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खूंटी गैंगरेप पीड़िताओं को गैरकानूनी रुप से पुलिस हिरासत में तीन हफ्ते रखा गया : फैक्ट फाइंडिंग टीम

Khunti: खूंटी में हुए गैंगरेप की घटना तथा मानवाधिकारों के हनन के मामले की फैक्ट फाइंडिंग के लिए 17-18 अगस्त को स्थानीय सामाजिक कार्यकताओं के साथ डब्लूएसएस और सीडीआरओ की 10 सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग टीम खूंटी गई थी. फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अपनी जांच के बाद बताया कि पुलिस को गैंगरेप की घटना होने की जानकारी मिली, लेकिन एफआईआर के मुताबिक यह स्पष्ट नहीं है कि, उन्हें घटना की जानकारी कहां से मिली. फैक्ट फाइंडिंग की टीम द्वारा पुलिस अधिकारी से पूछताछ करने पर यह पता चला कि महिला थाना को भी घटना की जानकारी एसपी ऑफिस से मिली थी. एसपी से इसके बारे में पूछने पर उन्होंने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया. 20 जून की रात से ही पुलिस ने पीड़िताओं से संपर्क साधने की कोशिश की पर, वे 21 जून को पीड़िताओं तक पहुंच पाए.

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जांच टीम ने आगे बताया कि गैंगरेप से जूझ रही पांचों पीड़िताओं को पुलिस द्वारा उनकी रक्षा करने के नाम पर, गैरकानूनी रुप से पुलिस कि हिरासत में काफी समय तक (तीन हफ्ते तक) रखा गया. पुलिस की हिरासत में 3 हफ्ते तक उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा था, केवल एनसीडब्लू की टीम उनसे मिल पाई. यहां तक की, एक पीड़िता के परिजनों के अनुसार उनको भी पीड़िता से घटना के दो-तीन दिन बाद केवल थाने में पुलिस वालों की मौजूदगी में पांच-दस मिनट के लिए मिलने दिया गया. प्रशासन की इस कार्यवाई को एसपी ने दिशा निदेर्शों का हवाला देते हुए सही बताया है.

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पीड़िताओं को नहीं मिला मुआवजा और सरकारी नौकरी

ज्ञात है कि पीड़िताओं को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की बात प्रशासन द्वारा की गई थी, पर परिवार और एसपी से बात करने पर पता चला कि अभी तक केवल एक लाख रुपये दिए गए थे. फादर आलफान्स पर एफआईआर में षडयंत्र करना, जबदस्ती रोककर रखना और गैंगरेप के जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. फादर के बारे में एफआईआर में यह आरोप लगाया गया है कि, उन्होंने नन को रोक लिया जबकि बांकि लड़कियों को जानबूझ कर मोटर साइकिल पर सवार चार लोगों के साथ जंगल में जाने दिया. फैक्ट फांडिंग टीम को अन्य सूत्रों से यह पता चला है कि फादर खुद उस परिस्थिति में डरे हुए थे. मामले में बिना ठोस आधार के इतने गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. इस मामले में संजय शर्मा का कोई पता नहीं चला है, कि वह कहां है. मामले में घटना के दिन पीड़िताओं के साथ गई दोनों सिस्टर का भी कोई पता नहीं है. वह भी काफी डरे हुए हैं और किसी से बात नहीं कर रहे. इसके अलावा, इस मामले में पत्थलगढ़ी आंदोलन को भी गैर कानूनी दबाव बना करके दबाया जा रहा है.

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लोगों को चुप्पी साधने पर मजबूर कर रही है पुलिस

26 जून को घाघरा में पुलिस के जवानों ने यह कहकर अंदर घुसने की कोशिश कि, की वहां रेप के मामले के आरोपी पत्थलगढ़ी में शामिल होने वाले हैं. जबकि घाघरा गांव में पत्थलगढ़ी को लेकर ग्राम सभा हो रही थी जहां आस-पास के गांव के लोग आए थे. वहां पुलिस और गांव वालों के बीच झड़प हुई जिसके कारण एक व्यक्ति कि मौत हो गई और कई घायल हैं, जबकि कई महिलाओें पर यौन हिंसा हुई है. घाघरा में भी पुलिस ने करीब दो हफ्तों तक कैम्प किया था और आज भी पुलिस की गश्त उस इलाके में होती रहती है. साथ ही, कोचांग में अर्धसैनिक बलों के पांच कैम्प लगाए गए थे जिसमें से तीन कैम्प अभी भी वहां है. कोचांग में गैंगरेप की घटना के बाद, फिलहाल कैम्प कोचांग के स्कूल में लगा है जिसके कारण गांव के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. कैम्प लगाने के लिए गांव के लोगों के उपर जमीन देने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि छोटा नागपुर टेनेन्सी एक्ट के अंतर्गत गैर आदिवासियों को जमीन नहीं दी जा सकती. ऐसा नहीं करने पर गांव वालों को धमकाया जा रहा है कि कैम्प के लिए जमीन नहीं देने पर उनपर मुकदमा कर दिया जाएगा. कोचांग और आस-पास के इलाकों में ग्राम प्रधान और गांव वालों पर राजद्रोह और अन्य धाराओं के अंतर्गत कई एफआईआर डाले गए हैं. पर आज तक उनके खिलाफ वारंट नहीं निकला गया है. इन सभी घटनाक्रमों के कारण पूरे इलाके में डर का माहौल है. पुलिस लोगों पर फर्जी मुकदमा करके उन्हें चुप्पी साधने पर मजबूर कर रही है.

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गैरकानूनी तरीके से जमीन लेने पर रोक लगाने की मांग

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने राज्य सरकार से मांग की है कि घाघरा में महिलाओं के उपर अर्धसैनिक बलों और पुलिस द्वारा किए गए यौन हिंसा और पत्थलगढ़ी आंदोलन को दबाने की प्रशासन की कोशिश पर स्वतंत्र जांच की जाए. खुंटी जिले में कोचांग व अन्य जगहों पर जहां अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है, वहां से उन्हे हठाया जाए. कोचांग के स्कूल से अर्धसैनिक बलों का कैम्प हटाया जाए और वहां के गांव वालों पर कैम्प बनाने के लिए गांव की जमीन देने की गैरकानूनी मांग पर रोक लगाई जाए.

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राजद्रोह के मुकदमें वापस लेने की मांग

फैक्ट फाइंडिंग टीम ने आगे बताया कि झारखण्ड के 20 सामाजिक कार्यकताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया है जिसमें राजद्रोह, देश से जंग लडने, षडयंत्र करने जैसे संगीन आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं. एफआईआर में यह धाराएं फेसबुक पोस्ट के आधार पर लगाई गई है. इसमें कई के उपर ये धाराएं केवल फेसबुक पोस्ट को पसंद करने के लिए डाली गई है. इस मामले में अभी तक अभियुक्तों के खिलाफ वारंट नहीं निकला है. यह भी जानना बहुत
जरुरी है कि जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुआ है वह सभी पढ़े-लिखे तबके से आते हैं और गरीब आदिवासियों और हाशिये पर रह रहे समाज के सवालों पर काम करते रहे है. ये सभी सरकार और पुलिस की असंवैधानिक और दमनकारी नीतियाों और प्रशासनिक कार्यवाईयों के उपर सवाल उठाते रहे है.

झारखंड के 20 सामाजिक कार्यकताओं पर लगाए गए राजद्रोह के मुकदमें वापस लिये जाए. साथ ही, गांव वालों और ग्राम प्रधानों पर लगाए गए राजद्रोह और अन्य मुकदमें वापस लिये जाए.

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