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किलोग्राम अब रिटायर हो रहा है, वजन का बाट 20 मई, 2019 से बदल जायेगा

  किलोग्राम को मापने वाली चीज फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक तिजोरी के अंदर रखी है. ये प्लेटिनम से बनी एक सिल है, जिसे ली ग्रैंड के कहा जाता है. यह एक सिलेंडर है और इसे ही इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम माना जाता है.

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Versailles :  किलोग्राम के बारे में नयी खबर है. किलोग्राम अब रिटायर हो रहा है. खबरों के अनुसार फ्रांस में दुनिया के 60 वैज्ञानिकों ने वोटिंग करके किलोग्राम के सबसे बड़े पैमाने या मानक को रिटायर कर दिया है. इसका मतलब एक किलोग्राम का वजन अब बदल गया है. बता दें कि किलोग्राम को मापने वाली चीज फ्रांस की राजधानी पेरिस में एक तिजोरी के अंदर रखी है. ये प्लेटिनम से बनी एक सिल है, जिसे ली ग्रैंड के कहा जाता है. यह एक सिलेंडर है और इसे ही इंटरनेशनल प्रोटोकॉल किलोग्राम माना जाता है. अब तक इसे एक किलो के सबसे सटीक बाट के रूप में जाना जाता था. यह साल 1889 से विश्व का एकमात्र वास्तविक किलोग्राम माना जाता रहा है. जान लें कि फ्रांस के वर्साइल्स में आयोजित वैज्ञानिकों के एक सम्मेलन में ज्यादातर वैज्ञानिकों के विचार थे कि किलोग्राम को यांत्रिक और विद्युत चुंबकीय ऊर्जा के आधार पर परिभाषित किया जाना चाहिए.

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एक किलो के बाट में 30 माइक्रोग्राम का फर्क आया था

इस संबंध में हुई वोटिंग के जरिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गयी. शुक्रवार को हुए इस निर्णय से वजन मापने की इकाई किलोग्राम और मापन की दूसरी इकाइयों की नयी परिभाषाएं तय होने का मार्ग प्रशस्त हो गया. इससे विभिन्न देशों के मध्य व्यापार और अन्य मानवीय कार्यों पर प्रभाव पड़ेगा. वर्साय में एकत्र हुए ऐसे तमाम वैज्ञानिकों ने, जिन्होंने इसके लिए दशकों इंतजार किया था, नये फैसले पर तालियां बजाईं और खुशी जाहिर की, यहां तक कि कुछ प्रतिनिधियों की आंखों में आंसू भी आ गये.  हालांकि इस बदलाव का आम लोगों पर कोई असर नहीं होगा. इसको इस तरह समझिए कि एक किलो चीनी खरीदते समय आपको चीनी का एक दाना कम मिले या ज्यादा, क्या फर्क पड़ता है. लेकिन विज्ञान के प्रयोगों में इसका काफी असर होगा, क्योंकि वहां सटीक माप की जरूरत होती है.  कुछ साल पहले इस एक किलो के बाट में 30 माइक्रोग्राम का फर्क आया था. ये फर्क चीनी के सिर्फ एक चीनी के दाने जितना है, लेकिन विज्ञान की दुनिया के लिए ये फर्क बहुत बड़ा है. यह 20 मई, 2019 से प्रभावी होगा.

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