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लड़कियों के हौसले बुलंद करती है करण जौहर की शॉर्ट फिल्म गर्ल्स गॉट टैलेंट

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New Delhi: फिल्म निर्माता व टीवी होस्ट करण जौहर ने हाल ही में गर्ल्स गॉट टैलेंट के नाम से शॉर्ट फिल्म रिलीज की है. इस फिल्म को बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था सेव द चिल्ड्रेन के  अभियान लाइट अप लाइफ के तहत फिल्माया गया है.

इस फिल्म में करण जौहर ने अपनी आवाज दी है. साथ ही इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाले युवा आइकन और अभिनेता मिथिला पालकर के साथ भी वे नजर आते हैं.

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फिल्म को एक नये सोशल मीडिया अभियान के बाद लांच किया गया है. लांचिंग के दौरान करण जौहर ने निर्णायक मंडली में रहते हुए एक पोस्टर ट्विट किया था, तथा आने वाले नये रियलिटी शो के बारे में बताया था.

जहां उन्होंने फिल्म के माध्यम से संदेश यह दिया कि किस तरह हमारे देश में लड़कियों की प्रतिभाएं जो अनजान, अंधेरे और असुरक्षित सड़कों और गलियों में छिपी रहती हैं, उन्हें सामने लाने की जरूरत है.

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करण ने किया आग्रह कि बदलें समाज का परिदृश्य

फिल्म में, करण जौहर ने देशभर के लोगों से आग्रह किया कि वे हमारे शहरों, गलियों और मोहल्लों के परिदृश्य को बदलने के लिए कदम उठाएं. वह लोगों से यह भी आह्वान करते हैं कि वे इस तरह की छिपी प्रतिभाओं की पहचान करें. फिल्म और अभियान के साथ अपने जुड़ाव के बारे में बात करते हुए करण जौहर ने कहा कि हमारे देश की लड़कियां बेहद प्रतिभाशाली हैं और सभी पेशेवर क्षेत्रों में इनकी पहचान बनी हैं.

लेकिन एक क्षेत्र ऐसा भी है, जहां वे दुर्भाग्य से प्रतिभाशाली हैं – और वे अपनी सुरक्षा का प्रबंधन स्वयं कर रही हैं. जब हम इसके लिए उन्हें सलाम करते हैं, तो हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि सुरक्षा के लिए उनका अपना प्रबंधन एक प्रतिभा नहीं है.

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बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सेव द चिल्ड्रेन और युवाओं द्वारा चलाये जा रहे इस शानदार अभियान का एक हिस्सा बनने पर गर्व महसूस हो रहा है.

यह फिल्म महिलाओं और लड़कियों के विरूद्ध होने वाली हिंसाओं को समाप्त करने के लिए किये जा रहे 16 दिवसीय आंदोलन (25 नवंबर से 10 दिसंबर) के दौरान रिलीज की गई. जिसमें, सार्वजनिक स्थानों पर लड़कियों के यौन उत्पीड़न एवं प्रताड़ना की डर को दिखाती है.

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पुरुषों और महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की है जरूरत – प्रज्ञा वत्स

अभियान के बारे में बोलते हुए, सेव द चिल्ड्रन के इस अभियान की प्रमुख प्रज्ञा वत्स ने कहा, कि भारत में एक लड़की होने के नाते डर का पर्याय है- एक डर जो अंधेरी गलियों में छिप जाता है, गलियों और एकांत सार्वजनिक स्थानों में यह बढ़ जाता है. हमें पुरुषों और महिलाओं के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है.

इस अभियान का उद्देश्य सही मायने में लड़कियों के लिए समान अधिकारों का दावा करना है, ताकि लड़कियां स्वयं को सुरक्षित महसूस करें और भारत आगे बढ़े.

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