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Karwa Chauth 2021 : करवा चौथ व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त व व्रत कथा

Karwa Chauth 2021: कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि यानि आज सुहागिनों ने सूर्योदय के साथ करवा चौथ के व्रत की शुरुआत की है. ये व्रत पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ये व्रत पूरा होता है. जानिए क्या परंपरा और शुभ मुहूर्त..

सफेद रंग की वस्तुओं का न करें दान

करवा चौथ का व्रत सु​हागिन महिलाओं के लिए अति महत्वपूर्ण होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के दिन किसी भी सफेद रंग की वस्तु का दान भूलकर भी नहीं करना चाहिए. ऐसा करना अशुभ होता है. इस लिए सफेद कपड़े, दूध, चावल, दही और सफेद मिठाई का दान न करें.

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काले या भूरे रंग के कपड़े से करें परहेज

करवा चौथ व्रत पूजा में कपड़ों के रंगों का बहुत ही महत्व होता है. इस व्रत में सुहागिनों को 16 श्रृंगार करके पूजा करने का विधान है इसलिए सुहागिन महिलाएं  कपड़ों का चयन करते समय काले या भूरे रंग के कपड़ों का चयन न करें. इस व्रत में काले या भूरे रंग के कपड़े पहनना अशुभ होता है.

सामान्यतः किसी भी व्रत में व्रत धारण करने वाले कोई भी अपशब्द नहीं कहना चाहिए. करवा चौथ व्रत के दिन तो भूलकर भी किसी को अपशब्द नहीं कहना चाहिए और नहीं किसी का अपमान करना चाहिए. इस दिन वाणी पर संयम रखें तथा किसी प्रकार का कोई भी वाद –विवाद न करें. धार्मिक मान्यता है कि साफ और शुद्ध मन से व्रत करने पर आपकी मनोकामना पूरी होती है.

अखंड सौभाग्य का व्रत करवा चौथ का व्रत रखने वाली सभी महिलाओं को चांद निकलने का बेसब्री से इंतजार रहता है. हालांकि इस साल चांद का दीदार पिछले साल की अपेक्षा थोड़ा जल्दी होगा. ऐसे में हम आपको कुछ महत्वपूर्ण शहरों के बारे में बता रहे हैं कि वहां चांद किस वक्त दिखाई देगा.

करवा चौथ पूजन के लिए शुभ मुहूर्त

करवा चौथ पूजन के लिए शुभ मुहूर्त शाम 06:55 से लेकर 08:51 तक रहेगा. वहीं करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 8 बजकर 11 मिनट है, लेकिन अलग-अलग स्थानों के हिसाब से चंद्रोदय का समय भी भिन्न है. कुछ शहर में इसका दीदार पहले हो जाता है, तो कहीं पर ये थोड़ा वक्त लेता है.  आइये बताते हैं कि आपके शहर में चंद्रमा कितने बजे निकलेगा.

रांची: 07 बजकर 46 मिनट

पटना: 07 बजकर 42 मिनट

दिल्ली: 08 बजकर 08 मिनट

मुंबई 08 बजकर 47 मिनट

बेंगलुरु 08 बजकर 39 मिनट

लखनऊ: 07 बजकर 56 मिनट

आगरा : 08 बजकर 07 मिनट

अलीगढ़: 08 बजकर 06 मिनट

मेरठ 08 बजकर 05 मिनट

नोएडा 08 बजकर 07 मिनट

गोरखपुर 07 बजकर 47 मिनट

मथुरा 08 बजकर 08 मिनट

सहारनपुर 08 बजकर 03 मिनट

बरेली: 07 बजकर 59 मिनट

रामपुर : 8 बजे

फर्रुखाबाद: 08 बजकर 1 मिनट

इटावा : 8 बजकर 05 मिनट

जौनपुर : 07 बजकर 52 मिनट

कोलकाता: 07 बजकर 36 मिनट

जयपुर: 08 बजकर 17 मिनट

देहरादून: 8 बजे

करवा चौथ व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार इंद्रप्रस्थपुर में एक ब्राह्मण रहा करता था. साथ में उसका पुत्र और वीरवती नामक पुत्री भी रहा करती थी. ब्राह्मण को एक ही पुत्री थी. इसलिए वह ब्राह्मण की बेहद लाडली थी. बड़े होने पर ब्राह्मण ने अपनी बेटी का विवाह एक ब्राह्मण युवक से कर दिया. शादी के बाद ब्राम्हण की पुत्री पहली बार करवा चौथ पर अपने मायका आई. उसने पति की लंबी आयु के लिए पिता के घर में ही करवा माता का व्रत रखा. लेकिन निर्जला व्रत होने के कारण वीरावती इस व्रत को सही तरीके से नहीं कर पाए.

वह मूर्छित होकर गिर पड़ी. उसके मूर्छित होने पर भाइयों ने उसका व्रत खुलवा दिया. उन्होंने एक दीप जलाकर पेड़ के नीचे छलनी में रख दिया और बहन को बोला कि चांद निकल आया है. बहन भाई की बात को मान ली और वह चंद्र दर्शन करके पूजा पाठ करने के बाद नीचे आकर खाना खा ली. ब्राह्मण की पुत्री भोजन अभी शुरू ही की थी, कि किसी को छींक आ गई और थोड़ी देर बाद उसे ससुराल से निमंत्रण भी आ गया.

ससुराल का से निमंत्रण आने की बात सुनकर ब्राह्मण की पुत्री भागते-भागते वहां पहुंची. वहां जाने के बाद उसने देखा कि उसका पति मर चुका है, उसके परिवार के सदस्य पति के मृत शरीर के सामने व्याकुल होकर रो रहे हैं. ब्राह्मण की पुत्री की ऐसी हालत देखकर इंद्र देवता की पत्नी देवी इंद्राणी उसे सांत्वना देने के लिए वहां गई. तब उन्होंने उसके गलती को बताया और करवा चौथ के साथ पूरे साल आने वाले चौथ के व्रत को करने को कहा. ब्राह्मण की पुत्री इंद्राणी माता की बात सुनकर ठीक उसी प्रकार सारे व्रत को करने लगी. इस प्रकार करवा माता प्रसन्न होकर उसके पति को पुनः जीवनदान दे दिया.

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