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जानिये बॉलीवुड एक्टर आशीष विद्यार्थी को विद्यार्थी सरनेम कैसे मिला

जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : आशीष विद्यार्थी भारतीय सिनेमा के बेहतरीन अभिनेताओं में शुमार हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा ने उनकी प्रतिभा का समुचित इस्तेमाल अब तक नहीं किया है. उन्हें विलेन के रोल के लिए ही टाइप्ड कर दिया गया है.

ऐसे पड़ा नाम

आशीष ने विद्यार्थी सरनेम अपने पिता से लिया है. दरअसल उनके पिता गोविंद विद्यार्थी ने यह सरनेम पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर विद्यार्थी को श्रद्धांजलि देने के लिए रखा था. कहा जाता है कि गोविंद युवावस्था में अक्सर गणेश शंकर विद्यार्थी का रोल निभाया करते थे. किरदार निभाते-निभाते उनके मन में वैसा ही बनने की इच्छा जागी और उन्होंने अपने नाम के आगे विद्यार्थी सरनेम लगा लिया.

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पिता थिएटर आर्टिस्ट मां कथक डांसर

आशीष विद्यार्थी का जन्म 19 जून 1962 को नई दिल्ली हुआ था. उन्हें पिता का नाम गोविन्द विद्यार्थी है जोकि एक मलयाली थिएटर आर्टिस्ट हैं. उनकी माँ रीबा विद्यार्थी बंगाली परिवार से हैं वे कथक नृत्यांगना हैं.

शुरूआती पढ़ाई कुन्नूर में हुई

आशीष अपनी शुरूआती पढ़ाई कुन्नूर केरला से की. उसके बाद वह साल 1969 में वह दिल्ली आ गए. यहाँ आ कर उन्होंने अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई संपन्न की.उन्होंने अपने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज से संपन्न की है.

उन्होंने भारतीय विद्या भवन मेहता विद्यालय में एक्टिंग और ड्रमैटिक की बारीकियां सीखीं. आशीष का प्ले दयाशंकर की डायरी काफी लोकप्रिय रहा है. इसके उनके सबसे लंबे मोनो एक्ट के रूप में जाना जाता है.

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एक बार मरते मरते बचे

फिल्मों में करीब 182 बार मर चुके आशीष असल जिंदगी में एक बार मरते-मरते बचे थे. बात अक्टूबर 2014 की है. दुर्ग (छत्तीसगढ़) के महमरा एनीकट पर ‘बॉलीवुड डायरी’ की शूटिंग के दौरान आशीष विद्यार्थी डूबते-डूबते बचे थे.

शूटिंग के लिए आशीष को पानी में उतरना था, लेकिन वो ज्यादा गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे. वहां मौजूद लोगों को लगा कि यह फिल्म का ही कोई सीन है, इसलिए कोई मदद के लिए नहीं दौड़ा. तब वहीं ड्यूटी पर तैनात विकास सिंह नाम के पुलिसकर्मी ने उनकी जान बचाई थी.

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द्रोहकाल के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

आशीष ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत कन्नड़ फिल्मों से की. फिर उसके बाद उन्हें हिंदी फिल्मों में काम करने का अवसर प्राप्त हुआ. उनकी पहली (रिलीज) हिंदी फिल्म द्रोहकाल थी. इसमें निभाए गए सपोर्टिंग रोल के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था. फिल्म के डायरेक्टर गोविंद निहलानी थे.

बाजी और नाजायज में विलेन का किया रोल

इसके बाद फिल्म बाजी और नाजायज जैसी फिल्मों में नकारत्मक भूमिकाएं की. आलोचकों ने उनकी इन नेगेटिव भूमिका को सराहा. इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा की कई हिट फिल्मों में विलेन की भूमिका अदा की, जिनमें- हसीना मान जाएगी, कहो ना प्यार है,जोड़ी नम्बर 1, जिद्दी जैसी फ़िल्में शामिल हैं. आशीष मोटिवेशनल स्पीकर के रूप में भी काम करते हैं.

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