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जानिए, मारवाड़ी कॉलेज की छात्राएं कैंपस में किन कारणों से हो रहीं शर्मिंदा

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हाल मारवाड़ी महिला कॉलेज का- शौचालय में दरवाजा तक नहीं
कॉलेज का जेनरेटर कभी चलता ही नहीं
नए भवन के निमार्ण के लिए तोड़ी गई लाइब्रेरी, छात्राओं को हो रही परेशानी

Ranchi: बेटियां पढ़ेंगी, शिक्षित होंगी, मान बढ़ाएंगी. ऐसी कितनी घोषणाएं सरकार ने समय-समय पर की. लेकिन बेटियों के शिक्षित होने के लिए उनका सिर्फ स्कूल-कॉलेज तक पहुंच जाना काफी नहीं है.

उसके लिए कुछ संसाधनों की भी जरूरत होती है. बच्चियों के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं भी आवश्यक है. कुछ इसी तरह की बुनियादी संसाधनों की कमी से रोजाना दो-चार होती हैं, राजधानी स्थित मारवाड़ी महिला कॉलेज की छात्राएं.

न्यूज विंग ने मारवाड़ी कॉलेज का भ्रमण किया. इस दौरान कॉलेज में कई कमियां पायी गयी. वहीं कुछ कमियां छात्राओं से बातचीत करने के बाद सामने आयी. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राँची महानगर की सह मंत्री और मारवाड़ी कॉलेज की छात्रा प्रगति दुबे ने जानकारी दी कुछ छात्राओं ने कहा कि कॉलेज का नये भवन का निमार्ण कराया जा रहा है.

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लेकिन पूर्व से कॉलेज भवन में लगभग 20 कमरे हैं. जहां कक्षाएं चलती है. जबकि छात्रों की संख्या सैकड़ों में है. ऐसे में कई बार परीक्षा के दौरान कक्षाएं स्थगित कर दी जाती हैं.

या तो क्लास की टाइमिंग बदल दी जाती है. ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है राज्य के सुदूर क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों की स्थिति क्या होगी.

शौचालय में दरवाजा तक नहीं

कॉलेज की स्थिति कुछ यूं है कि यहां शौचालय में दरवाजा तक नहीं लगा है. शौचालय के मुख्य द्वार के बाहर टूटा हुआ दरवाजा खड़ा दिखाई देता है. लेकिन कॉलेज प्रशासन की ओर से इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

छात्राओं ने बताया कि लंबे समय से शौचालय की स्थिति ऐसी है. कुछ ने कहा कि शौचालय में पानी तक नहीं आता. ऐसे कुछ छात्राएं ऐसी भी है जो शौचालय जाती भी नहीं.

शौचालयों को देखने से ही उसकी जीर्णशीर्ण हालत साफ झलकती हैं. कुछ तो टूट ही चुके हैं. यहां तक की कॉलेज के भवन में फर्श तक टूट चुकी है.

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लाइब्रेरी तोड़ दिया गया, जेनरेटर का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए नहीं

लगभग सात माह पूर्व परिसर में स्थित नये भवन के निमार्ण के लिए लाइब्रेरी को तोड़ दिया गया. वहीं कोई वैकल्पिक लाइब्रेरी की व्यवस्था छात्राओं के लिए नहीं की गई.

छात्राओं ने कहा कि लाइब्रेरी तोड़े जाने से कुछ छात्राओं को काफी परेशानी हो रही है. क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियां पढ़ने आती है. ऐसे में लाइब्रेरी से उन्हें किताब मिल जाने से आसानी होती है.

कॉलेज के पास अपना जेनरेटर भी है. लेकिन इसका इस्तेमाल कभी भी छात्राओं को पढ़ाने में नहीं किया जाता. छात्राओं ने बताया कि आंधी-बारिश के दौरान अंधेरा छा जाने पर भी कभी भी जेनरेटर से बिजली क्लासों को नहीं दी जाती. जबकि कक्षाएं ही स्थगित हो जाती है.

कोई लैब नहीं, बॉयज सेक्शन ले जाया जाता है छात्राओं को

कॉलेज में शुरू से ही अपना कोई लैब नहीं है. जबकि महिला प्रभाग में साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स तीनों विषयों की पढ़ाई होती है. जिनमें से कुछ विषयों में प्रैक्टिकल की जरूरत होती है.

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ऐसे में छात्राओं को प्रैक्टिकल करने के लिए बॉयज सेक्शन जाना पड़ता है. जबकि इस महिला प्रभाग में एक बड़ी संख्या में छात्राएं पढ़ती है.

कॉलेज में निमार्ण जारी है- प्राचार्य

इस संबध में प्राचार्य डॉ. एएन ओझा ने जानकारी दी कि कॉलेज के नए भवन का निमार्ण कार्य जारी है. जिसमें लैब से लेकर कॉलेज और छात्राओं के लिए सभी जरूरी संसाधन और सुविधाएं होंगी.

इसके पूर्व भी उच्च शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था, जिसके बाद झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रकशन कॉरपोरेशन की ओर से भवन निमार्ण कराया जा रहा है. वर्तमान में भी एक प्रस्ताव भेजा गया है. जिसके बाद अन्य निमार्ण कार्य किया जाएगा.

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