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सुखाड़ आकलन वास्तविकता से परे, किसानों के साथ मजाक कर रही सरकार: किसान सभा

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Ranchi: केंद्र हो या राज्य की सरकार हो सभी ने किसानों और गरीबों का शोषण ही किया है. हाल के दिनों में राज्य सरकार की ओर से सुखाड़ क्षेत्रों का आकंलन किया गया था, लेकिन जो आकंलन किया गया है, वो वास्तविकता से परे है. राज्य में 74 प्रतिशत बारिश की कमी के कारण 16.5 लाख हेक्टेयर की जगह सिर्फ 6.5 लाख हेक्टेयर पर ही धान की फसल लगायी गयी. जो कुल फसल की मात्र 35 प्रतिशत है. उक्त बातें झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुरजीत सिन्हा ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा. उन्होंने कहा कि इलाकों का दौरा करने से जानकारी हुई कि आखिरी समय में बारिश होने के कारण भी धान पर्याप्त नहीं उगे हैं.

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गलत बीजों का वितरण किया गया

सुरजीत ने कहा कि कई गांवों में कृषि विभाग की ओर से खराब बीजों का वितरण किया गया था. जिसके कारण खेती तो बर्बाद हुई ही, वहीं कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जहां समय रहते बीजों का वितरण नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि ऐसे में साफ है कि विभाग की ओर से बीजों की कालाबाजारी की गयी. जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा.

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धान खेती के गिरावट में कई कमी

मौके पर पूर्व विधायक एवं अध्यक्ष राजेंद्र सिंह मुंडा ने कहा कि धान की खेती बर्बाद होने के कई कारण है. खाद की कालाबाजारी से बिचौलिया एवं व्यापारी मालामाल हुए हैं और किसान तबाह हुए हैं. मनरेगा के बनाये डोभा और पोखरों में पानी नहीं है, जिसके कारण धान के लिए खेतों में पानी नहीं मिल पाया. ऐसे में लोग भूखमरी का शिकार हो रहे हैं और नतीजन पलायन कर रहे हैं.

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किसानों के साथ मजाक कर रही सरकार

राजेंद्र ने कहा कि सरकार किसानों के साथ मजाक रह रही है. राज्य के 263 प्रखंडों में से 129 प्रखंडों को सूखा क्षेत्र घोषित किया गया है और इन इलाकों के राहत कि लिए मात्र 100 करोड़ रुपये की राशि दी गयी है, जो किसानों के साथ मजाक है. किसानों के प्रति सरकार को रवैया सुधारना चाहिये. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार को चाहिये के सूखा क्षेत्रों के आकंलन की वास्तविक रिर्पोट सामने लाये और प्रत्येक प्रखंड को पांच करोड़ राशि राज्य कोश से दी जाये.

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