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रिलायंस को 25,000 करोड़ में बिग बाजार बेचनेवाले किशोर बोले, अमेजन ने नहीं की मदद  

डील के बाद पहली बार इंटरव्यू में कहा, 8 बार खराब वित्तीय हालात के बारे बताया था अमेजन को

New delhi: पिछले वर्ष कारपोरेट दुनिया की सबसे चर्चित खबरों में मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस द्वारा बिग बाजार को खरीदने की रही थी. इस बारे में देश की मशहूर रिटेल चेन बिग बाजार का स्वामित्व रखनेवाले फ्यूचर ग्रुप के संस्थापक​ किशोर बियानी (Kishore Biyani) ने पहली बार इंटरव्यू में विस्तार से बताया है. किशोर ने कहा है कि जब फ्यूचर ग्रुप (Future Group) को अमेजन की जरूरत थी, तब अमेजन ने उनकी मदद नहीं की. अब यह अमेरिकी कंपनी रिलायंस रिटेल (Reliance Retail) द्वारा फ्यूचर ग्रुप के अधिग्रहण में बाधा बन रही है.

किशोर बियानी ने रिलायंस रिटेल को बचानेवाली कंपनी कहा. उन्होंने अमेजन को लेकर कहा कि यह कंपनी चाहती है कि फ्यूचर ग्रुप पिछड़ जाये. किशोर ने यह भी खुलासा किया कि अमेजन के साथ उन्होंने 8 बार खराब वित्तीय हालात के बारे में चर्चा की, लेकिन अमेजन ने उनकी कोई मदद नहीं की. बियानी ने इस इंटरव्यू में कहा, ‘सह​मति के तहत, वो हमें एफिलिएट्स या वित्तीय संस्थान द्वारा लोन के जरिए फंड्स मुहैया करा सकते थे, लेकिन सहमति की शर्तों और हमारे अनुरोध के बावजूद भी उन्होंने ऐसा नहीं किया.’ बियानी ने यह भी कहा कि ​रिलायंस के साथ यह डील कंपनी को बचाने के लिए थी. उन्होंने अपनी संपत्ति बढ़ाने या रिटेल लिगेसी को जारी रखने के ​लिए नहीं किया है.

रिलायंल-फ्युचर ट्रांजैक्शन पर एसआईएसी पर रोक

 

रिलायंस को 25,000 करोड़ रुपये में सभी रिटेल एसेट्स को बेचने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत में उन्होंने यह बात कही है. अमेजन की याचिका के बाद सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) ने रिलायंल रिटेल-फ्युचर ग्रुप (Reliance Retail-Future Group Deal) के बीच इस ट्रांजैक्शन पर रोक लगा दी है.
अमेजन का कहना है कि फ्यूचर ग्रुप ने उस कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन किया है, जिसमें उसके पास किसी भी सेल को मना करने या प्रतिबंधित करने का हक है. बियानी ने कहा कि अमेजन के लिए उन्होंने पूरी कोशिश की ताकि उनकी कंपनी की कर्ज की समस्या को खत्म हो सके. अमेजन के पास फ्यूचर ग्रुप होल्डिंग कंपनी में हिस्सेदारी है.

अमेजन के ऑफिस को लिखा 12 पन्नों का लेटर

उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें 4-5 निवेशकों से भी मिलवाया लेकिन उन्होंने कभी भी कोई रुचि नहीं दिखाई और वे केवल दिखावटी रूप से सहमति दे रहे थे. उनकी मंशा क्या थी? वे चाहते हैं कि सभी कर्मचारी, सप्लायर्स, वेंडर्स और लेंडर्स को परेशान होना पड़े और कंपनी पिछड़ जाए.’ उन्होंने बताया कि कंपनी के प्रोमोटर्स की तरफ से अमेजन के ग्लोबल ऑफिस को इस बारे में 12 पन्नों का एक लेटर भी लिखा. बियानी ने कहा कि उन्होंने अमेजन को रिलायंस के साथ ट्रांजैक्शन के बारे में कई बार जानकारी भी दी और उन्होंने हमें सपोर्ट भी किया.

अमेजन के पास फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) में 5 फीसदी हिस्सेदारी है. इसमें बिग बाजार और ईजीडे जैसे सभी फूड एंड ग्रॉसरी चेन्स हैं. अमेजन के पास फ्यूचर कूपन्स ​प्राइवेट लिमिटेड में 49 फीसदी हिस्सेदारी है, जिसे उसने 1,500 करोड़ रुपये में खरीदा था

रिलायंस डील ने बचाया

बियानी ने कहा कि हमने Witzig एडवायजरी सर्विसेज से भी बात की है. समारा कैपिटल (Samara Capital) के साथ यह अमेजन की ज्वाइंट वेंचर कंपनी है. लेकिन, इसके बाद अमेजन ने उनकी मदद नहीं की. एक महीने में ही कंपनी के शेयर्स 70 फीसदी तक लुढ़क चुके थे और उसपर बिक्री का दबाव बढ़ गया था. उनके पास हक था कि 3 से 10 साल में वे शेयर्स खरीदकर प्रमुख निवेशक सकें. लेकिन, प्रोमोटर शेयर्स इनवोक होने के बाद यह भी विकल्प नहीं बचा था. रिलायंस ​डील ने कर्मचारियों, हितधारकों और क्रेडिटर्स को बचाया है.

उन्होंने कहा, ‘मुझे एक रुपये का भी फायदा नहीं हुआ है लेकिन मुझे अपना रिटेल बिजनेस को खोया है. पिछले 3 दशक में हमने इसे कड़ी मेहनत से खड़ा किया था. मुझे अभी भी 2 लाख करोड़ डॉलर के लिए लड़ना पड़ सकता है. अगर कोई विवाद होता है तो यह प्रोमोटर्स और अमेजन के बीच होगा और उन्हें हमारी उन लिस्टेड कंपनियों में क्यों दखल देना है’.

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