. दुर्गम रास्ते और दुरुह परिस्थितियों की चुनौतियों का सामना करते हुए वे देश को जल्द से जल्द एक ऐसा तोहफा देने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका इंतज़ार लोगों द्वारा लंबे समय से किया जा रहा है. पूरी उम्मीद है कि अगले साल तक यह पुल बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा.

दिसंबर, 2022 तक यह पुल कश्मीर घाटी को पहली बार रेल के जरिये शेष भारत से भी जोड़ देगा. चेनाब नदी पर बन रहा 1315 मीटर लंबा यह पुल जम्मू के कटरा स्थित बक्कल को कश्मीर के श्रीनगर स्थित कौड़ी से तो जोड़ेगा ही, यह पुल कश्मीर घाटी को देश के दूसरे हिस्सों से भी जोड़ने का काम करेगा. गौरतलब है कि कश्मीर घाटी के खूबसूरत पहाड़ी इलाके रेल सेवाओं के अभाव में अब तक कमोबेश देश के अन्य इलाकों से कटे हुए हैं.

हालांकि कश्मीर घाटी में रेल लाइन बिछाने पर विचार 1892 में तत्कालीन नरेश महाराजा प्रताप सिंह ने भी किया था ताकि जम्मू को श्रीनगर से जोड़ा जा सके, लेकिन 1925 में उनकी मृत्यु के बाद यह विचार आगे नहीं बढ़ पाया. लंबे समय के बाद इस दिशा में पहल हुई वर्ष 2002 में. इसी साल चेनाब नदी पर पुल का निर्माण शुरू हुआ, जब केंद्र में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार काबिज थी. लेकिन सुरक्षा और अन्य कारणों से 2008 में पुल का निर्माण कार्य रोक दिया गया. साल 2010 में इसे फिर से शुरू किया गया, जो थोड़े-बहुत व्यवधानों के साथ अभी तक जारी है.

इसे भी पढ़ें :बंगाल समेत 5 राज्यों में आज चुनाव का बिगुल !

कहा जा रहा है कि वर्ष 2021 में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा. हालांकि इस पुल का निर्माण कार्य पहले कई बार समयसीमा को पूरा नहीं कर पाया है, लेकिन पिछले वर्षों में नेशनल प्रोजेक्ट घोषित हो चुके इस काम में जैसी तेजी देखी जा रही है उससे उम्मीद बंधी है कि अगले साल तक यह पूरा हो जाएगा. परियोजना का क्रियान्वयन कर रहे कोंकण रेलवे के अधिकारियों का भी कहना है कि नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ और रेलवे बोर्ड द्वारा पुल निर्माण की 24 घंटे प्रत्यक्ष निगरानी की जा रही है. ऐसे में पूरी उम्मीद है कि इस बार डेडलाइन मिस नहीं होगी और काम समय पर पूरा हो जाएगा. इस रेल ब्रिज का 85 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो भी चुका है.

यह पुल कश्मीर घाटी को बाकी देश से जोड़ने वाले कटरा-बनिहाल रेल लिंक का हिस्सा है. इसके तहत 111 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जा रही है, जिसमें 97 किलोमीटर रेल लाइन सुरंगों से होकर गुजरेगी. 10 किलोमीटर की रेल लाइन पुलों से होकर गुजरेगी. इस रेल लाइन पर कुल 27 सुरंगें और 37 रेलवे ब्रिज होंगे. इसमें 26 बड़े और 11 छोटे पुल हैं. 37 पुलों की कुल लंबाई 7 किलोमीटर है. सबसे लंबा टनल टी 49 है जिसकी कुल लंबाई 12.75 किलोमीटर की है. चेनाब नदी पर बन रहे दुनिया के सबसे बड़े रेल पुल के पूरा हो जाने और इस पर रेलों का परिचालन शुरू होने से यहां के स्थानीय बाशिंदों को काफी फायदा पहुंचेगा.

इसे भी पढ़ें :सर्दी को कहें बाय-बाय, एक मार्च तक लगातार चढ़ेगा पारा

उनकी यात्रा का समय इससे काफी कम हो जाएगा. पुल से लगा एक फुटपाथ और साइकिल मार्ग भी बनाया जाएगा. गौरतलब है कि यह पुल कोंकण रेलवे की परियोजना का हिस्सा है जो बारामूला को उधमपुर, कटरा, काजीगुंड के रास्ते जम्मू से जोड़ता है. इससे बारामूला से जम्मू का सफर 13 घंटे से घटकर 6.5 घंटे रह जाएगा. सामरिक दृष्टिकोण से भी इसे भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होने की बात कही जा रही है. इस पुल के बन जाने से सैनिक और सैन्य साजोसामान को भेजना भी आसान होगा.

जम्मू-कश्मीर के रियासी में चेनाब नदी पर आर्च शेप यानी उलटा चांद की शक्ल में बन रहे इस पुल के निर्माण में लगभग 1500 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है. हालांकि शुरुआत में इसकी लागत 1100 करोड़ रुपये रखी गई थी, लेकिन समय के साथ और ज़रूरत को देखते हुए इस पुल के निर्माण पर होने वाला खर्च बढ़ता गया. इस रेलवे पुल में चेनाब नदी के दोनों छोरों को जोड़ने के लिए जो स्टील का आर्च बनाया जा रहा है, उसमें करीब 25000 टन इस्पात का इस्तेमाल किया गया है. यह पुल लोहे के 17 फौलादी खंभों पर खड़ा होगा. जर्मनी की एक कंपनी ने इस पुल के आर्च की डिजाइनिंग की है.

हवा की रफ़्तार को नापने के लिए इसमें सेंसर भी होगा

इस पुल को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह 266 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली बेहद तेज हवा को भी झेल सकता है. हवा की रफ़्तार को नापने के लिए इसमें सेंसर लगाया जाएगा. हवा की रफ़्तार 90 किलोमीटर होते ही सिग्नल रेड हो जाएंगे और पुल पर रेल का आना-जाना रोक दिया जाएगा. इतना ही नहीं, आतंकी गतिविधयों और तोड़फोड़ की घटनाओं से बचाने के लिए पुल को इतना मजबूत बनाया जा रहा है कि 40 किलोग्राम विस्फोटक का धमाका भी इसका बाल बांका नहीं कर पाएगा. साथ ही रिक्टर स्केल पर 8 से ज्Þयादा तीव्रता वाले भूकंप भी इसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे.

इंजीनियरों ने इसकी उम्र 120 साल बतायी है

इस पुल के निर्माण से पहले कोंकण रेलवे के इंजीनियरों ने हर उन चुनौतियों का अध्ययन कर पुख्ता उपाय करने की कोशिश की है जिससे इस पुल पर रेल परिचालन में किसी प्रकार की दिक्कत पेश न आये. यात्रा सुखद और सुरक्षित हो और पुल को भी किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे. तभी इसकी उम्र 120 साल बतायी गई है. स्वाभाविक है कि चेनाब नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा रेल पुल बनाना अपने आप में एक बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है.

इसे भी पढ़ें :जानिये अमेरिकी फाइटर जेट्स ने सीरिया में क्यों बरसाये बम, ईरान समर्थक 17 लड़ाके मारे गये

इसकी वजह यह है कि हिमालयन रेंज होने के कारण यहां का मौसम पल भर में करवट बदल लेता है. मौसम के साथ-साथ यह क्षेत्र भूकंप के दृष्टिकोण से भी संवेदनशील है. बड़े भूकंप यहां आम बात हैं. इसे देखते हुए ही इस योजना को मूर्त स्वरूप देने से पहले आईआईटी रुड़की से संपर्क साधा गया ताकि इससे बचाव का उपाय किया जा सके. नदी का प्रवाह रोके बिना पुल बनाना भी एक बड़ी चुनौती थी. इसे देखते हुए पुल की नींव का काम करने से पहले मुश्किल इलाका होने के कारण एप्रोच रोड बनानी पड़ी.

कहा जा सकता है कि चेनाब नदी पर बन रहा दुनिया का सबसे बड़ा रेल पुल हिंदुस्तान के हौसले का एक नमूना है, भारत की तकनीकी क्षमता का एक शानदार उदाहरण. जम्मू-कश्मीर को विकास के रास्ते पर लाने के केंद्र सरकार के प्रण की यह तस्वीर हकीकत के धरातल पर उतरने को तैयार है. उम्मीद है कि अगले साल तक इस पुल का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और यह कश्मीर के कायाकल्प की नई इबारत लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा.

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: