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केरल नन रेप केस : बिशप फ्रैंको मुलक्कल को हाई कोर्ट से जमानत, CBI जांच से इनकार

केरल हाई कोर्ट ने नन रेप केस के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत को सशर्त मंजूरी दे दी है.  कोर्ट के अनुसार वर्तमान में फ्रैंको की गिरफ्तारी कोई मुद्दा नहीं है.

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Thiruvanthapuram : केरल हाई कोर्ट ने नन रेप केस के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत को सशर्त मंजूरी दे दी है.  कोर्ट के अनुसार वर्तमान में फ्रैंको की गिरफ्तारी कोई मुद्दा नहीं है. बता दें कि जालंधर डायसिस के पूर्व बिशप मुलक्कल को पिछले माह गिरफ्तार किया गया था. खबरों के अनुसार न्यायमूर्ति राजा विजयराघवन ने बिशप मुलक्कल की जमानत मंजूर करते हुए  निर्देश दिया कि वह अपना पासपोर्ट अधिकारियों के समक्ष जमा करेंगे और हर हफ्ते एक बार शनिवार के दिन जांच अधिकारी के समक्ष पेश हेांगे. इसके अलावा केरल में कभी दाखिल नहीं होंगे. इस क्रम में जांच पर संतुष़्ट होते हुए कोर्ट ने कहा कि यह पुराना मामला है, इसलिए जांच में समय लगेगा और आरोपी को जेल में डालने से बड़ा मुद्दा उसे दी जाने वाली अंतिम सजा है. इस मामले में दो याचिकाओं पर सुनवाई के अलावा अदालत ने इस मामले की जांच सीबीआई से कराने संबंधी याचिका पर भी सुनवाई की और कहा कि अभी इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती. अब अगली सुनवाई 24 को होगी.

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बिशप की जमानत तीन अक्टूबर को कोर्ट ने खारिज कर दी थी

इससे पूर्व 21 सितंबर को गिरफ्तार हुए बिशप की जमानत तीन अक्टूबर को कोर्ट ने खारिज कर दी थी .  इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट के समक्ष नयी याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने दलील दी थी कि पुरानी याचिका के समय अभियोजन ने जो आपत्तियां की थी, वह अब नहीं हैं. बिशप के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के 85 दिन बाद उनकी गिरफ्तारी हुई थी . 28 जून को कुराविलंगड़ थाने में दुष्कर्म पीड़िता का बयान दर्ज किए जाने के बाद बिशप के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी. बता दें कि पीड़िता नन ने आरोप लगाया था कि बिशप ने 2014 से 2016 के बीच कई बार उनके साथ दुष्कर्म किया था .  मामला तूल पकड़ने के बाद बिशप ने अपने बचाव में कई तर्क दिये थे. उन्होंने यहां तक कहा कि उनसे बदला लेने के लिए यह शिकायत की गयी है.

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बिशप ने नन के खिलाफ जांच करने की भी अनुमति मांगी थी. नन ने इस बात का भी दावा किया था कि उसने चर्च के अधिकारियों को भी इसको लेकर शिकायत की थी लेकिन किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गयी. मुश्किलें बढ़ती देख बिशप मुलक्कल ने एक सर्कुलर जारी करके प्रशासनिक दायित्व दूसरे पादरी को सौंप दिया था.  वहीं, वैटिकन ने भी उनको पदमुक्त कर दिया था.

 

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