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केंद्र ने आयुष चिकित्सकों की रिटायरमेंट उम्र सीमा की 65 साल, झारखंड में विभाग को नहीं है कोई फिक्र

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Kumar Gourav

Ranchi : केंद्र सरकार की आयुर्वेद, योगा, नेचुरोपैथी, युनानी, सिध्द, और होम्योपेथी मंत्रालय ने 24 नवंबर 2017 को ही आदेश जारी करते हुए आयुष डॉक्टरों की उम्र सीमा 60 से बढाकर 65 करने की मंजूरी दे दी है. पर झारखंड राज्य के आयुष डॉक्टरों के लिए उम्र सीमा बढ़ाने के लिए किसी भी तरह की कोई प्रक्रिया नहीं कि गई है और न ही इससे संबंधित विभाग इसको लेकर गंभीर है. झारखंड राज्य आयुष चिकित्सा के विकासात्मक परामर्षदातृ कमिटी के अध्यक्ष डॉक्टर जीतू चरण राम से इस संदर्भ में जब बात की गयी तो उन्होंने कहा कि केंद्र से चिट्ठी प्राप्त होने के बाद ही हम इसपर काम करेंगे. जबकि कई राज्यों ने पहले से ही आयुष डॉक्टरों के लिए उम्र सीमा बढ़ा दी है. अब यहां सवाल ये उठता है कि क्या सिर्फ हमारे राज्य को ही केंद्र की चिट्ठी चाहिए या सिर्फ मामले को टालने के लिए ऐसा कहा गया है.

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केंद्र सरकार ने आयुष डॉक्टर्स की उम्र बढ़ाकर 65 कर दी है

बिहार सरकार ने आयुष डॉक्टर्स के रिटायरमेंट की उम्रसीमा 67 साल कर दिया है.जबकि झारखंड सरकार ने इस ओर कोई पहल नहीं की है. वहीं एलोपैथी डॉक्टर्स की उम्र झारखंड सरकार ने 65 कर दी है और इसमें डेंटल डॉक्टर भी शामिल हैं. लेकिन आयुष डॉक्टर्स को इससे वंचित रखना समझ से परे है या फिर ये समझा जाना चाहिए कि सरकार इनको लेकर जरा भी चितिंत नहीं है. वहीं झारखंड में ही कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गये 70 आयुष डॉक्टर्स को सरकार ने ये कहा है कि यदि उनकी कार्यशैली संतोषजनक रही तो कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाया जायेगा और 65 वर्ष की उम्र तक उन्हें काम करने का मौका दिया जायेगा.

विधायक राज सिन्हा भी कर चुके हैं मांग

धनबाद के भाजपा विधायक राज सिन्हा ने झारखंड सरकार में कार्यरत आयुष चिकित्सकों के रिटायरमेंट की आयु 65 साल  करने की मांग की है. इस संदर्भ में उन्होंने मुख्यमंत्री को खत भी लिखा है और  प्रधानमंत्री द्वारा इस चिकित्सा पद्धति पर विशेष ध्यान दिए जाने की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कार्रवाई की मांग भी कर चुके हैं. साथ ही उन्होंने बिहार सरकार दवारा बढ़ाए गए उम्र सीमा का भी जिक्र किया है.

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आभाव के कारण 18 औषधालयों में लटका है ताला

चिकित्सकों की कमी और दवा के अभाव के कारण जिले के 18 आयुष औषधालयों में ताला लटक गया है. जिले के सभी छह प्रखंड में 20 होमियोपैथी, आयुर्वेद व यूनानी औषधालय स्थित हैं. लेकिन इसमें से दो केंद्रों पर फिलहाल एक-एक चिकित्सक कार्यरत हैं.जबकि अधिकतर केंद्रों के बंद रहने से लोगों को होमियोपैथी, आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सा पद्धति का लाभ नहीं मिल रहा है.

बिहार में प्राथमिक स्वास्थय केंद्रों में हो रही है नियुक्ति

केंद्रीय योजनाओं में आयुष चिकित्सकों व दवाओं को जनता के बीच पहुंचाने के कार्यक्रम से सरकार आयुष डॉक्टर्स को रोजगार मुहैया करा रही है. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य के हर एपीएचसी व पीएचसी में आयुष चिकित्सकों की तैनाती हो रही है. बिहार सरकार लोगों की आयुष चिकित्सा के प्रति रुचि को देखते हुए इनका इस्तेमाल करना चाहती है.

झारखंड में 17 वर्षों से नहीं भरे गए हैं पद

राज्य में आयुष चिकित्सकों और चिकित्सा की स्थिति बुरी है. पिछले 17 सालों में आयुष डॉक्टरों के पद स्थाई रुप से नहीं भरे गए हैं. पूरे राज्य में सिर्फ एक ही महाविद्यालय कार्यरत है और राज्य में आयुष चिकित्सकों की भारी कमी है. राज्य के अस्पतालों में कुल 662 आयुष चिकित्सकों की भारी कमी है. 662 पद स्वीकृत हैं. लेकिन कार्यरत डॉक्टर सिर्फ 95 ही हैं. वहीं राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत राज्य में 447 अनुबंधित आयुष डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है और जो डॉक्टर्स अभी कार्यरत हैं वो भी रिटायरमेंट के करीब है.

इस बारे में क्या कहते हैं आयुष डॉक्टर्स देखें वीडियो



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