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जानें वो वजहें, जो JPSC MAINS परीक्षा स्थगित करने की मांग को ठहराती हैं जायज

जेपीएससी छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा सोमवार 28 जनवरी से आयोजित की जानी है

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Kumar Gourav 

Ranchi : जेपीएससी छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा सोमवार 28 जनवरी से आयोजित की जानी है. जेपीएससी के अभ्यर्थियों के साथ-साथ सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने भी मुख्य परीक्षा स्थगित करने को लेकर जोरदार ठंग से आवाज उठायी है. छात्र अभी भी जेपीएससी  मुख्य परीक्षा स्थगित करने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं. परीक्षा स्थगित करने को लेकर मामला कोर्ट में भी है. परीक्षा प्रारंभ होने वाली तिथि को ही सुनवाई   होनी है. छात्रों का कहना है कि त्रुटियों से भरी इस छठी सिविल सेवा परीक्षा स्थगित कर देनी चाहिए. हम छात्रों के उन तर्कों को आपके सामने रख रहे हैं जो जेपीएससी छठी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को स्थगित करने की मांग को जायज करार देते हैं.

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विज्ञापन में जारी नियमावली का पालन नहीं होना

छठी जेपीएससी की परीक्षा के लिए जो विज्ञापन निकाला गया था उसमें ये स्पष्ट था कि पीटी परीक्षा का रिजल्ट 15 गुणा जारी किया जायेगा. पर रिजल्ट अभी तक तीन बार जारी किया जा चुका है. जिससे रिजल्ट बढ़कर 106 गुणा हो चुका है. छा़त्र इसका पूरा विरोध कर रहे हैं. छात्रों के परीक्षा स्थगित करने के मांग का यह प्रमुख कारण है. छात्रों का कहना है कि नियमसंगत परीक्षा प्रक्रिया के बीच में ही नियमावली में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.

बाउरी कमेटी की अनुशंसा का पालन नहीं होना

जेपीएससी पीटी परीक्षा तब विवादों में घिर गयी जब आयोग ने पीटी परीक्षा में आरक्षण नहीं दिया. रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों ने खुद बवाल किया. विधानसभा में भी विधायकों ने इस बात का विरोध किया. जिसके बाद मंत्री अमर कुमार बाउरी की अध्यक्षता में समिति बनाकर अन्य राज्यों के प्रावधान का रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया. समिति ने रिर्पोट सौंपी भी. अनुशंसा में कहा गया कि सभी राज्यों के सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षण का प्रावधान है, यूपीएससी में भी पीटी परीक्षा में आरक्षण दिया जाता है इसलिए यहां भी दिया जाना चाहिए. बाउरी कमिटी की उस अनुशंसा को दरकिनार कर सरकार ने रिजल्ट को 106 गुणा कर दिया.

जेपीएससी सचिव के बेटे का परीक्षार्थी होने के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया का भाग होना सवालिया निशान

जेपीएससी ने एडमिट कार्ड जारी होने के बाद जेपीएससी सचिव को बदला है. अभी रणेंद्र सिंह को जेपीएससी सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. इससे पहले जगजीत सिंह जेपीएससी सचिव थे. जिनका बेटा इस परीक्षा में सम्मिलित हो रहा है. इस स्थिति में उनके सचिव के साथ साथ परीक्षा नियंत्रक होना कितना औचित्यपूर्ण है ये तो समझा ही जा सकता है.

पारदर्शिता का अभाव

ये बातें चल रहीं है कि छात्र अभ्यर्थियों की बढ़ी संख्या से डरे हुए हैं इसलिए परीक्षा स्थगित करने की मांग कर रहे हैं. अभ्यर्थियों की माने तो इसकी वजह अयोग की लचर व्यवस्था और पारदर्शिता का भाव है. छात्रों का कहना है कि कोई भी छात्र परीक्षा में साल भर स्टे लगाने में नहीं लगा रहता है. बल्कि अन्य परीक्षाओं की भी तैयारी करता है. परीक्षा की तैयारी तीन महीने पहले से ही की जाती है पर परीक्षा होने के तारीख की घोषणा महज दस दिन पहले ही की जाती है. इससे पहले संभावित तिथि की घोषणा की गयी थी. मुख्य परीक्षा 2018 के 29 जनवरी से निर्धारित थी पर बाद में उसे 25 जनवरी 2018 को स्थगित कर दिया गया था.

परीक्षा देने वालों ने ही की अपने फार्म की स्क्रूटनी

53 में से 18 ऐसे प्रशाखा पदाधिकारियों ने मेंस के फार्म की स्क्रूटनी की, जो खुद परीक्षा प्रक्रिया में भाग ले रहे हैं. सवाल  उठता है कि जो परीक्षार्थी खुद परीक्षा में भाग ले रहे हैं वो कैसे परीक्षा की प्रक्रिया का भाग हो सकते हैं. क्या इससे आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़ा नहीं होता. कई ऐसे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने अपने फार्म की स्क्रूटनी खुद की है

जारी नहीं की फार्म भरने वालों की रिजेक्ट लिस्ट

अगर फार्म की स्क्रूटनी सही से की गयी तो फिर छात्रों की रिजेक्शन लिस्ट जारी क्यों नहीं की गयी. आमतौर पर हर बार आयोग या परीक्षा लेने वाली कोई भी संस्था फार्म भराने के बाद स्क्रूटनी करती है. और उसके बाद छात्रों की रिजेक्शन लिस्ट भी जारी करती है. लिस्ट जारी करने के बाद छात्रो को चैलेंज करने का समय भी दिया जाता है, जो आयोग ने नहीं दिया ना ही लिस्ट जारी की

सब्जेक्ट का हेरफेर

छात्रों को जो मेंस परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी किये गये हैं. उसमें भी भारी गड़बड़ी है. छात्रों के विषयों को भी बदल दिया गया है. जिन छात्रों ने अपने विषय में संस्कृत का चयन किया था. उसके स्थान पर संथाली कर दिया है. संथाली वाले छात्रों के विषय को बदलकर खोरठा कर दिया गया है. हालांकि आज तक त्रुटि में सुधार किया जा रहा है. पर सवाल ये उठता है कि जो प्रश्न पत्र बना होगा वो तो आज छपेगा नहीं या फिर वैसा ही छपा होगा जिसके आधार पर एडमिट कार्ड जारी किये गये. ऐसे में सवाल उठता है कि सुधार के बाद क्या प्रश्नपत्र ट्रेजरी से निकाल कर फोटो कापी कराया जाएगा. ऐसे में क्या प्रश्नपत्र लीक होने की संभावना नहीं बढ़ेगी

कापी जांचने  के लिए हर विषय में चाहिए होंगे 60 से अधिक शिक्षक

जेपीएससी के लिए मुख्य परीक्षा की कॉपी चेक करना बड़ी चुनौती होगी. पीटी परीक्षा में जितने छात्रों को पास किया गया था. उस हिसाब से मुख्य परीक्षा के लिए 2 लाख 7 हजार कॉपी चेक करनी होगी. हर विषय पर 60 से अधिक टीचर की जरुरत होगी अगर ऐसा हुआ तो मूल्यांकन के तहत अंक देने में समानता नहीं रहेगी. इससे मूल्यांकन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़ा हो सकता है. बता दें कि राज्य सरकार के पास किसी भी रिजनल लैंग्वेज के प्रोफेसरों की संख्या दहाई के आंकड़ों में नहीं है. वैसे मेंस की परीक्षा के लिए मात्र 27 हजार 500 लोगों ने ही आवेदन किया था. जिससे अब कॉपियों की संख्या में थोड़ी कमी आएगी.

पहले कहा,  फार्म भरा नहीं, बाद में जारी किया एडमिट कार्ड

सुमित विज को पहले पांच दिन ये कहते हुए दौड़ाया और कहा कि आपने फार्म ही नहीं भरा है. उसके बाद 25 जनवरी को अचानक से एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया.. सुमित विज जैसे कई ऐसे छात्र हैं जो अभी भी अपने एडमिट कार्ड लेने को परेशान हैं. जेपीएससी कार्यलय में स्क्रूटनी करने वालों ने फार्म अपने लॅाकर में रख लिये थे. बाद में आयोग ने अपने हाथ में सभी का फार्म ले लिये हैं.

पीटी में पास छात्रों को भी आयोग बता दे रहा फेल

नवनीत रंजन नाम के एक छात्र को आयोग ने कह दिया कि आप पीटी परीक्षा में पास ही नहीं हैं. जबकि नवनीत के पास पीटी परीक्षा में पास होने के प्रमाण भी है. हुआ ऐसा कि आयोग ने नवनीत रंजन को जो रजिस्ट्रेशन नंबर दिया है, और जो नंबर उनके पीटी परीक्षा के लिए जारी एडमिट कार्ड में है वो भिन्न है. नवनीत एडमिट कार्ड में दिये नंबर से पास हैं और उसी नंबर से मेंस का फार्म भी भरा है. पर आयोग के हिसाब से नवनीत पीटी परीक्षा में पास ही नहीं हैं. नवनीत के अलावा कई ऐसे छात्र हैं जो ऐसे ही समस्या का सामना कर रहे हैं. जिन्हें आयोग की गलती के कारण परीक्षा में भाग लेने नहीं दिया जायेगा.

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