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केरल सरकार ने #Citizenship_Amendment_Act  को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी

NewDelhi :  केरल सरकार ने संशोधित नागरिकता कानून(CAA) को सुप्रीम कोर्ट  में चुनौती देते हुए  कोर्ट सेअनुरोध किया है कि इस कानून को असंवैधानिक घोषित किया जाये. केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट  से अनुरोध किया कि  CAA 2019 को संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीने की स्वतंत्रता का अधिकार), अनुच्छेद 25 (किसी भी धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता) का उल्लंघन घोषित किया जाये.

याचिका में केरल सरकार ने अनुरोध किया है कि इस कानून को संविधान में प्रदत्त धर्मनिरपेक्षता के मूलभूत सिद्धांतों का उल्लंघन घोषित किया जाये.

केरल देश का पहला राज्य बन गया है जिसने  CAA के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. केरल ने इससे पहले राज्य में CAA लागू नहीं करने का प्रस्ताव विधानसभा में पास कर रेकॉर्ड बनाया  है.  वह ऐसा करने वाला देश का पहला और अकेला राज्य है.

सुप्रीम कोर्ट CAA के खिलाफ    60 याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है

केरल में वामपंथी गठबंधन लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) की सरकार है जिसकी अगुवाई पिनरायी विजयन कर रहे हैं.   जान लें कि सुप्रीम कोर्ट CAA के खिलाफ लगभग  60 याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है. न्यूज चैनल टाइम्स नाउ ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि केरल सरकार की इस याचिका को 22 जनवरी के लिए लिस्ट कर दिया गया है.  इससे पूर्व विजयन ने 3 जनवरी को 11 मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर CAA का विरोध करने की अपील की थी.

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केरल सरकार ने CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करवाया

इससे पहले, केरल सरकार ने CAA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पास करवाया और अखबारों में विज्ञापन छपवाकर इस बात के लिए अपनी पीठ थपथपाई. हालांकि  केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इसकी आलोचना की.  उन्होंने कहा कि भारत की संसद द्वारा निर्मित कानून के खिलाफ इस तरह विज्ञापन प्रकाशित करने पर राज्य का संसाधन खर्च करना सही नहीं है.  उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रस्ताव की कोई कानूनी या संवैधानिक वैधता नहीं है.  कहा कि नागरिकता विशेष रूप से केंद्र का विषय है, इसका वास्तव में कोई महत्व नहीं है.

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CAA का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं

जान लें कि  पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आये हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के प्रावधान वाले CAA का विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं उनका कहना है कि इसमें मुसलमानों को नहीं रखा गया है जो धार्मिक आधार पर भेदभाव का मामला है.  विपक्षी दलों का कहना है कि संविधान धार्मिक आधार पर भेदभाव की इजाजत नहीं देता है.

वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि चूंकि तीनों पड़ोसी देशों में गैर-मुस्लिमों के साथ धार्मिक आधार पर ही उत्पीड़न होते हैं, इसलिए उन्हें नागरिकता देने का विशेष प्रबंध किया गया है.  केंद्र सरकार ने कहा है कि CAA  में विदेशी मुसलमानों को भारतीय नागरिकता नहीं देने का कहीं उल्लेख नहीं है.

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