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कठुआ रेप और मर्डर केस : सात आरोपियों में से छह दोषी करार, सजा पर फैसला आज ही

पठानकोट की विशेष अदालत ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के कठुआ में खानाबदोश समुदाय की आठ साल की बच्ची से बलात्कार और फिर उसकी हत्या के मामले में सात में से छह लोगों को दोषी करार दिया.

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Pathankot : पठानकोट की विशेष अदालत ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के कठुआ में खानाबदोश समुदाय की आठ साल की बच्ची से बलात्कार और फिर उसकी हत्या के मामले में सात में से छह लोगों को दोषी करार दिया.  दोषियों को कितनी सजा दी जायेगी, यह दो बजे घोषित किये जाने की संभावना है. मुख्य आरोपी सांजीराम के बेटे (सातवें आरोपी) विशाल को बरी कर दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के मामले को जम्मू एवं कश्मीर से ट्रांसफर करने के निर्देश के बाद पिछले साल जून के पहले सप्ताह में मुकदमा शुरू हुआ था, जिसकी कैमरे में रिकॉर्डिंग भी की.

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पूरे देश को हिलाकर रख देने वाले इस मामले का मास्टरमाइंड ग्राम प्रधान सांजी राम था. उसके अलावा स्पेशल पुलिस ऑफिसर दीपक खजूरिया, सुरेंद्र वर्मा, हेड कॉन्स्टेबल, आनंद दत्ता और प्रवेश भी दोषी करार दिए गए हैं। दोषियों को कम से कम उम्रकैद और अधिकतम मौत की सजा सुनाई जा सकती है.

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सोमवार सुबह सभी सातों आरोपी स्पेशल कोर्ट में पेश हुए

सोमवार सुबह सभी सातों आरोपी स्पेशल कोर्ट में पेश हुए.  जिला और सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह की अदालत ने एक-एक कर सभी सातों आरोपियों पर अपना फैसला पढ़ा.  स्पेशल कोर्ट ने 6 दोषियों में से 3 को रेप और मर्डर का दोषी पाया. बाकी तीन को सबूत मिटाने का दोषी माना गया.  सांझी राम, प्रवेश कुमार, दीपक खजुरिया को 302 (मर्डर), 376 (रेप), 120 बी (साजिश) . 363 (किडनैपिंग) के तहत दोषी करार दिया गया.  कोर्ट ने पुलिसकर्मी आनंद दत्ता, सुरेंद्र कुमार , तिलक राज को 201 (सबूतों को मिटाना) के तहत दोषी माना.

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सुप्रीम कोर्ट ने मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजने का आदेश दिया था

देश को स्तब्ध कर देने वाले इस मामले में बंद कमरे में सुनवाई 3 जून को पूरी हो गयी थी.  तब जिला और सत्र न्यायाधीश तेजविंदर सिंह ने घोषणा की थी कि 10 जून को फैसला आ जायेगा.  कठुआ केस में फैसला सुनाये जाने के मद्देनजर अदालत और उसके आसपास कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किये गये थे.  पंद्रह पन्नों के आरोपपत्र के अनुसार पिछले साल 10 जनवरी को अगवा 8 साल की बच्ची को कठुआ जिले के एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया. उसे 4 दिन तक बेहोश रखा गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गयी. मामले में रोजाना आधार पर सुनवाई पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट में जिला और सत्र अदालत में पिछले साल जून के पहले सप्ताह में शुरू हुई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजने का आदेश दिया था, जिसके बाद जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पठानकोट की अदालत में मामले को भेजा गया.  शीर्ष अदालत का आदेश तब आया जब कठुआ में वकीलों ने अपराध शाखा के अधिकारियों को इस सनसनीखेज मामले में आरोपपत्र दाखिल करने से रोका था। इस मामले में अभियोजक दल में जेके चोपड़ा, एस. एस. बसरा और हरमिंदर सिंह शामिल थे.

इस मामले में कुल आठ आरोपी बनाये गये थे, जिनमें से एक नाबालिग था.  अपराध शाखा ने इस मामले में ग्राम प्रधान सांजी राम, उसके बेटे विशाल, किशोर भतीजे और उसके दोस्त आनंद दत्ता को गिरफ्तार किया था. इस मामले में दो विशेष पुलिस अधिकारियों दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया.  सांजी राम से कथित तौर पर 4 लाख रुपये लेने और महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट करने के मामले में हेड कॉन्स्टेबल तिलक राज और एसआई आनंद दत्ता को भी गिरफ्तार किया गया.  जिला और सत्र न्यायाधीश ने आठ आरोपियों में से सात के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या के आरोप तय किये थे. किशोर आरोपी के खिलाफ मुकदमा अभी शुरू नहीं हुआ है और उसकी उम्र संबंधी याचिका पर जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट सुनवाई करेगा.

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