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कर्नाटक उपचुनाव: कांग्रेस-जेडीएस को जनता ने दिया 4 सीटों का दिवाली गिफ्ट

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NW Desk: कर्नाटक उपचुनाव को कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था. कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने 5 में से 4 सीटें जीतकर माहौल बना लिया है. खासकर बेल्लारी सीट को काफी अहम माना जा रहा था. यहां पर कांग्रेस की जीत के बड़े मायने हैं. बेल्लारी को रेड्डी बंधुओं का गढ़ माना जा रहा था. लेकिन यहां पर 14 साल बाद कांग्रेस ने वापसी की है. बेल्लारी सीट पर कांग्रेस 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीती है.

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14 साल बाद बेल्‍लारी सीट पर कांग्रेस का कब्‍जा

कांग्रेस ने 14 साल के बाद बेल्‍लारी सीट पर जीत हासिल की है. बीजेपी वर्ष 2004 से ही इस सीट पर जीतती आ रही थी. वर्ष 1999 में सोनिया गांधी ने सुषमा स्‍वराज को हराया था. विधानसभा चुनाव के बाद उभरे नए राजनीतिक समीकरण के बीच सत्‍तारूढ़ गठबंधन (कांग्रेस-जेडीएस) और बीजेपी के बीच यह पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है. इसमें कांग्रेस ने 4-1 से बाजी मार ली है. पांच सीटों पर उपचुनाव होने के बावजूद कांग्रेस-बीजेपी नेताओं और समर्थकों के अलावा राजनीतिक विश्‍लेषकों की नजरें बेल्‍लारी लोकसभा सीट पर ही टिकी थीं.

बेल्‍लारी रेड्डी बंधुओं का प्रभाव क्षेत्र भी माना जाता है. इसके अलावा उपचुनाव में कर्नाटक के पूर्व मुख्‍यमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता बीएस येद्दियुरप्‍पा की नेतृत्‍व क्षमता भी दाव पर लगी थी. इसके बावजूद कांग्रेस प्रत्‍याशी वीएस. उगरप्‍पा ने बीजेपी उम्‍मीदवार जे. शांता को मात दे दी. बेल्‍लारी कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, लेकिन पिछले 14 वर्षों से इस सीट पर बीजेपी का कब्‍जा था. कांग्रेस ने अब तकरीबन डेढ़ दशक बाद यहां वापसी की है. इससे पहले कर्नाटक में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी के सरकार न बना पाने से येद्दियुरप्‍पा को झटका लगा था. कर्नाटक उपचुनावों में बीजेपी को ऐसे समय हार का सामना करना पड़ा है, जब अगले साल आम चुनाव होने वाले हैं. बता दें कि सोनिया गांधी ने वर्ष 1999 में अमेठी के साथ ही कांग्रेस की सुरक्षित बेल्‍लारी सीट से भी लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उन्‍होंने बीजेपी की सुषमा स्‍वराज को हराया था. हालांकि, वर्ष 2004 के बाद से यह सीट बीजेपी के पास ही रही थी.

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