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जानिये, ड्रोन हमले से निपटने में कितना सक्षम है भारत

Uday Chandra

New Delhi: जम्मू एयर फोर्स स्टेशन पर ड्रोन हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. हमले के बाद भी क्षेत्र में लगातार ड्रोन के मंडराने की ख़बरें सामने आ रही है, लेकिन भारत इस खतरे से निपटने में सक्षम है और वो भी अपनी स्वदेशी तकनीक के दम पर. जी हां, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) का एंटी ड्रोन सिस्टम ऐसे खतरो को नाकाम करने में सक्षम है. डीआरडीओ द्वारा विकसित काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी सशस्त्र बलों को सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले छोटे ड्रोनों का तेजी से पता लगाने, उन्हें रोकने और खत्म करने की ताकत दे सकता है.

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इस सिस्टम का उपयोग गणतंत्र दिवस 2020, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम के दौरे, स्वतंत्रता दिवस 2020 और गणतंत्र दिवस 2021 के दौरान वीवीआईपी सुरक्षा के लिए किया जा चुका है.डीआरडीओ का एंटी ड्रोन सिस्टम ड्रोन हमले के खतरे से निपटने के लिए “सॉफ्ट किल” और “हार्ड किल” दोनों ऑप्शन उपलब्ध कराता है. इसमें पहला सिस्टम ड्रोन को जाम करता है, जबकि दूसरा लेजर-बेस्ड किल सिस्टम उन्हें खत्म कर सकता है.

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इस सिस्टम में एक रडार है जो 4 किमी दूर तक माइक्रो ड्रोन का पता लगाने के साथ 360-डिग्री कवरेज देता है. 2 किमी तक के माइक्रो ड्रोन का इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल / इन्फ्रारेड (EO/IR) सेंसर पता लगा सकते हैं. रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) डिटेक्टर 3 किमी तक इस तरह के किसी भी संचार का पता लगा सकती है.

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