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रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी की अंतरिम जमानत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को जानिए…

अर्नब  की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज करते समय हाई कोर्ट ने इस तथ्य की अनदेखी की कि FIR में दिये गये तथ्यों के अनुसार प्रथम दृष्टया अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता.   

 NewDelhi :  अर्नब गोस्वामी केस में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट की आलोचना करते हुए साफ किया है कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को दी गयी अंतरिम जमानत तब तक बरकरार रहेगी, जब तक बॉम्बे हाई कोर्ट FIR रद्द करने की उनकी मांग पर फैसला नहीं ले लेता. साथ ही स्पष्ट किया कि अगर हाई कोर्ट उनके खिलाफ फैसला देता है, तो भी अर्नब को इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए चार सप्ताह का समय मिलेगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट की आलोचना  की

इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बॉम्बे हाई कोर्ट की आलोचना भी की. कहा, अर्नब  की अंतरिम जमानत अर्जी खारिज करते समय हाई कोर्ट ने इस तथ्य की अनदेखी की कि FIR में दिये गये तथ्यों के अनुसार प्रथम दृष्टया अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता.

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सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को बेल दिये जाने के कारण स्पष्ट किये

बता दें कि अर्नब गोस्वामी पर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले(वर्ष 2018 ) में अग्रिम जमानत देने के15 दिनों बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को बेल दिये जाने के कारण स्पष्ट किये. कोर्ट ने  11 नवंबर को अर्नब गोस्वामी को आत्महत्या के मामले में दी गयी अंतरिम जमानत के तथ्यों पर विस्तृत आदेश दिये. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दर्ज FIR का प्रथम दृष्टया मूल्यांकन उनके खिलाफ आरोप स्थापित नहीं करता है.

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निचली अदालतें राज्य द्वारा आपराधिक कानून का दुरुपयोग करने के खिलाफ जागरूक रहें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय, निचली अदालतों को राज्य द्वारा आपराधिक कानून का दुरुपयोग करने के खिलाफ जागरुक रहना चाहिए.  कहा कि SC, HC, जिला न्यायपालिका को नागरिकों के चयनात्मक उत्पीड़न के लिए आपराधिक कानून नहीं बनना चाहिए. अर्नब मामले को लेकर   सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस अदालत के दरवाजे ऐसे नागरिकों के लिए बंद नहीं किये जा सकते हैं, जिसके खिलाफ प्रथम दृष्टया राज्य द्वारा अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने के संकेत हों.

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