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श्रद्धालुओं के लिए अभी नहीं खुलेगा करतारपुर कॉरिडोर, पिछले साल से यात्रा है बंद

New Delhi : करतारपुर कॉरिडोर नहीं खुलने से सिख श्रद्धालुओं में निराशा है. उन्हें उम्मीद थी कि गुरु पर्व के मौके पर कॉरिडोर खोल दिया जाएगा. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने भी पीएम मोदी को ट्वीट कर करतारपुर साहिब दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए गलियारा खोलने का आग्रह किया था. लेकिन इन सबके बीच भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि करतारपुर गलियारा अभी नहीं खुलेगा.

मार्च 2020 से बंद है करतारपुर कॉरिडोर

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता अरिंदम बागची कहा, करतारपुर कॉरिडोर को कोरोना के कारण पिछले साल मार्च  में बंद किया गया था. दोनों देशों के बीच जमीनी रास्ते से बेहद सीमित आवाजाही वाघा-अटारी सीमा चैक पॉइंट से हो रही है. 1500 तीर्थ यात्रियों का एक जत्था गुरु पर्व के मौके पर 17-26 नवम्बर तक पाकिस्तान की यात्रा करेगा. लेकिन यह यात्रा लैंड बॉर्डर यानी वाघा अटारी चैक पॉइंट से होगी. यह जत्था गुरुद्वारा ननकाना साहिब, पंजा साहिब, देहरा साहिब, करतारपुर साहिब समेत 6 स्थानों पर जाएगा. यह यात्रा 1974 के तीर्थ यात्रा प्रोटोकॉल के तहत हो रही है.

1500 श्रद्धालुओं का जत्था जाएगा पाकिस्तान

Sanjeevani

करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर 2019 को किया गया था. गुरू नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर इस कॉरिडोर को करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए खोला गया है. लेकिन कोरोना महामारी की वजह से कारिडोर मार्च 2020 से बंद है. गुरु पर्व के मौके पर 17 से 26 नवंबर के बीच लैंड बॉर्डर यानी अटारी वाघा से 1500 श्रद्धालुओं का जत्था पाकिस्तान जा सकेगा.

पाकिस्तान मेजबानी के लिए उत्सुक

वहीं पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने कहा था, ‘’भारत ने अभी तक अपनी तरफ से गलियारा नहीं खोला है और तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब की यात्रा की अनुमति नहीं दी है. गुरु नानक देव की जयंती पर 17 से 26 नवंबर तक आयोजित समारोह के लिए हम भारत और दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं की मेजबानी के लिए उत्सुक हैं.”

हालांकि इसके पहले पाकिस्तान ने जून में अर्जन देव जी शहीदी दिवस और रणजीत सिंह की पुण्यतिथि और के मौके पर भारत से तीर्थ यात्रियों को इजाजत नहीं दी थी.

गुरुनानक देव जी का निवास स्थान

करतारपुर साहिब सिखों का पवित्र तीर्थ स्थल है. यह सिखों के प्रथम गुरु, गुरुनानक देव जी का निवास स्थान था और यहीं पर उनका निधन भी हुआ था. बाद में उनकी याद में यहां पर गुरुद्वारा बनाया गया. इतिहास के अनुसार, 1522 में सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक करतारपुर आए थे. उन्होंने अपनी ज़िंदगी के आखिरी 17-18 साल यही गुज़ारे थे. 22 सितंबर 1539 को इसी गुरुद्वारे में गुरुनानक जी ने आखरी सांसे ली थीं. इसलिए इस गुरुद्वारे की काफी मानयता है.

पाकिस्तान के नारोवाल जिले में है करतारपुर साहिब

करतारपुर साहिब, पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित है. यह भारत के पंजाब के गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक से तीन से चार किलोमीटर दूर है और करीब लाहौर से 120 किमी. दूर है. भारत में पंजाब के डेरा बाबा नानक से अंतर्राष्ट्रीय सीमा तक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है और वहीं पाकिस्तान भी सीमा से नारोवाल जिले में गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण हुआ है. इसी को करतारपुर साहिब कॉरिडोर कहा गया है. इसको दोनों देशों की सरकारों ने फंड किया है.

महाराजा रंजीत सिंह ने करवाया था निर्माण

करतारपुर साहिब को सबसे पहला गुरुद्वारा माना जाता है जिसकी नींव श्री गुरु नानक देव जी ने रखी थी और यहीं पर उन्होंने अपने जीवन के अंतिम साल बिताए थे. हालांकि बाद में यह रावी नदी में बाढ़ के कारण बह गया था. इसके बाद वर्तमान गुरुद्वारा महाराजा रंजीत सिंह ने इसका निर्माण करवाया था.

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