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पीएमसीएच में चल रही है भटकते रहिए योजना !

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Dhanbad: कोयलांचल के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में मानो भटकते रहिए योजना चल रही हो. जी हां, सुनने में थोड़ा अजीब जरुर है, लेकिन धनबाद के सबसे बड़े और करोड़ों रुपये खर्च करने की लगातार चल रही योजना का मकसद अगर, पीएमसीएच में आनेवाले मरीजों और उनके परिजनों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना होता तो यहां मरीज और उनके परिजन मामूली जानकारी के लिए अस्पताल के इस छोर से लेकर उस छोर तक भटकते हुए परेशान नहीं होते.

दुखद तो यह है कि अस्पताल में सैकड़ों कर्मी तैनात हैं, लेकिन कोई सीधे मुंह से बात ही नहीं करता. डाक्टरों की भाषा तो और भी खराब होती है. मानो वह तो अस्पताल में गरीब मरीजों को इलाज के नाम पर जैसे-तैसे निबटा कर बहुत बड़ा एहसान करते है. हालांकि, पैसे लेकर बहुत से स्टाफ मरीजों की सेवा करते हैं.

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जिनके पास पैसे नहीं उनके लिए अस्पताल की प्रचलित भाषा में भटकते रहो योजना लागू है. इतने बड़े अस्पताल में कोई पूछताछ केंद्र नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी होती है. दूरदराज के इलाक़ों से आनेवाले मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए अस्पताल के विभिन्न विभागों में भटकना पड़ता है. किसी भी प्रकार की जानकारी संबंधित विभाग के डॉक्टरों ने दी तो राहत है, नहीं तो बहुत से लोग जानकारी बिना अस्पताल से निराश होकर लौटने को मजबूर होते हैं.

डॉक्टरों की गैरमौजूदगी में उनके विभाग से सबंधित किसी साधारण जांच, मेडिकल क्लेम या टीका की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देने के लिए कोई यहां उपलब्ध नहीं है. जिससे मरीज जानकारी प्राप्त कर सके.कई बार तो मरीज पूरे अस्पताल के चक्कर काट लेते है फिर भी कोई जानकारी आसानी से नहीं मिल पाता.

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पूछताछ केंद्र की बात पर अधीक्षक के कार्यालय ने से मिला जवाब, लिखे सुझाव पत्र
अस्पताल अधीक्षक कार्यालय से पता करने पर कि कोई पूछताछ केन्द्र मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल में क्यों नहीं बनाया जाता? बोला गया कि आपका सुझाव अच्छा है. इसके बारे में डीसी को सुझाव पत्र लिखिए.

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